Chapter 9 of 30
गहराई से बुलावा
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रात काफी बीत चुकी थी.
सागरपुर सो चुका था.
गलियों में इक्का- दुक्का रोशनी ही दिखाई दे रही थी.
समुद्र भी बाहर से शांत था.
लहरें किनारे से टकरातीं और वापस लौट जातीं.
लेकिन समुद्र की उस शांति के नीचे बहुत कुछ बदल रहा था.
शौर्य अपने कमरे में सो रहा था.
उसकी साँसें धीमी और सामान्य थीं.
पिछले कुछ दिनों की थकान उसके शरीर पर साफ दिखाई दे रही थी.
सुबह से लेकर रात तक वह अपने काम और अभ्यास के बीच लगा रहता था.
नीरा के साथ उसका संबंध भी लगातार मजबूत हो रहा था.
लेकिन आज रात.
कुछ अलग होने वाला था.
शौर्य के कमरे की खिडकी से हल्की चाँदनी अंदर आ रही थी.
टेबल पर रखा पानी का गिलास बिल्कुल स्थिर था.
ऊर्जा क्रिस्टल कपडे में लिपटा हुआ रखा था.
सब कुछ सामान्य था.
फिर अचानक.
क्रिस्टल के भीतर हल्की नीली रोशनी दिखाई दी.
बहुत हल्की.
इतनी हल्की कि अगर कोई जागता हुआ व्यक्ति भी कमरे में होता, तो शायद उसे पहली नजर में महसूस न करता.
रोशनी कुछ सेकंड रही.
फिर गायब हो गई.
लेकिन उसी क्षण शौर्य की भौंहें हल्की सिकुड गईं.
उसकी नींद में एक दृश्य उभरा.
समुद्र.
बहुत गहरा समुद्र.
ऊपर कोई सूरज नहीं था.
नीचे कोई जमीन नहीं थी.
चारों तरफ केवल नीला अंधकार था.
शौर्य उस अंधकार में अकेला खडा था.
उसके पैरों के नीचे पानी था.
लेकिन वह डूब नहीं रहा था.
उसने चारों तरफ देखा.
कुछ दिखाई नहीं दिया.
फिर बहुत दूर एक छोटी- सी रोशनी दिखाई दी.
नीली.
वही नीली रोशनी.
शौर्य उसकी तरफ बढा.
एक कदम.
फिर दूसरा.
हर कदम के साथ आसपास का अंधकार थोडा कम होता गया.
रोशनी अब पहले से बडी दिखाई दे रही थी.
फिर उसे उस रोशनी के भीतर कुछ दिखाई दिया.
एक दरवाजा.
बहुत बडा.
इतना बडा कि शौर्य उसके सामने खडा होकर भी उसका ऊपरी हिस्सा नहीं देख सकता था.
दरवाजे पर वही चिन्ह था.
सात छोटे निशान.
उनमें से एक चमक रहा था.
शौर्य धीरे- धीरे दरवाजे के करीब गया.
उसने हाथ उठाया.
जैसे ही उसकी उंगलियाँ दरवाजे को छूने वाली थीं.
किसी ने पीछे से उसका नाम पुकारा.
शौर्य।
वह अचानक पीछे मुडा.
कोई नहीं था.
फिर आवाज आई.
इस बार और धीमी.
वापस जाओ।
शौर्य ने चारों तरफ देखा.
कौन हो तुम?
कोई उत्तर नहीं आया.
फिर दरवाजे के भीतर से एक भारी कंपन हुआ.
नीली रोशनी अचानक तेज हो गई.
और उसी क्षण शौर्य की नींद टूट गई.
वह झटके से उठकर बैठ गया.
उसकी सांसें तेज थीं.
कुछ सेकंड तक वह समझ ही नहीं पाया कि वह कहाँ है.
फिर उसने अपने कमरे को देखा.
टेबल.
किताबें.
खिडकी.
दीवार.
सब कुछ वही था.
उसने माथे पर हाथ रखा.
पसीना था.
शौर्य कुछ देर तक चुप बैठा रहा.
उसने घडी देखी.
सुबह होने में अभी काफी समय था.
वह वापस सोना चाहता था.
लेकिन उसकी आँखें बंद नहीं हुईं.
