सुबह होने से पहले ही शौर्य की नींद खुल गई.
उसकी आँखें अचानक खुलीं.
कुछ क्षण तक वह बिल्कुल स्थिर पडा रहा.
कमरे में अंधेरा था.
खिडकी बंद थी.
बाहर से समुद्र की आवाज आ रही थी.
लेकिन आज उस आवाज में उसे कुछ अलग महसूस हो रहा था.
वह धीरे से उठकर बैठ गया.
उसने कुछ नहीं किया.
सिर्फ अपनी सांसों पर ध्यान दिया.
एक लंबी सांस.
फिर दूसरी.
धीरे- धीरे उसकी चेतना शांत हुई.
और तभी.
प्रणाली उसके सामने दिखाई दी.
गहराई की पहचान पूर्ण.
अगला परीक्षण प्रारंभ होगा.
शौर्य की नजर उन शब्दों पर टिक गई.
उसने कुछ देर तक उन्हें पढा.
फिर धीरे से पूछा, कब?
कोई उत्तर नहीं आया.
वह कुछ क्षण इंतजार करता रहा.
स्क्रीन वैसे ही बनी रही.
फिर नीचे एक और पंक्ति उभरी.
समय निर्धारित नहीं.
शौर्य की भौंहें सिकुड गईं.
तो मुझे कैसे पता चलेगा?
प्रणाली शांत रही.
शौर्य ने स्क्रीन बंद कर दी.
वह बिस्तर से उठा.
आज उसे बेचैनी हो रही थी.
पिछले दिन समुद्र की गहराई में जो उसने देखा था, वह बार- बार उसकी आँखों के सामने आ रहा था.
नीली रोशनी.
गहराई.
और वह एहसास कि कोई उसे देख रहा था.
लेकिन सबसे ज्यादा परेशान करने वाली बात प्रणाली का संदेश था.
अगला परीक्षण प्रारंभ होगा.
क्या इसका मतलब था कि वह किसी परीक्षा का हिस्सा बन चुका था?
और अगर हाँ, तो किसने यह परीक्षा बनाई थी?
उसके पास कोई उत्तर नहीं था.
शौर्य ने खिडकी खोली.
ठंडी हवा कमरे में आई.
दूर समुद्र दिखाई दे रहा था.
वह कुछ देर तक उसे देखता रहा.
आज समुद्र शांत था.
बहुत शांत.
जैसे पिछली सारी घटनाएँ केवल उसके दिमाग की कल्पना रही हों.
लेकिन शौर्य जानता था कि ऐसा नहीं था.
उसने अपने बैग से ऊर्जा क्रिस्टल निकाला.
क्रिस्टल की चमक पहले से बहुत कम थी.
उसने उसे हथेली पर रखा.
इस बार कोई गर्मी महसूस नहीं हुई.
उसने राहत की सांस ली.
फिर उसे वापस कपडे में लपेट दिया.
उसे अभी इसकी ऊर्जा बचाकर रखनी थी.
वह नहीं जानता था कि आगे क्या होने वाला है.
इसलिए उसके पास जो कुछ था, उसे बिना जरूरत खर्च करना ठीक नहीं था.
शौर्य ने जल्दी से कपडे बदले.
अनन्या अभी सो रही थी.
वह चुपचाप घर से निकल गया.
समुद्र किनारे पहुँचते ही उसने नीरा को महसूस किया.
वह पास ही थी.
कुछ सेकंड बाद पानी की सतह पर हल्की लहर बनी.
नीरा बाहर आई.
शौर्य उसे देखते ही थोडा शांत हो गया.
तुम भी जल्दी उठ गई।
नीरा उसके आसपास घूमने लगी.
शौर्य ने हाथ पानी में डाला.
नीरा उसकी हथेली के पास आ गई.
उसके भीतर हल्की ऊर्जा थी.
पहले से ज्यादा.
शौर्य मुस्कुराया.
तुम मजबूत हो रही हो।
कुछ पल वह उसे देखता रहा.
फिर उसने कहा, आज हमें अभ्यास करना है।
नीरा उसके आसपास घूमती रही.
