Chapter 7 of 30
गहराई की ओर पहला कदम
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सुबह का समय था.
सूरज अभी पूरी तरह ऊपर नहीं आया था.
आसमान के एक हिस्से में हल्का सुनहरा रंग फैल रहा था, जबकि समुद्र के ऊपर अभी भी नीली धुंध की एक पतली परत मौजूद थी.
सागरपुर धीरे- धीरे जाग रहा था.
दूर किसी मंदिर की घंटी सुनाई दे रही थी.
कहीं कोई दुकान खोल रहा था.
किसी घर के बाहर पानी डाला जा रहा था.
और समुद्र.
वह हमेशा की तरह अपनी गति से चल रहा था.
लहरें किनारे तक आतीं.
रेत को छूतीं.
कुछ पल ठहरतीं.
फिर वापस लौट जातीं.
शौर्य काफी देर से समुद्र किनारे बैठा था.
उसने आज किसी काम की जल्दी नहीं की थी.
वह बस बैठा हुआ था.
उसकी नजर सामने समुद्र पर थी.
कुछ दूरी पर पानी के भीतर नीरा तैर रही थी.
वह कभी दाईं ओर जाती.
फिर वापस आती.
कुछ देर शौर्य से थोडी दूर रहती.
फिर धीरे- धीरे उसके करीब आ जाती.
शौर्य उसे देख रहा था.
पिछले कुछ दिनों में उसने बहुत कुछ देखा था.
प्रणाली.
ऊर्जा.
विकास.
क्रिस्टल.
और अब बीस्ट बंधन.
लेकिन इन सब चीजों के बीच एक बात उसे सबसे ज्यादा अलग लग रही थी.
नीरा.
पहले वह केवल एक छोटी समुद्री मछली थी.
अब उसके साथ एक ऐसा संबंध बन चुका था जिसे शब्दों में समझाना आसान नहीं था.
शौर्य जब शांत होता, तो नीरा भी शांत रहती.
जब वह बेचैन होता, तो उसके भीतर भी हल्की बेचैनी महसूस होती.
जब शौर्य समुद्र की तरफ ध्यान देता, तो नीरा अक्सर उसी दिशा में देखने लगती.
यह संबंध अभी बहुत कमजोर था.
लेकिन मौजूद था.
और शौर्य को इस बात का एहसास हर गुजरते दिन के साथ थोडा और स्पष्ट होता जा रहा था.
उसने हाथ पानी में डाल दिया.
नीरा तुरंत उसके पास आ गई.
उसकी छोटी- सी देह शौर्य की हथेली के पास घूमने लगी.
शौर्य ने धीरे से कहा, आज से हमें अभ्यास शुरू करना होगा।
नीरा ने उसकी उंगलियों को हल्के से छुआ.
शौर्य के चेहरे पर मुस्कान आ गई.
मुझे पता है, तुम मेरी बात समझ नहीं सकती।
वह कुछ क्षण रुका.
लेकिन शायद धीरे- धीरे समझने लगोगी।
उसने हाथ पानी से बाहर निकाल लिया.
फिर उसने प्रणाली सक्रिय की.
नीरा की जानकारी उसके सामने दिखाई दी.
बीस्ट.
नाम: नीरा.
प्रजाति: सामान्य समुद्री मछली.
वर्तमान स्तर: प्रारंभिक.
ऊर्जा: निम्न.
बंधन: स्थिर.
विकास क्षमता: उपलब्ध.
विशेष क्षमता: अज्ञात.
शौर्य ने विशेष क्षमता वाली पंक्ति को फिर से देखा.
अज्ञात.
वह शब्द पिछले कुछ दिनों से उसके मन में था.
नीरा में कुछ ऐसा था जिसे प्रणाली अभी पहचान नहीं पा रही थी.
या शायद वह क्षमता इतनी कमजोर थी कि दिखाई नहीं दे रही थी.
