Chapter 6 of 30
पहला बंधन
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सुबह होने से कुछ देर पहले शौर्य की आँखें खुल गईं.
उसे याद नहीं था कि वह कब सोया था.
पिछली रात वह काफी देर तक प्रणाली के बारे में सोचता रहा था. उसके सामने एक साथ बहुत सारे सवाल खडे हो गए थे.
समुद्र के भीतर मौजूद रहस्यमयी ऊर्जा.
वह अज्ञात बीस्ट.
नीला ऊर्जा क्रिस्टल.
गोदाम में आया वह रहस्यमयी आदमी.
और सबसे ज्यादा परेशान करने वाली बात थी प्रणाली का वह अंतिम संदेश.
पहला चरण पूर्ण.
अगला चरण प्रारंभ होने की प्रतीक्षा में.
शौर्य कुछ देर तक बिस्तर पर बैठा रहा.
कमरे में अभी अंधेरा था.
खिडकी से बाहर केवल समुद्र की बहुत हल्की आवाज सुनाई दे रही थी.
उसने धीरे से आँखें बंद कीं.
प्रणाली.
नीली रोशनी उसके सामने उभरी.
सब कुछ पहले जैसा था.
लेकिन अब बीस्ट बंधन का विकल्प पहले से ज्यादा स्पष्ट दिखाई दे रहा था.
शौर्य ने उसे देखा.
उसके मन में कल शाम का वह संदेश फिर से आया.
उपयुक्त बीस्ट की खोज संभव.
उसने कुछ क्षण सोचा.
फिर मन ही मन प्रणाली से पूछा.
क्या तुम मुझे बता सकती हो कि बंधन के लिए Kiss तरह का बीस्ट चाहिए?
कुछ क्षण कोई प्रतिक्रिया नहीं हुई.
फिर स्क्रीन पर शब्द उभरे.
धारक के वर्तमान स्तर के अनुसार सीमित बीस्ट बंधन संभव.
शौर्य ने आगे पूछा.
सीमित मतलब?
उत्तर आया.
उच्च स्तर के बीस्ट पर बंधन प्रयास असफल हो सकता है.
शौर्य ने गहरी सांस ली.
उसे यही डर था.
अगर वह किसी शक्तिशाली जीव को अपना साथी बनाने की कोशिश करता और असफल हो जाता, तो परिणाम उसके लिए खतरनाक हो सकता था.
लेकिन इसका एक दूसरा अर्थ भी था.
उसे ऐसा बीस्ट ढूँढना होगा जिसे वह संभाल सके.
शौर्य ने स्क्रीन बंद कर दी.
आज वह समुद्र में जाएगा.
लेकिन किसी बडे जीव की तलाश करने नहीं.
वह पहले छोटे जीवों को समझेगा.
उनके व्यवहार को देखेगा.
उनकी ऊर्जा को महसूस करेगा.
और फिर किसी एक को चुनने की कोशिश करेगा.
उसने धीरे से बिस्तर छोडा.
अनन्या अभी सो रही थी.
शौर्य ने उसे जगाया नहीं.
रसोई में जाकर उसने थोडा पानी पिया.
मेज पर रखी उसकी किताबों पर नजर पडी.
एक किताब खुली हुई थी.
शायद पढते- पढते वह सो गई थी.
शौर्य ने किताब बंद की और उसे ठीक से रख दिया.
फिर उसने एक कागज पर कुछ लिखकर मेज पर रख दिया.
नाश्ता कर लेना. मैं जल्दी लौट आऊँगा।
वह घर से निकल गया.
सुबह का समुद्र शांत था.
शौर्य उस जगह पहुँचा जहाँ पिछले कुछ दिनों से वह ऊर्जा इकट्ठा करता आ रहा था.
आज उसने तुरंत ऊर्जा संग्रह शुरू नहीं किया.
वह चट्टान पर बैठ गया और समुद्र को देखने लगा.
कुछ देर बाद छोटी मछलियाँ उसके आसपास आने लगीं.
शौर्य ने उन्हें ध्यान से देखा.
हर मछली की ऊर्जा अलग थी.
किसी की बहुत हल्की.
किसी की थोडी अधिक.
लेकिन एक मछली ऐसी थी जो बाकी सबसे अलग थी.
वह आकार में थोडी छोटी थी.
उसके शरीर पर कोई विशेष चमक नहीं थी.
फिर भी जब वह शौर्य के करीब आती, उसकी प्रणाली हल्की प्रतिक्रिया देती.
शौर्य ने आँखें बंद कीं.
उसे उस मछली की ऊर्जा महसूस हुई.
बहुत छोटी.
लेकिन स्थिर.
उसमें एक अजीब संतुलन था.
वह बाकी मछलियों की तरह इधर- उधर भागती नहीं थी.
वह धीरे- धीरे तैरती.
कुछ देर शौर्य के आसपास रहती.
फिर थोडी दूर चली जाती.
और कुछ समय बाद वापस आ जाती.
शौर्य ने उसे कई मिनट तक देखा.
उसके भीतर एक भावना पैदा हुई.