शौर्य ने समुद्र की तरफ देखा.
आज वह पहले की तरह केवल तैरने या ऊर्जा लेने का अभ्यास नहीं करना चाहता था.
वह नीरा को आदेश देना सीखना चाहता था.
और उससे भी ज्यादा जरूरी था कि वह उसके आदेशों को समझे.
उसने पानी में एक छोटी लकडी की टहनी फेंकी.
उसे यहाँ लाओ।
नीरा तुरंत उस दिशा में गई.
लेकिन लकडी पानी की लहर के साथ बह गई.
नीरा उसके पीछे गई.
कुछ सेकंड बाद वह उसे मुँह में पकडकर वापस लाई.
शौर्य ने आश्चर्य से उसे देखा.
अच्छा।
नीरा उसके सामने रुक गई.
शौर्य ने हाथ आगे बढाया.
लकडी उसकी हथेली के पास गिर गई.
बहुत अच्छा।
यह केवल एक छोटी- सी चीज थी.
लेकिन शौर्य समझ गया कि नीरा उसके शब्दों से ज्यादा उसकी भावना को समझ रही थी.
वह उसे आदेश देता था.
और उसके पीछे की इच्छा शायद नीरा महसूस कर लेती थी.
अगले कुछ समय तक उसने कई छोटे अभ्यास किए.
दाएँ जाना.
बाएँ जाना.
रुकना.
वापस आना.
तेज तैरना.
धीरे तैरना.
हर बार नीरा पहले से बेहतर प्रतिक्रिया देने लगी.
शौर्य को भी धीरे- धीरे समझ आने लगा कि बंधन का अर्थ केवल आदेश देना नहीं था.
यह दोनों के बीच तालमेल था.
अगर वह खुद घबरा जाता, तो नीरा भी अस्थिर हो जाती.
अगर वह शांत रहता, तो नीरा भी शांत रहती.
शौर्य ने इसे बहुत ध्यान से देखा.
उसने मन में एक बात तय की.
वह कभी भी अपने डर को नीरा पर हावी नहीं होने देगा.
कम से कम तब तक नहीं जब तक वह उसे सुरक्षित रखने की स्थिति में न हो.
अभ्यास खत्म करने के बाद शौर्य चट्टान पर बैठ गया.
नीरा पानी में उसके पास घूम रही थी.
सूरज अब ऊपर आ चुका था.
समुद्र की सतह चमक रही थी.
सब कुछ सामान्य था.
फिर अचानक.
नीरा रुक गई.
शौर्य भी स्थिर हो गया.
उसने तुरंत उसकी भावना महसूस की.
सतर्कता.
डर नहीं.
इस बार केवल सतर्कता.
शौर्य ने समुद्र की ओर देखा.
कुछ दूर पानी के ऊपर एक छोटा- सा गोलाकार घेरा बन रहा था.
पहले बहुत छोटा.
फिर थोडा बडा.
फिर और बडा.
शौर्य खडा हो गया.
लहरें सामान्य थीं.
लेकिन उस गोलाकार क्षेत्र के भीतर पानी जैसे नीचे खिंच रहा था.
शौर्य ने प्रणाली सक्रिय की.
अज्ञात ऊर्जा.
कम दूरी.
शौर्य का चेहरा गंभीर हो गया.
उसने नीरा को अपने पास बुलाया.
नीरा तुरंत उसके पास आई.
कुछ क्षण बाद पानी का वह घेरा गायब हो गया.
समुद्र फिर शांत हो गया.
शौर्य ने राहत की सांस ली.
लेकिन उसकी प्रणाली में एक नया संदेश दिखाई दिया.
परीक्षण की तैयारी पूर्ण.
शौर्य का दिल तेज धडकने लगा.
कौन- सा परीक्षण?
इस बार प्रणाली ने उत्तर दिया.
जीवित रहने की क्षमता.
शौर्य कुछ क्षण तक स्क्रीन देखता रहा.
फिर उसने आसपास देखा.
समुद्र.
चट्टानें.
नावें.
सब कुछ सामान्य था.
उसे समझ नहीं आया कि परीक्षण कहाँ था.