शौर्य ने तय किया कि वह इसे जबरदस्ती नहीं खोजेगा.
वह पहले नीरा को मजबूत करेगा.
धीरे- धीरे.
उसने समुद्र के किनारे पडी कुछ छोटी मछलियों को देखा.
फिर एक विचार उसके मन में आया.
क्या नीरा स्वयं ऊर्जा प्राप्त कर सकती है?
उसने प्रणाली में पूछा.
उत्तर आया.
बंधित बीस्ट स्वतंत्र रूप से प्राकृतिक ऊर्जा अवशोषित कर सकता है.
शौर्य ने ध्यान से पढा.
इसका मतलब था कि नीरा केवल उसकी ऊर्जा पर निर्भर नहीं थी.
वह खुद भी विकसित हो सकती थी.
यह अच्छी बात थी.
शौर्य ने नीरा की तरफ देखा.
तो तुम्हें खुद सीखना होगा।
नीरा उसके आसपास घूमने लगी.
शौर्य कुछ देर तक उसे देखता रहा.
फिर उसने समुद्र के थोडे गहरे हिस्से की तरफ इशारा किया.
वहाँ जाओ।
नीरा कुछ पल वहीं रही.
फिर धीरे- धीरे आगे बढी.
शौर्य उसके साथ चलने लगा.
पानी अब उसके टखनों तक था.
कुछ कदम और आगे जाने पर पानी घुटनों तक पहुँच गया.
वह वहीं रुक गया.
नीरा थोडी दूर आगे चली गई.
शौर्य उसकी ऊर्जा महसूस कर सकता था.
कुछ छोटी मछलियाँ उसके पास थीं.
नीरा पहले उन्हें देखकर थोडा पीछे हट गई.
शायद उसे डर लग रहा था.
शौर्य ने महसूस किया कि उसकी ऊर्जा में हल्की घबराहट है.
उसने तुरंत कोई आदेश नहीं दिया.
वह वहीं खडा रहा.
कुछ क्षण बीते.
फिर नीरा ने धीरे- धीरे एक छोटी मछली का पीछा करना शुरू किया.
पहले बहुत धीमी गति से.
फिर थोडी तेज.
मछली अचानक दिशा बदलकर भागी.
नीरा भी उसके पीछे मुडी.
दोनों कुछ दूरी तक गईं.
फिर नीरा वापस लौट आई.
शौर्य के मन में एक हल्की खुशी हुई.
यह कोई बडी उपलब्धि नहीं थी.
लेकिन शुरुआत थी.
उसने सोचा.
शक्ति केवल ऊर्जा से नहीं आएगी.
नियंत्रण भी जरूरी है.
और उससे भी ज्यादा जरूरी है विश्वास.
नीरा को लडना सीखना होगा.
लेकिन उससे पहले उसे डर पर नियंत्रण करना होगा.
शौर्य वापस किनारे आया.
उसने कुछ देर समुद्र को देखा.
फिर उसे अचानक एक बात याद आई.
आज उसे Collage भी जाना था.
वह घर लौट गया.
घर में अनन्या नाश्ता कर रही थी.
उसने शौर्य को देखते ही पूछा, आज फिर समुद्र गए थे?
शौर्य कुछ पल चुप रहा.
हाँ।
अनन्या ने उसकी तरफ देखा.
आप इन दिनों बहुत समय समुद्र के पास बिताने लगे हैं।
शौर्य ने कुर्सी खींचकर बैठते हुए कहा, वहाँ दिमाग शांत रहता है।
अनन्या ने धीरे से कहा, आप पहले भी परेशान रहते थे।
शौर्य ने उसे देखा.
अब कम परेशान रहता हूँ।
क्यों?
शौर्य के चेहरे पर हल्की मुस्कान आई.
क्योंकि अब मुझे लगता है कि कुछ चीजें मेरे नियंत्रण में हैं।
अनन्या उसे समझ नहीं पाई.