शायद यही.
उसने हाथ पानी में डाला.
मछली उसके पास आई.
लेकिन इस बार उसने ऊर्जा लेने की कोशिश नहीं की.
उसने केवल हाथ स्थिर रखा.
मछली उसकी उंगलियों के आसपास घूमती रही.
फिर उसकी हथेली को हल्के से छूकर आगे निकल गई.
प्रणाली सक्रिय हुई.
उपयुक्त बीस्ट.
शौर्य का दिल तेज धडकने लगा.
उसने तुरंत प्रणाली खोल दी.
क्या यही वह जीव था?
उसके सामने तीन विकल्प दिखाई दिए.
ऊर्जा संग्रह.
विकास.
बंधन.
शौर्य ने कुछ देर तक बंधन को देखा.
उसका हाथ पानी के भीतर था.
मछली अभी भी आसपास घूम रही थी.
उसने धीरे से पूछा.
क्या तुम मेरे साथ चलना चाहोगी?
बेशक मछली ने कोई उत्तर नहीं दिया.
लेकिन वह दूर नहीं गई.
शौर्य ने हल्की मुस्कान के साथ कहा.
शायद यही तुम्हारा जवाब है।
उसने बंधन विकल्प सक्रिय किया.
कुछ नहीं हुआ.
फिर अचानक पानी में एक हल्की नीली रोशनी फैली.
मछली के शरीर के चारों तरफ छोटे- छोटे प्रकाश कण बनने लगे.
शौर्य ने हाथ पीछे नहीं खींचा.
प्रणाली ने एक संदेश दिखाया.
प्रारंभिक बंधन प्रयास.
सफलता की संभावना: मध्यम.
जोखिम: निम्न.
शौर्य ने गहरी सांस ली.
शुरू करो।
नीली रोशनी अचानक थोडी तेज हो गई.
मछली कुछ पल के लिए स्थिर हो गई.
शौर्य की हथेली गर्म होने लगी.
लेकिन इस बार पिछली बार वाले ऊर्जा क्रिस्टल जैसी बेचैनी नहीं थी.
एक शांत गर्माहट उसके हाथ से होकर शरीर में फैल रही थी.
उसके सामने एक और संदेश आया.
ऊर्जा अनुकूलता की जाँच.
शौर्य की धडकन तेज हो गई.
कुछ सेकंड.
फिर दूसरा संदेश.
अनुकूलता पर्याप्त.
बंधन प्रक्रिया जारी.
शौर्य ने मछली को देखा.
उसके छोटे से शरीर पर नीली रोशनी की पतली परत बन रही थी.
फिर एक हल्का प्रकाश उसके शरीर से निकलकर शौर्य की हथेली तक आया.
शौर्य ने आँखें बंद कर लीं.
उसे अचानक एक बहुत हल्की अनुभूति हुई.
भूख.
ठंडा पानी.
रोशनी.
डर.
और फिर एक अजीब- सी शांति.
शौर्य की आँखें तुरंत खुल गईं.
उसने हाथ पानी से बाहर निकाल लिया.
मछली अब भी उसके सामने थी.
लेकिन इस बार उनके बीच कुछ बदल चुका था.
वह मछली उसके आसपास घूम रही थी.
और शौर्य उसकी मौजूदगी को अपने भीतर महसूस कर सकता था.
सिस्टम के सामने एक नया संदेश उभरा.
पहला बीस्ट बंधन सफल.
बीस्ट का नाम निर्धारित नहीं.
शौर्य कुछ क्षण तक स्क्रीन को देखता रहा.
फिर मुस्कुराया.
उसने धीरे से कहा.
तुम्हारा नाम.
वह रुक गया.
उसने मछली को देखा.
उसका शरीर छोटा था.
लेकिन उसकी गति बहुत शांत थी.
उसके पंखों पर हल्की नीली चमक थी.
शौर्य ने कहा.
नीरा।
मछली एक पल के लिए उसके सामने स्थिर हो गई.
प्रणाली ने तुरंत प्रतिक्रिया दी.
बीस्ट का नाम निर्धारित.
नीरा.
शौर्य के चेहरे पर मुस्कान आ गई.
उसे नहीं पता था कि किसी जीव का नाम रखना इतना अलग अनुभव होगा.
लेकिन यह साधारण मछली अब उसके लिए केवल एक समुद्री जीव नहीं थी.
यह उसका पहला बीस्ट था.
उसका पहला साथी.
उसने हाथ पानी में रखा.
नीरा उसके हाथ के पास आ गई.
शौर्य ने उसकी ऊर्जा महसूस की.
अब वह ऊर्जा पहले से अधिक स्पष्ट थी.
उसके भीतर एक हल्का- सा संबंध था.
जैसे दोनों के बीच कोई अदृश्य धागा बन गया हो.
शौर्य ने प्रणाली खोली.
बीस्ट.
नाम: नीरा.
प्रजाति: सामान्य समुद्री मछली.
स्तर: प्रारंभिक.
विकास क्षमता: उपलब्ध.