तभी नीरा अचानक तेज गति से आगे बढी.
शौर्य ने उसे पुकारा.
नीरा।
वह नहीं रुकी.
शौर्य तुरंत पानी में उतर गया.
कुछ ही सेकंड में नीरा समुद्र की उस जगह पहुँच गई जहाँ कुछ देर पहले पानी घूम रहा था.
शौर्य उसके पीछे गया.
जैसे ही वह वहाँ पहुँचा, समुद्र का पानी अचानक नीचे की ओर खिंचने लगा.
शौर्य का शरीर संतुलन खो बैठा.
उसने एक चट्टान पकड ली.
पानी का बहाव तेज हो रहा था.
नीरा भी बहाव में खिंच रही थी.
शौर्य ने तुरंत हाथ बढाया.
नीरा।
नीरा ने उसकी तरफ आने की कोशिश की.
लेकिन धारा बहुत मजबूत थी.
शौर्य ने अपनी पूरी ताकत लगाई.
उसकी उंगलियाँ चट्टान पर कस गईं.
लेकिन दूसरी तरफ नीरा धीरे- धीरे उससे दूर जा रही थी.
शौर्य के भीतर घबराहट पैदा हुई.
उसने अपनी ऊर्जा सक्रिय की.
हल्की नीली रोशनी उसके हाथ के आसपास फैल गई.
लेकिन उसकी शक्ति अभी बहुत कम थी.
वह खुद को खींचने में भी मुश्किल महसूस कर रहा था.
नीरा और दूर चली गई.
शौर्य ने दाँत भींचे.
नहीं।
उसने चट्टान छोड दी.
और पूरी ताकत से नीरा की तरफ तैरने लगा.
धारा उसे नीचे खींच रही थी.
उसकी आँखों में पानी चला गया.
कुछ क्षण के लिए उसे कुछ दिखाई नहीं दिया.
लेकिन उसने नीरा की ऊर्जा महसूस की.
बहुत हल्की.
डरी हुई.
लेकिन मौजूद.
शौर्य ने अपनी पूरी चेतना उसी ऊर्जा पर केंद्रित कर दी.
वह उसकी दिशा समझ सकता था.
दाईं तरफ.
थोडा नीचे.
फिर आगे.
उसने उसी दिशा में हाथ बढाया.
उसकी उंगलियाँ नीरा के शरीर से टकराईं.
शौर्य ने उसे पकड लिया.
लेकिन उसी समय धारा और तेज हो गई.
दोनों नीचे की ओर खिंचने लगे.
शौर्य ने अपनी ऊर्जा को नियंत्रित करने की कोशिश की.
उसे याद आया कि उसने पिछले दिनों क्या सीखा था.
ऊर्जा केवल हमला करने के लिए नहीं थी.
उसे प्रवाह की तरह महसूस करना था.
उसने आँखें बंद कर लीं.
अपने शरीर को ढीला छोड दिया.
फिर धीरे- धीरे अपनी ऊर्जा को धारा के साथ मिलाने की कोशिश की.
पहले कुछ नहीं हुआ.
फिर.
बहाव थोडा बदल गया.
बहुत थोडा.
लेकिन इतना कि शौर्य को दिशा बदलने का मौका मिल गया.
उसने नीरा को अपने करीब किया.
दोनों धीरे- धीरे ऊपर की तरफ बढने लगे.
कुछ सेकंड बाद शौर्य ने पानी की सतह देखी.
उसने पूरी ताकत से तैरना शुरू किया.
और अगले ही क्षण उसका सिर पानी से बाहर आया.
उसने जोर से सांस ली.
नीरा उसकी हथेली के पास थी.
शौर्य ने उसे पानी के ऊपर नहीं उठाया.
बस उसके पास रहा.
कुछ देर तक दोनों कुछ नहीं कर सके.
फिर धारा अचानक सामान्य हो गई.
समुद्र फिर शांत हो गया.
शौर्य ने पीछे देखा.
वह गोलाकार पानी का क्षेत्र गायब था.
जैसे वहाँ कुछ हुआ ही नहीं था.
