नीली रोशनी धीरे- धीरे चारों ओर फैल रही थी.
शौर्य को कुछ दिखाई नहीं दे रहा था.
कुछ क्षण पहले तक उसके सामने समुद्र की गहराई थी.
काली.
शांत.
असीम.
लेकिन अब उस अंधकार की जगह केवल नीला प्रकाश था.
उसने अपनी आँखें बंद कर लीं.
उसे लगा जैसे वह पानी में नहीं, बल्कि किसी बहुत विशाल और खाली स्थान में खडा है.
उसके शरीर पर पानी का दबाव नहीं था.
सांस लेने में भी कोई परेशानी नहीं हो रही थी.
उसने धीरे से आँखें खोलीं.
नीरिका उसके सामने थी.
वह भी पूरी तरह सुरक्षित थी.
उसके शरीर से हल्की नीली चमक निकल रही थी.
शौर्य ने चारों तरफ देखा.
अब उसे समुद्र दिखाई नहीं दे रहा था.
उसके सामने एक लंबा रास्ता था.
दोनों तरफ ऊँची दीवारें थीं.
दीवारें पत्थर की बनी थीं, लेकिन उनमें किसी सामान्य पत्थर जैसी खुरदुराहट नहीं थी.
वे बिल्कुल चिकनी थीं.
उन पर छोटे- छोटे चिन्ह बने थे.
कुछ चिन्ह चमक रहे थे.
कुछ पूरी तरह अंधेरे थे.
शौर्य ने धीरे से एक कदम आगे बढाया.
उसके कदम की आवाज बहुत दूर तक गई.
ठक.
फिर वही आवाज कई बार लौटकर आई.
ठक.
ठक.
ठक.
जैसे रास्ता उसकी आवाज को याद कर रहा हो.
शौर्य वहीं रुक गया.
उसने पीछे देखा.
पीछे अब कोई रास्ता नहीं था.
जहाँ से वह आया था, वहाँ केवल एक सपाट पत्थर की दीवार थी.
वह कुछ क्षण उसे देखता रहा.
फिर उसने नीरिका की तरफ देखा.
नीरिका भी उस दीवार की ओर देख रही थी.
उसकी ऊर्जा में हल्की बेचैनी थी.
शौर्य ने धीरे से कहा, घबराने की जरूरत नहीं है।
नीरिका उसके पास आ गई.
शौर्य ने हाथ आगे किया.
वह उसके आसपास घूमने लगी.
उस छोटे से स्पर्श ने शौर्य को थोडा शांत कर दिया.
उसने सामने देखा.
आगे चलते हैं।
वह धीरे- धीरे आगे बढने लगा.
रास्ता बहुत लंबा था.
इतना लंबा कि कुछ दूर जाने के बाद पीछे की दीवार भी दिखाई देना बंद हो गई.
लेकिन सामने कोई दरवाजा नहीं आया.
न कोई जीव.
न कोई आवाज.
न कोई खतरा.
केवल शांति.
बहुत गहरी शांति.
शौर्य को यह शांति असामान्य लग रही थी.
उसे लग रहा था कि कुछ होने वाला है.
लेकिन कुछ हो नहीं रहा था.
वह चलता रहा.
कुछ देर बाद उसने देखा कि दीवार पर बना एक चिन्ह चमक रहा है.
वही चिन्ह जो उसने पहले समुद्र के नीचे देखा था.
सात निशान.
लेकिन यहाँ केवल पहला निशान चमक रहा था.
शौर्य उसके पास गया.
उसने हाथ आगे बढाया.
इस बार जैसे ही उसकी उंगलियाँ चिन्ह को छूने वाली थीं, प्रणाली सामने दिखाई दी.
पहला द्वार.
पहचान पूर्ण.
प्रवेशकर्ता की पुष्टि आवश्यक.
शौर्य ने स्क्रीन पढी.
प्रवेशकर्ता?
उसने धीरे से पूछा.
कुछ पल बाद उत्तर आया.
बंधित धारक.
शौर्य ने भौंहें सिकोड लीं.
बंधित धारक?
प्रणाली शांत रही.
फिर एक और संदेश आया.