लेकिन उसने ज्यादा सवाल नहीं किया.
कुछ देर बाद शौर्य Collage के लिए निकल गया.
उस दिन उसकी कक्षाएँ सामान्य थीं.
लेकिन उसके दिमाग का एक हिस्सा लगातार नीरा के बारे में सोच रहा था.
वह सोच रहा था कि उसे कैसे मजबूत किया जाए.
क्या उसे विकसित करना सही होगा?
या पहले उसका वर्तमान स्तर बढाना चाहिए?
क्या विकास के बाद उसकी प्रकृति बदल जाएगी?
क्या उसका आकार बढेगा?
क्या उसकी कोई नई क्षमता सामने आएगी?
इन सवालों का कोई उत्तर उसके पास नहीं था.
दोपहर के समय उसने पुस्तकालय में जाकर कुछ किताबें देखीं.
उसने समुद्री जीवों के बारे में जानकारी खोजी.
वहाँ उसे कई सामान्य प्रजातियों के बारे में पढने को मिला.
कुछ छोटी मछलियाँ तेजी से बढती थीं.
कुछ लंबे समय तक जीवित रहती थीं.
कुछ गहरे पानी में रहती थीं.
कुछ सतह के करीब.
शौर्य ने कई बातें नोट कीं.
लेकिन किसी किताब में उसे ऊर्जा या बीस्ट साधना के बारे में कुछ नहीं मिला.
यह स्वाभाविक भी था.
अगर यह शक्ति इतनी दुर्लभ थी, तो उसके बारे में सामान्य किताबों में जानकारी कैसे होती?
उसने किताब बंद कर दी.
तभी उसके सामने एक बात आई.
अगर कोई और व्यक्ति इस शक्ति के बारे में जानता है, तो वह जानकारी कहाँ से मिली होगी?
उसे गोदाम वाला आदमी याद आया.
वही रहस्यमयी व्यक्ति.
उसने उस मछली को पहचान लिया था.
सिर्फ पहचान ही नहीं.
उसने उसके लिए बडी रकम भी दी थी.
शौर्य ने उस दिन से उसके बारे में ज्यादा सोचा नहीं था.
लेकिन अब उसे लगने लगा था कि वह व्यक्ति महत्वपूर्ण हो सकता है.
शाम को शौर्य काम पर गया.
राघव पहले से वहाँ था.
दोनों सामान उतारने लगे.
कुछ देर बाद राघव ने कहा, आजकल तू ज्यादा शांत रहता है।
शौर्य ने मुस्कुराकर पूछा, पहले क्या था?
पहले हर बात पर दस बार सोचता था।
अब भी सोचता हूँ।
लेकिन चेहरे पर नहीं दिखता।
शौर्य ने कोई उत्तर नहीं दिया.
काम चलता रहा.
कुछ समय बाद वही रहस्यमयी आदमी फिर दिखाई दिया.
इस बार वह अकेला नहीं था.
उसके साथ एक और व्यक्ति था.
दोनों धीरे- धीरे गोदाम के अंदर आए.
शौर्य ने उन्हें दूर से देखा.
वह व्यक्ति कुछ देर मालिक से बात करता रहा.
फिर उसकी नजर शौर्य पर आकर रुक गई.
केवल कुछ सेकंड के लिए.
लेकिन शौर्य ने वह नजर महसूस कर ली.
उसने तुरंत अपना ध्यान काम पर लगा दिया.
वह नहीं चाहता था कि सामने वाला समझे कि वह उसे पहचान रहा है.
लेकिन तभी.
उस आदमी ने अचानक कहा, तुम।
शौर्य ने धीरे से सिर उठाया.
जी?
वह आदमी उसकी तरफ बढा.
तुम यहाँ कब से काम करते हो?
शौर्य ने सामान्य आवाज में कहा, कुछ समय से।
समुद्र के पास रहते हो?
शौर्य ने कुछ क्षण उसे देखा.