उसने धीरे से ऊर्जा क्रिस्टल की तरफ देखा.
कपडे के भीतर से हल्की नीली रोशनी दिखाई दे रही थी.
शौर्य का शरीर एक पल के लिए स्थिर हो गया.
वह धीरे से बिस्तर से उठा.
टेबल के पास गया.
क्रिस्टल को हाथ में लिया.
इस बार उसमें गर्मी थी.
बहुत हल्की.
लेकिन स्पष्ट.
शौर्य ने आँखें बंद कीं.
दूर.
बहुत दूर.
उसे समुद्र की एक हल्की ऊर्जा महसूस हुई.
फिर वह गायब हो गई.
उसने क्रिस्टल वापस रख दिया.
उसके मन में एक ही बात थी.
वह सपना साधारण सपना नहीं था.
सुबह होते ही शौर्य समुद्र किनारे पहुँच गया.
आज सूरज निकलने से पहले ही वह वहाँ था.
आसमान अभी हल्का धूसर था.
समुद्र पर धुंध की पतली परत थी.
वह चट्टान पर बैठ गया.
नीरा अभी तक नहीं आई थी.
शौर्य ने समुद्र की तरफ देखते हुए उसका इंतजार किया.
कुछ मिनट बीते.
फिर पानी में हल्की हलचल हुई.
नीरा दिखाई दी.
लेकिन इस बार वह सामान्य गति से नहीं आई.
वह बहुत तेजी से शौर्य के पास पहुँची.
शौर्य ने तुरंत उसकी बेचैनी महसूस की.
क्या हुआ?
नीरा उसके आसपास घूमने लगी.
उसकी ऊर्जा अस्थिर थी.
शौर्य ने आँखें बंद कीं.
उसने नीरा की भावनाओं को महसूस करने की कोशिश की.
डर.
चिंता.
और एक दिशा.
दक्षिण- पश्चिम.
शौर्य का चेहरा गंभीर हो गया.
वहाँ?
नीरा कुछ पल स्थिर रही.
फिर उसने उसी दिशा में देखा.
शौर्य समुद्र की ओर देखने लगा.
उसे कुछ दिखाई नहीं दे रहा था.
लेकिन अब वह जानता था कि कुछ हुआ है.
उसने तुरंत प्रणाली खोली.
कोई नया संदेश नहीं था.
शौर्य ने राहत की सांस ली.
लेकिन तभी स्क्रीन पर हल्की चमक हुई.
अज्ञात ऊर्जा में परिवर्तन.
शौर्य की नजर उस संदेश पर टिक गई.
ऊर्जा स्तर.
बढ रहा है.
उसने तुरंत समुद्र की तरफ देखा.
दूर कहीं पानी की सतह पर हल्का कंपन दिखाई दिया.
बहुत दूर.
इतना दूर कि सामान्य आँखों से पहचानना मुश्किल था.
शौर्य ने नीरा की तरफ देखा.
क्या तुम मुझे वहाँ तक ले जा सकती हो?
नीरा तुरंत आगे बढी.
फिर रुक गई.
जैसे वह किसी सीमा को महसूस कर रही हो.
शौर्य समझ गया.
वह जगह अभी भी बहुत दूर थी.
और शायद बहुत खतरनाक.
उसने कोई जोर नहीं दिया.
ठीक है।
नीरा वापस उसके पास आ गई.
शौर्य ने उसे देखा.
अभी नहीं।
कुछ देर दोनों समुद्र को देखते रहे.
फिर शौर्य घर लौट गया.
उस दिन उसने Collage जाने का फैसला नहीं किया.
उसे अपनी शक्ति को लेकर अभ्यास करना था.
और उससे ज्यादा जरूरी था कि वह यह समझे कि उसकी अगली परीक्षा Kiss प्रकार की हो सकती है.
उसने अपने कमरे में बैठकर प्रणाली खोली.
पहले उसने अपनी जानकारी देखी.
फिर नीरा की.
फिर विकास विकल्प.
विकास के लिए आवश्यक ऊर्जा.
वह लगभग पूरी हो चुकी थी.
शौर्य कुछ देर तक स्क्रीन देखता रहा.
उसने धीरे से कहा, क्या विकास से पहले कोई परीक्षा होगी?