पहला बीस्ट बंधन मान्य.
शौर्य ने नीरिका की तरफ देखा.
उसे अचानक समझ आया.
यह द्वार शायद केवल उसी के लिए खुला था जिसके पास कोई बंधित बीस्ट हो.
अगर उसने नीरा से बंधन नहीं किया होता, तो शायद वह यहाँ तक पहुँच ही नहीं पाता.
शौर्य ने अपना हाथ चिन्ह पर रख दिया.
नीरिका उसके पास आ गई.
चिन्ह अचानक चमक उठा.
नीली रोशनी उसके हाथ से होकर पूरे शरीर में फैल गई.
शौर्य ने आँखें बंद कर लीं.
एक क्षण.
फिर दूसरा.
और अचानक.
उसे एक आवाज सुनाई दी.
बंधित धारक की पहचान स्वीकार।
शौर्य ने आँखें खोलीं.
सामने की दीवार धीरे- धीरे बदलने लगी.
पत्थर पीछे खिसका.
और एक गोलाकार द्वार दिखाई दिया.
उसके भीतर पूर्ण अंधकार था.
शौर्य कुछ देर उसे देखता रहा.
उसे समझ नहीं आ रहा था कि अंदर जाना चाहिए या नहीं.
उसने नीरिका की तरफ देखा.
नीरिका द्वार के पास गई.
फिर वापस आकर शौर्य के पास रुक गई.
जैसे वह उसका इंतजार कर रही हो.
शौर्य ने हल्की सांस ली.
ठीक है।
वह आगे बढा.
द्वार के अंदर कदम रखते ही आसपास की रोशनी बुझ गई.
शौर्य का शरीर एक पल के लिए ठिठक गया.
उसे कुछ दिखाई नहीं दे रहा था.
उसने हाथ आगे बढाया.
खाली.
उसने पीछे हाथ किया.
वहाँ भी कुछ नहीं था.
नीरिका की ऊर्जा महसूस हो रही थी.
यही उसकी एकमात्र दिशा थी.
शौर्य ने आँखें बंद कर लीं.
वह नीरिका की ऊर्जा को महसूस करता रहा.
कुछ देर बाद उसने समझा कि वे दोनों एक बहुत बडे कमरे के भीतर हैं.
उसने आँखें खोलीं.
धीरे- धीरे उसकी आँखें अंधेरे की अभ्यस्त होने लगीं.
कमरे की दीवारें दिखाई देने लगीं.
वहाँ चारों तरफ विशाल पत्थर के स्तंभ थे.
हर स्तंभ पर अलग- अलग चिन्ह बने थे.
बीच में एक गोलाकार मंच था.
और मंच के ऊपर एक छोटा- सा पत्थर का पात्र.
उसमें कुछ नहीं था.
शौर्य धीरे- धीरे मंच के पास गया.
उसने हाथ पात्र के ऊपर रखा.
प्रणाली सक्रिय हुई.
पहला परीक्षण.
ऊर्जा पहचान.
शौर्य की सांस थोडी धीमी हो गई.
क्या करना है?
कोई उत्तर नहीं.
पात्र के अंदर अचानक हल्की रोशनी जली.
फिर एक संदेश दिखाई दिया.
अपनी ऊर्जा का एक अंश प्रस्तुत करें.
शौर्य ने कुछ क्षण सोचा.
यह आसान होना चाहिए.
उसने अपनी हथेली पात्र के ऊपर रखी.
अपनी ऊर्जा को धीरे- धीरे बाहर भेजा.
पहले एक छोटी धारा निकली.
वह पात्र में जाकर गायब हो गई.
कुछ नहीं हुआ.
शौर्य ने थोडा और ऊर्जा दी.
फिर भी कुछ नहीं.
उसने तीसरी बार कोशिश की.
इस बार पात्र के भीतर नीली रोशनी फैल गई.
एक हल्की ध्वनि हुई.
परीक्षण का पहला चरण पूर्ण.
शौर्य ने राहत की सांस ली.
लेकिन तभी.
कमरे की चारों दीवारों पर बने चिन्ह एक- एक करके चमकने लगे.
पहले चार.
फिर छह.
फिर आठ.