हाँ।
आदमी की आँखें कुछ पल उसके चेहरे पर टिकी रहीं.
फिर उसने पूछा, तुम समुद्र में जाते हो?
शौर्य के भीतर हल्की चेतावनी उठी.
उसने कहा, कभी- कभी।
आदमी ने मुस्कुराने की कोशिश की.
लेकिन उस मुस्कान में कुछ अजीब था.
समुद्र से दूर रहना।
शौर्य ने पूछा, क्यों?
आदमी ने जवाब नहीं दिया.
वह मुडकर चला गया.
शौर्य उसे जाते हुए देखता रहा.
कुछ देर तक.
फिर राघव ने धीरे से पूछा, कौन था?
शौर्य ने कहा, पता नहीं।
लेकिन उसके मन में अब एक नया सवाल था.
उस आदमी को कैसे पता कि वह समुद्र में जाता है?
क्या उसने उसे पहले देखा था?
या वह केवल अनुमान लगा रहा था?
शौर्य ने उस बात को वहीं छोड दिया.
उस रात घर लौटने के बाद उसने प्रणाली खोली.
नीरा की ऊर्जा थोडी बढी हुई थी.
शौर्य को समझ आया कि वह दिनभर खुद ऊर्जा जमा कर रही थी.
उसके चेहरे पर हल्की खुशी आई.
इसका मतलब था कि वह धीरे- धीरे मजबूत हो रही थी.
अगले कुछ दिनों तक शौर्य ने इसी तरीके को अपनाया.
सुबह वह समुद्र के किनारे जाता.
नीरा के साथ अभ्यास करता.
फिर Collage जाता.
शाम को काम करता.
रात में प्रणाली की जानकारी देखता.
यह दिनचर्या बहुत साधारण लग सकती थी.
लेकिन हर दिन कुछ छोटा- सा बदल रहा था.
नीरा पहले से ज्यादा तेज तैरने लगी.
उसका डर कम हुआ.
वह छोटी मछलियों के पीछे भागने लगी.
कभी- कभी वह शौर्य के आदेश के बिना भी उसके आसपास के पानी में घूमकर लौट आती.
एक सप्ताह बीत गया.
फिर दूसरा.
शौर्य की अपनी ऊर्जा भी धीरे- धीरे बढ रही थी.
उसने ऊर्जा क्रिस्टल को बहुत कम मात्रा में इस्तेमाल किया था.
बाकी समय वह समुद्री जीवों से मिलने वाली ऊर्जा पर निर्भर रहा.
उसे जल्दी शक्ति नहीं चाहिए थी.
उसे स्थिर शक्ति चाहिए थी.
एक सुबह उसने प्रणाली खोली.
नीरा का वर्तमान स्तर पहले से बढ चुका था.
शौर्य कुछ देर तक स्क्रीन देखता रहा.
वह खुश था.
लेकिन तभी नीचे एक नया संदेश दिखाई दिया.
विकास के लिए ऊर्जा पर्याप्त.
शौर्य की नजर वहीं रुक गई.
उसने नीरा को देखा.
वह पानी में शांत तैर रही थी.
शौर्य ने कुछ नहीं किया.
उसने उस दिन विकास का प्रयास नहीं किया.
उसे लगता था कि पहले उसे यह समझना चाहिए कि नीरा अभी Kiss अवस्था में है.
शायद विकास के बाद सब कुछ बदल सकता था.
शायद उसकी क्षमता भी.
इसलिए उसने इंतजार किया.
लेकिन उसी दिन समुद्र में कुछ हुआ.
दोपहर के समय अचानक मौसम बदल गया.
आसमान साफ था.
फिर भी समुद्र की लहरें सामान्य से थोडी तेज होने लगीं.
शौर्य समुद्र किनारे खडा था.
नीरा उसके पास थी.
अचानक नीरा बहुत तेजी से उसकी तरफ आई.
उसकी ऊर्जा में डर था.