शौर्य धीरे- धीरे किनारे की तरफ तैरने लगा.
नीरा उसके साथ थी.
किनारे पर पहुँचकर वह कुछ देर चट्टान पर बैठ गया.
उसका शरीर थक चुका था.
उसने प्रणाली खोली.
परीक्षण पूर्ण.
जीवित रहने की क्षमता.
परिणाम: उत्तीर्ण.
शौर्य ने कुछ देर तक स्क्रीन को देखा.
फिर उसकी नजर नीचे गई.
पुरस्कार.
बीस्ट ऊर्जा नियंत्रण की प्रारंभिक क्षमता.
शौर्य की आँखों में चमक आ गई.
उसने तुरंत क्षमता सक्रिय की.
एक हल्की गर्माहट उसके शरीर में फैल गई.
उसे अचानक पानी की हलचल पहले से ज्यादा स्पष्ट महसूस होने लगी.
समुद्र की धारा.
लहरों का दबाव.
नीरा की ऊर्जा.
सब कुछ पहले से साफ था.
शौर्य ने पानी में हाथ डाला.
इस बार उसे महसूस हुआ कि पानी केवल उसके हाथ के आसपास नहीं था.
वह उसके पूरे शरीर के आसपास था.
वह उसे महसूस कर सकता था.
उसने अपनी हथेली धीरे से ऊपर उठाई.
पानी की एक पतली धारा उसके हाथ के साथ ऊपर उठी.
शौर्य कुछ क्षण उसे देखता रहा.
फिर धारा वापस नीचे गिर गई.
उसने दोबारा कोशिश की.
इस बार भी वही हुआ.
लेकिन थोडा ज्यादा.
शौर्य के चेहरे पर मुस्कान आ गई.
यह उसकी पहली वास्तविक क्षमता थी.
वह पानी को नियंत्रित नहीं कर सकता था.
लेकिन वह उसकी गति को थोडा प्रभावित कर सकता था.
शौर्य ने नीरा की तरफ देखा.
हम दोनों साथ में और मजबूत हो सकते हैं।
नीरा उसके पास आ गई.
कुछ देर बाद वह समुद्र में वापस चली गई.
शौर्य ने उसे जाते हुए देखा.
आज का परीक्षण उसे बहुत कुछ सिखा गया था.
सबसे महत्वपूर्ण बात.
उसने यह समझा कि प्रणाली उसे बिना कारण शक्ति नहीं दे रही थी.
हर क्षमता के पीछे कोई अनुभव था.
हर अनुभव के पीछे कोई परीक्षा.
और हर परीक्षा शायद उसे अगले चरण के लिए तैयार कर रही थी.
लेकिन अब एक सवाल था.
क्या हर बार परीक्षा जानलेवा होगी?
शौर्य ने इस विचार को तुरंत दूर कर दिया.
वह इस बारे में ज्यादा सोचकर डरना नहीं चाहता था.
उसे पहले आज की क्षमता को समझना था.
अगले कई दिनों तक उसने उसी क्षमता का अभ्यास किया.
पहले उसने केवल पानी की छोटी लहरों को महसूस किया.
फिर उन्हें थोडा मोडना सीखा.
फिर समुद्र की सतह पर बनने वाली छोटी धाराओं को प्रभावित करना.
वह बहुत ज्यादा नहीं कर सकता था.
लेकिन धीरे- धीरे उसकी सीमा बढ रही थी.
नीरा भी साथ अभ्यास करती.
जब शौर्य पानी की धारा को बदलता, नीरा उसमें तैरने की कोशिश करती.
इससे दोनों के बीच तालमेल और बेहतर होने लगा.
एक दिन शौर्य ने देखा कि नीरा अचानक पानी की धारा के साथ बहुत तेज गति से आगे निकल गई.
वह सामान्य से कहीं ज्यादा तेज थी.
शौर्य ने तुरंत प्रणाली खोली.
विशेष क्षमता का संकेत.
शौर्य कुछ क्षण के लिए चुप हो गया.
आखिर तुम्हारे अंदर कुछ है।
उसने नीरा की तरफ देखा.
प्रणाली ने पूरी जानकारी नहीं दी.