शौर्य पीछे हट गया.
उसे लगा कि अब कोई बडा खतरा आने वाला है.
लेकिन कुछ नहीं हुआ.
सिर्फ कमरे के बीच में एक छोटी- सी आकृति दिखाई दी.
वह इंसान जैसी थी.
लेकिन पूरी तरह नीली रोशनी से बनी हुई.
चेहरा स्पष्ट नहीं था.
आँखों की जगह केवल दो सफेद चमकती रेखाएँ थीं.
वह शौर्य के सामने खडी थी.
कुछ सेकंड तक उसने कुछ नहीं कहा.
फिर उसकी आवाज गूँजी.
तुम देर से आए हो।
शौर्य चौंक गया.
तुम कौन हो?
आकृति ने कोई उत्तर नहीं दिया.
उसने नीरिका की तरफ देखा.
पहला बंधन।
फिर उसकी नजर शौर्य पर गई.
कमजोर।
शौर्य के चेहरे पर हल्का असंतोष आया.
तुम मुझे नहीं जानते।
आकृति शांत रही.
तुम्हारी ऊर्जा तुम्हारी शक्ति से अधिक तुम्हारी सीमा बता रही है।
शौर्य चुप हो गया.
आकृति ने आगे कहा.
तुम अभी गहराई के लिए तैयार नहीं हो।
शौर्य ने पूछा, फिर मुझे यहाँ बुलाया क्यों गया?
पहली बार आकृति थोडी देर के लिए शांत हुई.
क्योंकि तैयार होने और तैयार किए जाने में अंतर होता है।
शौर्य उसकी बात समझने की कोशिश करता रहा.
आकृति ने हाथ उठाया.
उसके पीछे दीवार पर एक चित्र उभर आया.
समुद्र.
उसके नीचे एक विशाल नगर.
नगर के बीच सात बडे द्वार.
हर द्वार के ऊपर वही सात चिन्ह.
शौर्य ध्यान से देखता रहा.
आकृति बोली.
बहुत समय पहले सात बंधन बनाए गए थे।
चित्र बदल गया.
सात चमकती आकृतियाँ दिखाई दीं.
सात धारक।
फिर चित्र में अंधकार फैल गया.
लेकिन उनमें से केवल एक ने अंतिम द्वार तक पहुँचने की कोशिश की।
शौर्य ने पूछा, क्या हुआ?
आकृति ने उसकी तरफ देखा.
वह लौटकर नहीं आया।
कमरे में कुछ पल शांति रही.
शौर्य ने धीरे से पूछा, क्यों?
आकृति ने कहा, क्योंकि उसने शक्ति को समझने से पहले उसे प्राप्त करना चाहा।
शौर्य ने नीचे देखा.
उसे अपने बारे में सोचने पर मजबूर होना पडा.
क्या वह भी वही गलती कर सकता था?
वह जल्दी शक्तिशाली होना चाहता था.
वह रहस्य जानना चाहता था.
वह समुद्र की गहराई तक पहुँचना चाहता था.
लेकिन क्या उसने कभी सोचा था कि शक्ति का उद्देश्य क्या है?
आकृति ने कहा.
पहला द्वार तुम्हें शक्ति नहीं देगा।
शौर्य ने सिर उठाया.
तो क्या देगा?
दिशा।
दीवार पर एक और चित्र उभरा.
एक छोटी- सी रोशनी.
वह धीरे- धीरे सात दिशाओं में बँट गई.
हर द्वार एक परीक्षा है।
हर परीक्षा तुम्हें अपने बारे में कुछ बताएगी।
और हर उत्तर तुम्हें अगले द्वार के योग्य बनाएगा।
शौर्य कुछ देर चुप रहा.
फिर उसने पूछा, अगर मैं असफल हुआ?
आकृति ने कहा.
तो तुम यहीं रुक जाओगे।
शौर्य ने पूछा, और अगर सफल हुआ?
आकृति की आँखों जैसी सफेद रेखाएँ थोडी चमकीं.
तो पहला द्वार तुम्हें अपना उत्तर देगा।
कौन- सा उत्तर?
आकृति ने उसकी तरफ देखा.