शौर्य ने तुरंत समुद्र की तरफ देखा.
दूर कुछ नावें दिखाई दे रही थीं.
एक नाव बाकी से थोडी पीछे थी.
वह अचानक एक तरफ झुकी.
फिर दूसरी तरफ.
लहरें बढती जा रही थीं.
लोग चिल्लाने लगे.
शौर्य कुछ क्षण वहीं खडा रहा.
फिर उसने प्रणाली सक्रिय की.
समुद्र की ऊर्जा सामान्य नहीं थी.
दक्षिण- पश्चिम की दिशा से एक भारी ऊर्जा लहर आ रही थी.
वही ऊर्जा.
वही रहस्यमयी स्रोत.
शौर्य का चेहरा गंभीर हो गया.
उसे अब समझ आने लगा था कि यह केवल कोई दूर का जीव नहीं था.
उसकी गतिविधियाँ समुद्र की सतह को भी प्रभावित कर सकती थीं.
नाव पर मौजूद लोग घबराने लगे.
शौर्य ने नीरा की तरफ देखा.
उसने मन ही मन कहा.
नीरा, नाव के नीचे जाओ।
नीरा तुरंत आगे बढी.
शौर्य को पता नहीं था कि वह क्या कर सकती है.
लेकिन उसने भरोसा किया.
नीरा पानी के भीतर गायब हो गई.
कुछ क्षण तक शौर्य उसे महसूस करता रहा.
फिर उसे उसकी स्थिति समझ आई.
वह नाव के नीचे पहुँच चुकी थी.
वहाँ एक टूटी हुई रस्सी पानी में उलझी थी.
नाव उसी कारण असंतुलित हो रही थी.
शौर्य ने तुरंत आदेश दिया.
रस्सी काटो।
नीरा ने कोशिश की.
लेकिन उसकी शक्ति बहुत कम थी.
वह रस्सी को खींच नहीं पा रही थी.
शौर्य ने दाँत भींच लिए.
वह खुद पानी में उतरना चाहता था.
लेकिन लहरें तेज थीं.
फिर नीरा ने अचानक दूसरी दिशा में जाकर रस्सी के एक हिस्से को धक्का दिया.
रस्सी ढीली हुई.
नाव थोडी स्थिर हो गई.
लोगों ने राहत की सांस ली.
लेकिन तभी एक बडी लहर आई.
नाव फिर हिल गई.
शौर्य ने बिना सोचे पानी में कदम बढा दिया.
उसने नीरा को अपनी तरफ बुलाया.
नीरा तेजी से उसकी ओर आई.
शौर्य ने उसे हाथ के पास महसूस किया.
फिर उसने समुद्र की गहराई की तरफ देखा.
उसे पहली बार वह ऊर्जा इतनी स्पष्ट महसूस हुई.
जैसे कोई बहुत दूर से उसकी तरफ देख रहा हो.
शौर्य के शरीर में सिहरन दौड गई.
अचानक उसके सामने एक दृश्य चमका.
गहरे पानी में एक विशाल आँख.
नीली.
ठंडी.
और स्थिर.
शौर्य कुछ क्षण के लिए बिल्कुल जड हो गया.
फिर दृश्य गायब हो गया.
समुद्र फिर सामान्य दिखाई देने लगा.
लेकिन उसके भीतर अब एक बात साफ थी.
वह विशाल जीव उसे देख सकता था.
और शायद पहली बार उसने भी उसे देख लिया था.
शौर्य तुरंत किनारे लौट आया.
कुछ देर तक वह चुप खडा रहा.
नीरा उसके पास थी.
उसकी ऊर्जा कांप रही थी.
शौर्य ने हाथ पानी में डालकर उसे शांत किया.
डरो मत।
नीरा धीरे- धीरे शांत हो गई.
शौर्य ने समुद्र की तरफ देखा.
आज उसे पहली बार अपनी कमजोरी महसूस हुई.