केवल एक शब्द.
जल प्रवाह.
शौर्य समझ नहीं पाया कि यह क्षमता क्या कर सकती है.
लेकिन अब उसके पास अभ्यास करने के लिए कुछ था.
अगले दिन उसने नीरा को तेज धारा में तैरने दिया.
नीरा बाकी मछलियों की तुलना में बहुत तेजी से आगे बढने लगी.
शौर्य ने समझा कि वह पानी की प्राकृतिक धारा का उपयोग अपनी गति बढाने के लिए कर सकती है.
अगर वह इस क्षमता को विकसित कर सके, तो भविष्य में नीरा केवल एक सामान्य मछली नहीं रहेगी.
शायद वह किसी दिन एक शक्तिशाली समुद्री बीस्ट बन सके.
लेकिन विकास के लिए ऊर्जा चाहिए थी.
बहुत सारी.
शौर्य के पास अभी इतनी ऊर्जा नहीं थी.
इसलिए उसने फिर से समुद्र में ऊर्जा संग्रह शुरू किया.
सुबह.
शाम.
कभी छोटे जीवों से.
कभी प्राकृतिक ऊर्जा से.
और बहुत कम मात्रा में ऊर्जा क्रिस्टल से.
वह जल्दी नहीं कर रहा था.
उसे पता था कि नीरा को विकसित करने का सही समय अभी नहीं आया था.
इसी दौरान उसने एक और बात महसूस की.
समुद्र की गहराई से आने वाली वह ऊर्जा अब पहले से ज्यादा स्पष्ट हो रही थी.
लेकिन अब वह हर समय सक्रिय नहीं रहती थी.
कभी कई घंटे कुछ नहीं होता.
फिर अचानक कुछ क्षण के लिए वही भारी ऊर्जा महसूस होती.
जैसे कोई बहुत दूर से उसकी मौजूदगी की जाँच कर रहा हो.
शौर्य ने इसे नजरअंदाज नहीं किया.
लेकिन वह उसके पीछे भी नहीं भागा.
वह जानता था कि अभी उसकी शक्ति बहुत कम है.
अगर वह उस रहस्यमयी जीव तक गया, तो शायद वापस न लौट पाए.
एक शाम वह समुद्र किनारे बैठा था.
आसमान पर बादल थे.
सूरज डूबने वाला था.
नीरा पानी में थी.
शौर्य चुपचाप उसे देख रहा था.
तभी पीछे से आवाज आई.
तुम रोज यहाँ आते हो।
शौर्य ने पलटकर देखा.
वही बूढा मछुआरा था.
शौर्य ने उसे पहचान लिया.
हाँ।
बूढा उसके पास आकर बैठ गया.
कुछ देर दोनों समुद्र देखते रहे.
फिर बूढे ने पूछा, कुछ खोज रहे हो?
शौर्य ने तुरंत उत्तर नहीं दिया.
शायद।
बूढे ने समुद्र की तरफ देखा.
क्या?
शौर्य ने धीमे स्वर में कहा, पता नहीं।
बूढा हल्का मुस्कुराया.
सबसे खतरनाक खोज वही होती है जिसका नाम पता न हो।
शौर्य ने उसकी तरफ देखा.
बूढे ने कुछ नहीं कहा.
कुछ पल बाद उसने अपनी जेब से एक पुराना धातु का टुकडा निकाला.
उस पर वही चिन्ह बना था.
शौर्य की सांस अटक गई.
वही चिन्ह.
दरवाजे वाला.
उसके सपने वाला.
उसने उसे ध्यान से देखा.
बूढे ने पूछा, पहचाना?
शौर्य ने झूठ बोलना चाहा.
लेकिन उसकी आवाज नहीं निकली.
बूढे ने धातु का टुकडा वापस अपनी जेब में रख लिया.
तुम्हें अभी नहीं जानना चाहिए।
शौर्य ने तुरंत पूछा, आप जानते हैं इसके बारे में?
बूढा खडा हो गया.
मैं जितना जानता हूँ, उतना जानना ही काफी है।
लेकिन यह चिन्ह कहाँ से आया?