तुम्हें अभी यह जानने की आवश्यकता नहीं है।
शौर्य ने गहरी सांस ली.
उसे यह उत्तर पसंद नहीं आया.
लेकिन उसे महसूस हो रहा था कि वह आकृति उससे कुछ छिपा रही थी.
फिर भी वह समझ गया था कि अभी उससे सब कुछ पूछकर कुछ हासिल नहीं होगा.
उसने पूछा, अगला परीक्षण क्या है?
आकृति पीछे हट गई.
मंच के पीछे की जमीन धीरे- धीरे खुलने लगी.
एक गोलाकार रास्ता दिखाई दिया.
उसके भीतर पानी था.
लेकिन वह पानी ऊपर की ओर बह रहा था.
शौर्य ने आश्चर्य से देखा.
आकृति ने कहा.
अपनी शक्ति से नहीं।
शौर्य चुप रहा.
अपने बीस्ट के साथ।
शौर्य ने नीरिका की तरफ देखा.
नीरिका शांत थी.
आकृति ने कहा.
तुम्हारा बंधन अभी कमजोर है।
अगर तुम अपने बीस्ट को आदेश दोगे, तो वह तुम्हारी बात मानेगा।
लेकिन अगर तुम उसे समझोगे, तो वह तुम्हारे साथ चलेगा।
शौर्य की आँखें गंभीर हो गईं.
आकृति ने आगे कहा.
अगले परीक्षण में तुम्हें कोई आदेश नहीं देना है।
शौर्य चौंका.
फिर?
उसे चुनने देना है।
इतना कहकर आकृति गायब हो गई.
कमरे में फिर शांति छा गई.
शौर्य ने नीरिका की तरफ देखा.
तुम्हें चुनना है?
नीरिका धीरे- धीरे उसके पास आई.
उसने शौर्य की उंगलियों को छुआ.
फिर वह उस गोलाकार रास्ते की तरफ चली गई.
कुछ कदम आगे जाकर वह रुक गई.
शौर्य समझ गया.
उसे उसके पीछे जाना था.
वह आगे बढा.
गोलाकार रास्ता बहुत संकरा था.
एक तरफ पत्थर की दीवार.
दूसरी तरफ गहरी खाई.
नीचे कुछ दिखाई नहीं दे रहा था.
ऊपर से पानी उल्टा बह रहा था.
शौर्य ने उस दृश्य को ध्यान से देखा.
वह समझ नहीं पा रहा था कि यह संभव कैसे था.
लेकिन इस जगह में सामान्य नियम शायद लागू नहीं होते थे.
नीरिका धीरे- धीरे आगे बढी.
शौर्य उसके पीछे चलता रहा.
कुछ दूर जाने के बाद रास्ता तीन हिस्सों में बँट गया.
बाईं तरफ नीली रोशनी.
बीच में सफेद रोशनी.
दाईं तरफ कोई रोशनी नहीं.
शौर्य रुक गया.
नीरिका भी रुक गई.
उसने शौर्य की तरफ देखा.
शौर्य ने कुछ नहीं कहा.
उसने हाथ आगे नहीं किया.
कोई दिशा नहीं बताई.
बस इंतजार किया.
नीरिका कुछ क्षण तीनों रास्तों को देखती रही.
फिर वह बाईं तरफ बढी.
शौर्य उसके पीछे चला गया.
कुछ कदम बाद बाईं तरफ की रोशनी अचानक बुझ गई.
रास्ता अंधकार में डूब गया.
शौर्य के मन में संदेह आया.
लेकिन उसने नीरिका को नहीं रोका.
वह उसके पीछे चलता रहा.
अंधेरे में चलते हुए उसे केवल नीरिका की ऊर्जा महसूस हो रही थी.
कुछ देर बाद रास्ता और संकरा हो गया.
शौर्य को अपने कंधे दीवार से लगते हुए महसूस हुए.
फिर सामने हल्की नीली रोशनी दिखाई दी.
नीरिका उसकी तरफ बढी.
और अचानक.
एक तेज आवाज हुई.
दीवार से पानी का शक्तिशाली प्रवाह निकला.
शौर्य पीछे गिरते- गिरते बचा.