अगर वह विशाल जीव सच में जाग गया था, तो नीरा और वह दोनों उसके सामने कुछ भी नहीं थे.
उसे और मजबूत होना होगा.
लेकिन उससे पहले उसे समझना होगा कि वह जीव क्या है.
और वह उसे क्यों महसूस कर रहा है.
उस शाम शौर्य ने एक बडा फैसला किया.
वह अगले दिन समुद्र के उस हिस्से की तरफ जाएगा जहाँ से ऊर्जा आ रही थी.
बहुत दूर नहीं.
केवल उतनी दूरी तक जहाँ तक वह सुरक्षित रह सके.
वह पहले पानी के भीतर जाना सीखेगा.
अपनी ऊर्जा को नियंत्रित करेगा.
और नीरा के साथ मिलकर समुद्र की धाराओं को समझेगा.
यह जोखिम था.
लेकिन वह हमेशा किनारे पर खडे होकर उस रहस्य को नहीं समझ सकता था.
रात को उसने सारी तैयारी की.
रस्सी.
एक छोटा चाकू.
पानी की बोतल.
और ऊर्जा क्रिस्टल.
उसने क्रिस्टल को साथ रखने के बारे में बहुत सोचा.
फिर उसे एक सुरक्षित कपडे में लपेटकर बैग में रख लिया.
अगर कुछ हुआ तो शायद यह उसकी मदद कर सके.
सुबह वह बहुत जल्दी निकल गया.
इस बार अनन्या सो रही थी.
शौर्य ने उसे जगाया नहीं.
वह सीधे समुद्र किनारे पहुँचा.
नीरा पहले से वहाँ थी.
शौर्य ने उसे देखा.
आज हमें थोडा आगे जाना है।
नीरा कुछ देर उसके आसपास घूमी.
फिर आगे बढ गई.
शौर्य पानी में उतरा.
पहले टखने तक.
फिर घुटनों तक.
फिर कमर तक.
उसने गहरी सांस ली.
अब समुद्र का तापमान उसे स्पष्ट महसूस हो रहा था.
पानी के भीतर आवाजें अलग थीं.
दुनिया जैसे धीमी हो गई थी.
उसने आँखें बंद कीं.
अपनी ऊर्जा को महसूस किया.
फिर उसे अपने आसपास पानी की हलचल महसूस हुई.
नीरा उसके पास थी.
दोनों धीरे- धीरे आगे बढे.
कुछ दूरी के बाद शौर्य ने पीछे देखा.
किनारा अब थोडा दूर था.
उसने पहली बार महसूस किया कि वह सच में समुद्र के भीतर आ चुका है.
उसे डर लगा.
लेकिन वह वापस नहीं गया.
नीरा आगे तैर रही थी.
शौर्य उसके पीछे था.
कुछ और आगे जाने के बाद प्रणाली सक्रिय हुई.
अज्ञात ऊर्जा स्रोत की दिशा.
दक्षिण- पश्चिम.
दूरी.
कम हो रही है.
शौर्य ने गहरी सांस ली.
उसने समुद्र के अंधेरे हिस्से की तरफ देखा.
नीचे बहुत गहराई थी.
इतनी कि सूर्य की रोशनी धीरे- धीरे कम हो रही थी.
नीरा अचानक रुक गई.
शौर्य भी रुक गया.
कुछ नहीं था.
लेकिन फिर.
बहुत नीचे.
एक हल्की नीली चमक दिखाई दी.
शौर्य की धडकन तेज हो गई.
वह चमक एक पल के लिए दिखाई दी.
फिर गायब हो गई.
नीरा की ऊर्जा अचानक कांपने लगी.
शौर्य ने तुरंत उसका हाथ नहीं पकडा.
उसने केवल उसे महसूस किया.
फिर प्रणाली में एक नया संदेश उभरा.
अज्ञात क्षेत्र की सीमा के निकट.