प्रणाली शांत रही.
उसने फिर पूछा.
अगर मैं अभी विकास करूँ तो?
इस बार उत्तर आया.
विकास प्रक्रिया प्रारंभ की जा सकती है.
जोखिम: निम्न.
शौर्य ने कुछ देर सोचा.
विकास करने के बाद नीरा की शक्ति बढ सकती थी.
लेकिन उसे यह भी नहीं पता था कि विकास के बाद नीरा कैसी हो जाएगी.
उसका स्वभाव बदल सकता था.
उसकी ऊर्जा बदल सकती थी.
शायद उसका आकार भी.
और सबसे महत्वपूर्ण.
उनका संबंध भी बदल सकता था.
शौर्य ने निर्णय नहीं लिया.
वह जल्दबाजी नहीं करना चाहता था.
दोपहर तक वह अपने कमरे में रहा.
फिर अनन्या ने दरवाजा खटखटाया.
भैया?
शौर्य ने सिर उठाया.
हाँ?
अनन्या अंदर आई.
उसके हाथ में खाना था.
आप सुबह से कमरे में हैं।
शौर्य ने कहा, बस थोडा काम था।
अनन्या ने खाना टेबल पर रखा.
आपने नाश्ता भी ठीक से नहीं किया।
शौर्य मुस्कुराया.
कर लूँगा।
अनन्या ने उसे ध्यान से देखा.
आप ठीक हैं?
शौर्य कुछ पल चुप रहा.
हाँ।
सच?
शौर्य ने उसकी तरफ देखा.
फिर धीरे से कहा, हाँ।
अनन्या ने ज्यादा सवाल नहीं किया.
लेकिन जाते- जाते वह रुक गई.
अगर कोई परेशानी हो तो मुझे बताना।
शौर्य ने उसकी तरफ देखा.
बताऊँगा।
दरवाजा बंद हो गया.
शौर्य कुछ देर तक उसी दिशा में देखता रहा.
उसे अचानक एहसास हुआ कि उसकी जिंदगी में जितना कुछ बदल रहा था, उतना ही कुछ ऐसा भी था जिसे वह दूसरों से छिपा रहा था.
वह नहीं चाहता था कि अनन्या खतरे में पडे.
लेकिन अगर प्रणाली का यह रहस्य बढता गया, तो क्या वह हमेशा उसे छिपा पाएगा?
उसने सिर झटका.
अभी नहीं.
पहले उसे खुद समझना होगा.
शाम होते- होते वह फिर समुद्र पर गया.
आज हवा थोडी तेज थी.
आसमान पर बादल थे.
नीरा पहले से वहाँ थी.
शौर्य ने हाथ पानी में डाला.
नीरा उसकी हथेली के पास आई.
आज उसकी ऊर्जा पहले से अधिक स्थिर थी.
शौर्य ने उसे ध्यान से महसूस किया.
वह बदल रही थी.
बहुत धीरे.
लेकिन निश्चित रूप से.
शौर्य ने विकास विकल्प खोला.
ऊर्जा पर्याप्त.
उसने नीरा की तरफ देखा.
क्या तुम तैयार हो?
नीरा कुछ पल शांत रही.
फिर उसकी ऊर्जा में हल्की गर्माहट आई.
शौर्य ने इसे उत्तर माना.
उसने विकास प्रक्रिया शुरू कर दी.
प्रणाली की नीली रोशनी पानी पर फैल गई.
नीरा के शरीर के चारों तरफ छोटे- छोटे प्रकाश कण बनने लगे.
शौर्य ने तुरंत हाथ पानी में रखा.
इस बार उसे एक तेज ऊर्जा लहर महसूस हुई.
नीरा की ऊर्जा बढ रही थी.
उसका छोटा शरीर नीली रोशनी में ढक गया.
कुछ क्षण बाद उसकी गति रुक गई.
शौर्य ने सांस रोक ली.
प्रकाश धीरे- धीरे कम हुआ.
नीरा अभी भी वहाँ थी.
लेकिन वह पहले जैसी नहीं थी.
उसका शरीर थोडा लंबा हो गया था.
उसके पंखों पर पहले से ज्यादा स्पष्ट नीली चमक थी.