नीरिका भी बहाव में फँस गई.
शौर्य का पहला instinct था उसे आदेश देना.
लेकिन उसे आकृति की बात याद आई.
कोई आदेश नहीं.
उसे चुनने देना है.
शौर्य वहीं खडा रहा.
नीरिका कुछ पल बहती रही.
फिर उसने अपने शरीर को मोडा.
उसने पानी की धारा के साथ जाना शुरू किया.
शौर्य ने ध्यान से देखा.
वह धारा के विरुद्ध लडने की कोशिश नहीं कर रही थी.
वह उसके साथ बह रही थी.
धीरे- धीरे उसकी गति बढी.
फिर उसने अचानक अपनी विशेष क्षमता का उपयोग किया.
उसके आसपास पानी घूमने लगा.
वह धारा के बीच से निकल गई.
कुछ सेकंड बाद वह सुरक्षित स्थान पर पहुँच गई.
शौर्य के चेहरे पर मुस्कान आई.
उसने कुछ नहीं कहा.
नीरिका वापस उसकी तरफ आई.
अब उसके और शौर्य के बीच का बंधन पहले से ज्यादा स्पष्ट था.
शौर्य ने महसूस किया.
यह आदेश का संबंध नहीं था.
यह भरोसे का संबंध था.
दोनों आगे बढे.
रास्ता खत्म हुआ.
सामने एक छोटा- सा कमरा था.
बीच में एक पत्थर की पटिया.
उस पर केवल एक वाक्य लिखा था.
जिसे तुम नियंत्रित नहीं कर सकते, उसे पहले समझो.
शौर्य ने वह वाक्य पढा.
फिर उसने आँखें बंद कर लीं.
उसे लगा जैसे यह केवल नीरा के लिए नहीं था.
यह उसके लिए भी था.
समुद्र.
प्रणाली.
ऊर्जा.
रहस्यमयी जीव.
इनमें से कुछ भी उसके नियंत्रण में नहीं था.
वह हर चीज को समझने की कोशिश किए बिना नियंत्रित करना चाहता था.
शायद यही उसकी सबसे बडी गलती थी.
कुछ क्षण बाद कमरे में आवाज गूँजी.
दूसरा चरण पूर्ण।
शौर्य ने आँखें खोलीं.
सामने वही नीली आकृति फिर दिखाई दी.
इस बार उसके हाथ में एक छोटा प्रकाश कण था.
आकृति ने उसे शौर्य की तरफ बढाया.
शौर्य ने हाथ आगे किया.
प्रकाश कण उसकी हथेली में आ गया.
प्रणाली सक्रिय हुई.
बीस्ट बंधन.
नई क्षमता उपलब्ध.
सह- अनुभूति.
शौर्य कुछ क्षण उसे देखता रहा.
उसने क्षमता सक्रिय की.
अचानक उसे नीरिका की भावनाएँ पहले से कहीं अधिक स्पष्ट महसूस होने लगीं.
डर.
शांति.
भूख.
थकान.
और विश्वास.
यह सब अलग- अलग भावनाओं की तरह नहीं था.
यह एक प्रवाह था.
शौर्य ने धीरे से सांस ली.
उसे समझ आया कि अब वह नीरिका को केवल महसूस नहीं कर रहा था.
वह उसकी स्थिति समझ सकता था.
आकृति ने कहा.
अब तुम अपने बीस्ट को आदेश देने से पहले उसकी स्थिति समझ सकोगे।
शौर्य ने पूछा, और यह सिर्फ नीरिका के साथ काम करेगा?
जब तक तुम्हारा बंधन मजबूत है।
शौर्य ने सिर हिलाया.
आकृति धीरे- धीरे पीछे हटने लगी.
शौर्य ने तुरंत पूछा, रुको।
आकृति रुक गई.
तुम कौन हो?
कुछ पल शांति रही.
फिर उसने उत्तर दिया.
मैं वह नहीं हूँ जो तुम्हें लगता है।
शौर्य ने भौंहें सिकोड लीं.
इसका मतलब?
आकृति ने कहा.