आगे बढना जोखिमपूर्ण.
शौर्य वहीं रुक गया.
उसने नीचे देखा.
उसे लगा जैसे गहराई के भीतर कोई चीज उसे देख रही है.
लेकिन इस बार उसने डरकर पीछे हटने के बजाय कुछ और किया.
उसने अपनी ऊर्जा को शांत किया.
और मन ही मन कहा.
मैं अभी तुम्हारे पास नहीं आऊँगा।
कुछ क्षण कुछ नहीं हुआ.
फिर दूर कहीं एक बहुत हल्की नीली रोशनी जली.
जैसे किसी ने उसके शब्द सुन लिए हों.
शौर्य ने नीरा की तरफ देखा.
फिर धीरे- धीरे वापस मुड गया.
वह जानता था कि आज उसे कोई उत्तर नहीं मिलेगा.
लेकिन उसे एक चीज मिल गई थी.
दिशा.
अब उसे पता था कि रहस्य कहाँ है.
और सबसे महत्वपूर्ण.
उसे यह भी समझ आ गया था कि वह रहस्य उससे भाग नहीं रहा.
वह इंतजार कर रहा था.
शौर्य और नीरा धीरे- धीरे वापस किनारे की ओर तैरने लगे.
सूरज अब ऊपर आ चुका था.
समुद्र की सतह पर रोशनी चमक रही थी.
किनारा धीरे- धीरे पास आता गया.
शौर्य ने पीछे मुडकर आखिरी बार समुद्र की गहराई को देखा.
कुछ भी दिखाई नहीं दे रहा था.
फिर भी उसे पता था.
नीचे कुछ है.
कुछ बहुत पुराना.
बहुत शक्तिशाली.
और शायद उसकी कहानी से जुडा हुआ.
वह किनारे पर आ गया.
नीरा उसके पास तैर रही थी.
शौर्य ने उसे देखा और हल्की मुस्कान दी.
आज इतना ही।
नीरा पानी में एक छोटा चक्कर लगाकर उसके पास आ गई.
शौर्य ने समुद्र की तरफ देखा.
फिर धीरे से कहा.
अगली बार हम थोडा और आगे जाएँगे।
लेकिन वह यह नहीं जानता था कि अगली बार तक समुद्र उसका इंतजार नहीं करने वाला था.
क्योंकि उसी रात.
दक्षिण- पश्चिमी समुद्री क्षेत्र में.
समुद्र की गहराई में बंद वह प्राचीन दरवाजा पहली बार थोडा- सा खुल गया.
दरवाजे के भीतर से नीली रोशनी बाहर आई.
और उस रोशनी के साथ एक बहुत धीमी आवाज गूँजी.
धारक ने गहराई को देख लिया है।
कुछ क्षण बाद दूसरी आवाज आई.
अब गहराई भी उसे देखेगी।
दरवाजा थोडा और खुला.
और उसके भीतर से एक पतली नीली रेखा निकलकर समुद्र की ओर फैल गई.
वह रेखा धीरे- धीरे ऊपर उठी.
बहुत ऊपर.
समुद्र की सतह तक.
और फिर.
सागरपुर के किनारे तक.
जहाँ शौर्य कुछ घंटे पहले खडा था.
उसके कमरे में रखी प्रणाली अचानक अपने आप चमकी.
शौर्य सो रहा था.
उसने कुछ नहीं देखा.
लेकिन स्क्रीन पर एक नया संदेश उभरा.
गहराई की पहचान पूर्ण.
अगला परीक्षण प्रारंभ होगा.
शौर्य की नींद में उसकी भौंहें हल्की सिकुडीं.
फिर वह शांत हो गया.
उसे अभी नहीं पता था कि अगली सुबह उसके सामने केवल एक नया दिन नहीं होगा.
बल्कि उसकी शक्ति यात्रा का पहला वास्तविक परीक्षण उसका इंतजार कर रहा होगा.