बूढे ने कोई उत्तर नहीं दिया.
वह कुछ कदम आगे बढा.
फिर रुककर बोला.
समुद्र के नीचे कुछ चीजें ऐसी हैं जिन्हें इंसान ने कभी बनाया नहीं था।
शौर्य ध्यान से सुनता रहा.
और कुछ ऐसी हैं जिन्हें इंसान ने समझने की कोशिश की।
बूढा उसकी तरफ मुडा.
अधिकतर लोग वापस नहीं लौटे।
शौर्य की नजर उसके चेहरे पर थी.
आप लौट आए।
बूढे ने हल्की मुस्कान दी.
मैं भी पूरा वापस नहीं आया।
यह कहकर वह चला गया.
शौर्य लंबे समय तक वहीं बैठा रहा.
उसके मन में एक बात बार- बार घूमती रही.
मैं भी पूरा वापस नहीं आया.
उस वाक्य का मतलब क्या था?
क्या बूढा भी कभी उस गहराई तक गया था?
क्या उसने भी वह नीली रोशनी देखी थी?
और क्या वह प्रणाली के बारे में कुछ जानता था?
शौर्य के पास अब पहले से ज्यादा सवाल थे.
लेकिन आज पहली बार उसे लगा कि शायद उसे एक इंसान मिल सकता है जो उसके कुछ सवालों के जवाब जानता हो.
वह उठ खडा हुआ.
लेकिन बूढा तब तक दूर जा चुका था.
शौर्य ने उसे आवाज नहीं दी.
वह जानता था कि बूढा अभी खुद कुछ नहीं बताना चाहता.
शायद सही समय आने पर वह बताएगा.
उस रात शौर्य ने फिर प्रणाली खोली.
नीरा की ऊर्जा बढी थी.
उसकी विशेष क्षमता अब स्पष्ट दिखाई दे रही थी.
जल प्रवाह.
और उसके नीचे एक नई पंक्ति थी.
विकास की शर्तें लगभग पूर्ण.
शौर्य ने उसे पढा.
फिर उसने ऊर्जा क्रिस्टल को देखा.
उसके पास अभी पर्याप्त ऊर्जा नहीं थी.
लेकिन अब उसे पता था कि लक्ष्य बहुत दूर नहीं है.
उसने धीरे से कहा.
नीरा।
समुद्र से एक हल्की प्रतिक्रिया आई.
शौर्य मुस्कुराया.
हम जल्दबाजी नहीं करेंगे।
दूर समुद्र में नीरा की हल्की नीली चमक दिखाई दी.
शौर्य ने खिडकी बंद कर दी.
उसे लगा कि आज सब कुछ शांत है.
लेकिन उसी समय समुद्र के नीचे एक और परिवर्तन हो रहा था.
प्राचीन दरवाजे की दरार पहले से थोडी चौडी हो गई थी.
उसके भीतर से नीली रोशनी बाहर आ रही थी.
और इस बार उस रोशनी के सामने एक विशाल आकृति खडी थी.
उसकी आँखें बंद थीं.
लेकिन उसके सामने शौर्य की छवि स्पष्ट थी.
मानो समुद्र के भीतर कोई उसकी हर गतिविधि देख रहा हो.
कुछ देर बाद वह विशाल आकृति धीरे से बोली.
उसने पहला परीक्षण पार कर लिया।
गुफा में दूसरी आवाज गूँजी.
और अब?
कुछ क्षण शांति रही.
फिर उत्तर आया.
अब उसे चुनना होगा।
क्या?
गहराई।
नीली रोशनी अचानक बुझ गई.
समुद्र फिर अंधकार में डूब गया.
उधर शौर्य सो चुका था.
उसे अभी नहीं पता था कि उसकी अगली परीक्षा कोई शक्ति नहीं होगी.
न कोई समुद्री जीव.
न कोई लहर.
बल्कि एक चुनाव होगा.
एक ऐसा चुनाव जो उसके और उसके आसपास के लोगों के बीच की दूरी हमेशा के लिए बदल सकता था.
और उस चुनाव का समय अब बहुत दूर नहीं था.