Chapter 19 of 20

उलझनों की रात और संवाद की शुरुआत

456 words

रात के सन्नाटे में पूरा पेंटहाउस डूब चुका था, पर गेस्ट रूम की बत्ती अब भी जल रही थी। निशा बिस्तर पर बैठी अपने कॉलेज के नोट्स और मोबाइल स्क्रीन को देख रही थी, लेकिन उसका ध्यान पूरी तरह भटका हुआ था। घर के भीतर का यह अप्रत्याशित माहौल उसकी स्थापित धारणाओं को लगातार चुनौती दे रहा था। नानी का यह नया रूप, नीरू मौसी का शांत अधिकार और मामा का यह अडिग, चुंबकीय प्रभुत्व—सब कुछ उसके लिए एक गहरा मानसिक द्वंद्व बन चुका था। मैं धीरे से उसके कमरे के खुले दरवाजे के पास जाकर खड़ा हो गया। चौखट पर मेरी आहट पाते ही निशा चौंक गई और उसने हड़बड़ाहट में अपनी किताबें समेट लीं। "इतनी देर तक जागना ठीक नहीं है, निशा," मैंने सहज लेकिन गंभीर आवाज़ में कहा और कमरे के भीतर कदम रखा। "नींद नहीं आ रही, मामा," निशा ने अपनी नज़रें नीचे रखते हुए कहा। उसकी आवाज़ में अभी भी एक संकोच और अनजाना डर था। "दिमाग में बहुत सी बातें घूम रही हैं... ऐसा लग रहा है जैसे मैं किसी दूसरी ही दुनिया में आ गई हूँ।" मैं स्टडी टेबल के पास रखी कुर्सी खींचकर उसके सामने बैठ गया। "यह कोई दूसरी दुनिया नहीं है, यह बस उस दुनिया से अलग है जहाँ मुखौटे पहने जाते हैं। तुमने अब तक सिर्फ वही सच देखा है जो समाज की किताबों में लिखा होता है। पर ज़िंदगी सिर्फ किताबों के हिसाब से नहीं चलती।" निशा ने धीरे से अपनी आँखें उठाईं। "लेकिन क्या कायदे-कानून बिल्कुल बेमानी हैं? जिस तरह से आप सब यहाँ रह रहे हैं... अगर मेरे मम्मी-पापा या किसी और को यह पता चला, तो क्या होगा?" "जो लोग सिर्फ दूर से फैसले सुनाते हैं, वे कभी किसी के अकेलेपन का बोझ नहीं उठाते," मैंने उसकी आँखों में सीधे देखते हुए कहा। "तुम्हारी माँ और तुम्हारा परिवार भी जब अपनी समस्याओं में उलझता है, तब वे सिर्फ अपना बचाव देखते हैं। इस घर में जो सुरक्षा, शांति और अपनापन है, वह तुम्हें बाहर की किसी भी बनावटी मर्यादा में नहीं मिलेगा।" निशा ने एक लंबी, गहरी सांस ली। उसके चेहरे पर उठते सवालों की तीव्रता अब थोड़ी धीमी पड़ रही थी। "मुझे समझ नहीं आ रहा कि सही क्या है और गलत क्या..." "सही वही है जो तुम्हें सुरक्षित रखे और तुम्हारा अपना वजूद बनाए," मैंने उसकी टेबल पर रखे पेन को एक तरफ करते हुए कहा। "सोच-विचार करने में वक्त मत गंवाओ। धीरे-धीरे तुम खुद महसूस करोगी कि इस छत के नीचे जो दायरा बना है, वह बाहर के खोखले वादों से कितना अलग और ठोस है।" निशा खामोश रही, लेकिन उसकी आँखों का संशय अब धीरे-धीरे एक गंभीर विचार में बदलने लगा था। हमारे इस नए संसार की परिधि अब उसे भी अपने प्रभाव में लेने लगी थी।

End of Chapter 19