उसकी आँखों में हल्की रोशनी थी.
शौर्य ने प्रणाली खोली.
विकास पूर्ण.
नई प्रजाति निर्धारित.
नीरिका.
शौर्य कुछ क्षण स्क्रीन देखता रहा.
फिर उसने पानी में उसे देखा.
अब वह छोटी सामान्य मछली नहीं रही थी.
वह पहले से बडी थी.
उसकी गति में भी बदलाव था.
लेकिन उसकी ऊर्जा.
वह अब पहले से कई गुना अधिक स्पष्ट थी.
शौर्य ने धीरे से कहा, नीरिका।
वह उसके पास आई.
उसके आसपास एक हल्की जलधारा बनी.
शौर्य की आँखें चमक उठीं.
उसकी विशेष क्षमता बदल चुकी थी.
जल प्रवाह.
उन्नत.
शौर्य ने अपना हाथ पानी में डाला.
नीरिका ने उसके आसपास एक छोटी धारा बनाई.
शौर्य ने महसूस किया कि पानी उसके हाथ के चारों तरफ घूम रहा है.
यह पहले की तुलना में बहुत अधिक नियंत्रित था.
उसने मुस्कुराकर कहा, अब हम थोडा और आगे जा सकते हैं।
लेकिन उसी क्षण.
समुद्र अचानक शांत हो गया.
लहरें रुक गईं.
हवा जैसे एक पल के लिए थम गई.
शौर्य ने तुरंत सिर उठाया.
नीरिका भी स्थिर हो गई.
दूर समुद्र में.
दक्षिण- पश्चिम दिशा में.
नीली रोशनी दिखाई दी.
इस बार पहले से कहीं अधिक स्पष्ट.
एक विशाल वृत्त.
समुद्र की सतह पर.
शौर्य ने प्रणाली खोली.
अज्ञात ऊर्जा स्रोत.
सक्रिय.
दूरी.
बहुत कम.
शौर्य की धडकन तेज हो गई.
अचानक उसके सामने एक और संदेश आया.
अगला चरण प्रारंभ.
शौर्य ने शब्द पढे.
फिर एक और संदेश.
चयन आवश्यक.
दो विकल्प.
शौर्य की आँखें फैल गईं.
पहला.
गहराई में प्रवेश.
दूसरा.
भूमि पर रहकर तैयारी.
शौर्य लंबे समय तक स्क्रीन देखता रहा.
यह वही चुनाव था जिसकी बात उसने पिछली रात सपने में सुनी थी.
गहराई.
या वापस रहना.
उसने समुद्र की तरफ देखा.
नीरिका उसके पास थी.
उसकी ऊर्जा स्थिर थी.
लेकिन शौर्य जानता था कि अगर वह गहराई में गया, तो शायद वह वापस न लौट पाए.
और अगर वह नहीं गया.
तो शायद रहस्य उससे दूर हो जाएगा.
उसने आँखें बंद कीं.
उसे अनन्या याद आई.
राघव.
गोदाम.
अपना छोटा- सा घर.
अपनी सामान्य जिंदगी.
फिर उसे समुद्र की गहराई याद आई.
वह विशाल आँख.
नीली रोशनी.
वह दरवाजा.
और वह आवाज.
वापस जाओ.
शौर्य ने धीरे से आँखें खोलीं.
उसने स्क्रीन बंद नहीं की.
वह कुछ देर तक समुद्र को देखता रहा.
फिर उसने नीरिका की तरफ देखा.
तुम क्या चाहती हो?
नीरिका उसके आसपास घूमी.
फिर धीरे- धीरे समुद्र की गहराई की ओर चली गई.
कुछ दूरी पर जाकर वह रुक गई.
फिर पीछे मुडी.
शौर्य उसे देखता रहा.
उसे उत्तर मिल चुका था.
वह अभी भी डरी हुई थी.
लेकिन वह भाग नहीं रही थी.
शौर्य ने गहरी सांस ली.
ठीक है।
उसने प्रणाली में पहला विकल्प चुना.
गहराई में प्रवेश.
प्रणाली कुछ क्षण शांत रही.
फिर एक नया संदेश आया.
निर्णय स्वीकार.
प्रवेश की तैयारी.
