Chapter 7 of 20

एक नई धड़कन, एक नई उम्मीद

271 words

समय अपनी रफ्तार से बीत रहा था। हमारे बीच उस मुकम्मल सुबह किया गया वादा—एक नए परिवार और एक बच्चे की शुरुआत का वादा—हम दोनों के दिलों में एक मद्धम दीये की तरह लगातार जल रहा था। एक शाम जब मैं ऑफिस से थका-हारा लौटा, तो कांच की विशाल खिड़की के पास, जहाँ से डूबते सूरज की नारंगी किरणें कमरे में आ रही थीं, माँ खड़ी थीं। उनके हाथ में एक छोटी सी मेडिकल रिपोर्ट थी और उनकी आँखें आंसुओं से डबडबाई हुई थीं। उन्होंने बिना कुछ बोले वह रिपोर्ट मेरे हाथों में थमा दी। डॉक्टर के बड़े-बड़े अक्षरों के बीच साफ लिखा था—पॉजिटिव (Pregnancy Confirmed)। "तुम सच में... तुम सच में मेरे बच्चे की माँ बनने वाली हो?" मेरी आवाज़ जज्बात के बोझ से भारी हो गई। माँ ने धीरे से सिर हिलाया और आकर मेरे सीने से लिपट गईं। "मुझे यकीन नहीं हो रहा है... इस उम्र में भगवान ने मुझे यह सुख दिया है," उन्होंने भर्राए गले से फुसफुसाया। "मुझे डर लग रहा है कि लोग क्या कहेंगे, समाज इस उम्र में इस बात को कैसे देखेगा..." मैंने उनके दोनों गालों को अपने हाथों में लिया और बहुत प्यार से उनके माथे को चूमते हुए कहा, "मैंने आपसे पहले भी कहा था, बाहर की दुनिया का कोई नियम हमारे वजूद से बड़ा नहीं है। इस बच्चे पर, इस नए जीवन पर सिर्फ हमारा हक है। मैं हर मुश्किल के आगे ढाल बनकर खड़ा रहूँगा।" मैंने धीरे से अपना हाथ उनके पेट पर रखा, जहाँ अब एक नन्हीं सी धड़कन आकार ले रही थी। वह पल दो अकेले रास्तों के एक मुकम्मल और पवित्र भविष्य की खूबसूरत शुरुआत था।

End of Chapter 7