जब तुम सातवें द्वार तक पहुँचोगे, तब तुम्हें मेरा नाम पता चलेगा।
शौर्य कुछ कह पाता, उससे पहले आकृति गायब हो गई.
कमरे की सारी रोशनी बुझ गई.
फिर अचानक सामने एक रास्ता खुला.
इस बार रास्ता ऊपर जा रहा था.
शौर्य ने उसे देखा.
उसे समझ आ गया कि यह शायद बाहर जाने का मार्ग था.
वह नीरिका के साथ आगे बढा.
कुछ देर बाद उसे दूर से समुद्र की हल्की रोशनी दिखाई दी.
वह आगे बढता गया.
और फिर.
वह वापस समुद्र में था.
उसका शरीर पानी के भीतर था.
लेकिन इस बार वह पहले से अधिक सहज था.
उसने ऊपर देखा.
सूरज की रोशनी पानी के भीतर तक आ रही थी.
नीरिका उसके पास थी.
शौर्य ने ऊपर तैरना शुरू किया.
कुछ ही देर में वह समुद्र की सतह पर आ गया.
उसने गहरी सांस ली.
हवा उसके फेफडों में भर गई.
वह कुछ देर तक पानी में तैरता रहा.
फिर किनारे की तरफ लौट आया.
चट्टान पर बैठकर उसने प्रणाली खोली.
पहला द्वार.
स्थिति: पूर्ण.
परीक्षण: पूर्ण.
नई क्षमता: सह- अनुभूति.
नया मार्ग: द्वितीय द्वार की ओर.
शौर्य ने अंतिम पंक्ति पढी.
द्वितीय द्वार सक्रिय होने के लिए आवश्यक शर्त.
दूसरा बंधन.
शौर्य की नजर वहीं रुक गई.
दूसरा बंधन.
इसका अर्थ था कि नीरिका अकेली पर्याप्त नहीं थी.
उसे दूसरा बीस्ट ढूँढना होगा.
लेकिन कौन?
और कहाँ?
शौर्य ने समुद्र की तरफ देखा.
नीरिका उसके पास तैर रही थी.
उसने हाथ पानी में डाला.
नीरिका उसकी हथेली से आ लगी.
शौर्य हल्का मुस्कुराया.
एक और साथी चाहिए।
नीरिका की भावना में हल्की बेचैनी आई.
शौर्य ने उसे महसूस किया.
वह समझ गया.
उसे डर था कि कोई दूसरा आने पर उसका और शौर्य का संबंध बदल जाएगा.
शौर्य ने धीरे से कहा, तुम्हारी जगह कोई नहीं ले सकता।
नीरिका शांत हो गई.
शौर्य कुछ देर तक समुद्र को देखता रहा.
उसे अब पता था कि आगे का रास्ता पहले से कठिन होने वाला है.
उसे दूसरा बीस्ट ढूँढना होगा.
लेकिन इस बार वह केवल किसी शक्तिशाली जीव की तलाश नहीं करेगा.
उसे ऐसा साथी चाहिए था जिसके साथ उसका बंधन स्वाभाविक हो.
उसे नहीं पता था कि दूसरा बीस्ट समुद्र में होगा.
या जमीन पर.
या शायद किसी ऐसी जगह जहाँ वह कभी गया ही नहीं था.
वह धीरे- धीरे खडा हुआ.
उसने पीछे सागरपुर की ओर देखा.
फिर समुद्र की तरफ.
दोनों दिशाएँ अलग थीं.
लेकिन शायद उसकी यात्रा अब दोनों को जोडने वाली थी.
शौर्य ने बैग उठाया.
नीरिका समुद्र में उसके साथ- साथ चलने लगी.
सूरज धीरे- धीरे ऊपर उठ रहा था.
नई सुबह शुरू हो चुकी थी.
लेकिन शौर्य जानता था.
पहला द्वार बंद हो चुका था.
और अब दूसरा द्वार उसका इंतजार कर रहा था.
उस द्वार तक पहुँचने के लिए उसे केवल शक्ति नहीं चाहिए थी.
उसे किसी नए साथी की जरूरत थी.
और शायद.
वह साथी उससे मिलने के लिए पहले ही अपनी यात्रा शुरू कर चुका था.