शौर्य ने तुरंत महसूस किया कि समुद्र के भीतर कुछ बदल गया है.
दूर की नीली रोशनी थोडी तेज हुई.
पानी की सतह पर हल्की लहर बनी.
फिर उसके सामने एक पतली नीली रेखा दिखाई दी.
वह रेखा समुद्र के भीतर जाती थी.
जैसे किसी अदृश्य मार्ग को रोशनी से चिन्हित किया गया हो.
शौर्य ने उसे देखा.
फिर नीरिका को.
यही रास्ता है।
नीरिका आगे बढी.
शौर्य भी पानी में उतरा.
इस बार वह पहले से अधिक तैयार था.
उसकी ऊर्जा पहले से मजबूत थी.
नीरिका विकसित हो चुकी थी.
और उसके पास ऊर्जा क्रिस्टल भी था.
फिर भी.
डर मौजूद था.
शौर्य ने उसे स्वीकार किया.
डर का मतलब हमेशा पीछे हटना नहीं होता.
कभी- कभी डर केवल यह याद दिलाता है कि सामने की चीज वास्तव में महत्वपूर्ण है.
वह धीरे- धीरे आगे बढा.
पानी कमर तक आया.
फिर छाती तक.
उसने एक गहरी सांस ली.
और पूरी तरह पानी के भीतर चला गया.
नीरिका उसके आगे तैर रही थी.
नीली रेखा सामने थी.
शौर्य ने अपनी नई क्षमता का उपयोग किया.
उसके आसपास पानी का प्रवाह हल्का हो गया.
वह आसानी से आगे बढने लगा.
नीरिका की गति और तेज हो गई.
कुछ ही देर में वे पहले से काफी दूर आ चुके थे.
पीछे का किनारा अब दिखाई नहीं दे रहा था.
सिर्फ नीला पानी था.
और गहराई.
शौर्य ने नीचे देखा.
नीचे अंधकार था.
लेकिन नीली रेखा उसी अंधकार में जाती थी.
उसने उसे देखा.
फिर आगे बढा.
जितना वह नीचे जाता गया.
उतनी ही उसकी प्रणाली की रोशनी कम होती गई.
लेकिन ऊर्जा की अनुभूति बढती गई.
कुछ देर बाद उसने एक विशाल चट्टान देखी.
उसके बीच में वही चिन्ह था.
सात निशान.
पहला चमक रहा था.
दूसरा बहुत हल्का.
बाकी पाँच अंधेरे में थे.
शौर्य चट्टान के सामने रुक गया.
उसने हाथ आगे बढाया.
जैसे ही उसकी उंगलियाँ चिन्ह के पास पहुँचीं.
नीली रोशनी अचानक फैल गई.
नीरिका पीछे हट गई.
शौर्य भी एक पल के लिए रुक गया.
फिर चट्टान के भीतर से एक आवाज आई.
बहुत धीमी.
लेकिन स्पष्ट.
पहला बंधन।
शौर्य का दिल रुकने जैसा हुआ.
आवाज फिर आई.
पहला परीक्षण।
कुछ क्षण शांति.
फिर.
अब पहला द्वार।
चट्टान के सामने पानी घूमने लगा.
एक गोलाकार रास्ता बनने लगा.
शौर्य ने नीचे देखा.
उसके भीतर कुछ दिखाई नहीं दे रहा था.
केवल अंधकार.
और कहीं बहुत नीचे.
दो विशाल नीली आँखें.
शौर्य स्थिर हो गया.
नीरिका उसके पास आ गई.
उसकी ऊर्जा काँप रही थी.
शौर्य ने हाथ बढाकर उसे अपने पास रखा.
उसने उस गहराई को देखा.
फिर अपनी मुट्ठी बंद की.
हम यहाँ तक आ चुके हैं।
उसने धीरे से कहा.
अब बिना देखे वापस नहीं जाएँगे।
उसने एक कदम आगे बढाया.
और उसी क्षण.
उसके सामने पहला द्वार पूरी तरह खुल गया.
नीली रोशनी ने पूरे समुद्र को ढक लिया.
शौर्य और नीरिका उसके भीतर चले गए.
और उनके पीछे.
समुद्र फिर से शांत हो गया.