विशेष क्षमता: अज्ञात.
शौर्य ने आखिरी पंक्ति दोबारा पढी.
विशेष क्षमता अज्ञात।
उसने नीरा की तरफ देखा.
तो तुम्हारे अंदर कुछ है।
नीरा ने कोई उत्तर नहीं दिया.
वह बस पानी में धीरे- धीरे घूमती रही.
शौर्य कुछ देर वहीं बैठा रहा.
उसके मन में अब एक नया उत्साह था.
लेकिन उसने खुद को तुरंत रोक लिया.
उसे पता था कि सिर्फ बंधन हो जाने से नीरा शक्तिशाली नहीं बन जाएगी.
उसे प्रशिक्षण देना होगा.
ऊर्जा देनी होगी.
और शायद विकसित भी करना होगा.
उसने प्रणाली में विकास विकल्प खोला.
विकास के लिए ऊर्जा आवश्यक.
वर्तमान ऊर्जा पर्याप्त नहीं.
शौर्य ने हल्की सांस छोडी.
अभी नहीं।
उसने नीरा को समुद्र में छोड दिया.
लेकिन बंधन टूट नहीं गया.
वह उसे महसूस कर सकता था.
कुछ दूरी तक जाने के बाद भी.
यह अनुभव उसके लिए नया था.
वह कुछ देर तक चुप बैठा रहा.
फिर उसे महसूस हुआ कि नीरा अचानक बेचैन हो गई है.
शौर्य तुरंत सतर्क हुआ.
क्या हुआ?
नीरा तेज गति से एक दिशा में तैरने लगी.
शौर्य ने प्रणाली सक्रिय की.
बीस्ट भावनात्मक संकेत.
डर.
शौर्य का चेहरा गंभीर हो गया.
उसने समुद्र की तरफ देखा.
कुछ भी दिखाई नहीं दे रहा था.
लेकिन नीरा की बेचैनी बढ रही थी.
फिर शौर्य ने भी कुछ महसूस किया.
बहुत दूर से आती भारी ऊर्जा.
वही ऊर्जा.
जो उसने पहले कई बार महसूस की थी.
दक्षिण- पश्चिम.
शौर्य ने तुरंत नीरा को वापस बुलाया.
नीरा तेजी से उसकी तरफ आई.
उसने हाथ पानी में डाला.
नीरा उसकी हथेली के पास आ गई.
शौर्य ने उसे धीरे से उठाया नहीं.
बस पानी में हाथ स्थिर रखा.
कुछ क्षण बाद ऊर्जा की वह भारी लहर फिर महसूस हुई.
इस बार पहले से ज्यादा स्पष्ट.
शौर्य का चेहरा बदल गया.
वह अब केवल एक ऊर्जा स्रोत नहीं थी.
उसमें चेतना थी.
और शायद वह उसे महसूस कर रही थी.
शौर्य ने धीरे से कहा.
तुम्हें भी यह महसूस हो रहा है?
नीरा की गति धीमी हो गई.
शौर्य ने पहली बार अपने बीस्ट के साथ उस अदृश्य संबंध की शक्ति समझी.
वह नीरा की भावनाओं को महसूस कर सकता था.
और नीरा शायद उसके आसपास की कुछ चीजों को महसूस कर सकती थी.
यह केवल ऊर्जा का संबंध नहीं था.
यह विश्वास का आरंभ था.
शौर्य ने समुद्र से हाथ बाहर निकाला.
नीरा पानी में उसके पास घूमती रही.
कुछ देर बाद वह घर की तरफ लौट गया.
लेकिन आज उसके कदम पहले से अलग थे.
उसके पास अब केवल एक प्रणाली नहीं थी.
उसके पास एक साथी था.
घर पहुँचते ही अनन्या ने उसे दरवाजे पर रोक लिया.
आप कहाँ थे?
शौर्य ने कहा, समुद्र के पास।
अनन्या ने भौंहें सिकोड लीं.
आप रोज समुद्र क्यों जाने लगे हैं?
शौर्य ने जवाब देने से पहले एक पल सोचा.
वहाँ मुझे शांति मिलती है।
अनन्या ने उसे कुछ सेकंड देखा.
फिर बोली, बस ध्यान रखना।
रखूँगा।
शौर्य अंदर चला गया.
अनन्या ने उसकी तरफ देखा.
उसे शायद अंदाजा नहीं था कि उसका भाई अब कितना बडा रहस्य अपने भीतर छिपा रहा था.
उस दिन शौर्य ने Collage नहीं छोडा.
वह सामान्य रूप से अपनी कक्षाओं में गया.
लेकिन बीच- बीच में उसे नीरा की मौजूदगी महसूस होती रही.
वह समुद्र के पास थी.
बहुत दूर नहीं.
शौर्य को यह एहसास अजीब तरह से अच्छा लग रहा था.
जैसे वह पहली बार पूरी तरह अकेला नहीं था.
दोपहर में राघव उसके पास आया.
आज शाम काम पर आएगा?
शौर्य ने कहा, हाँ।
राघव ने पूछा, तू कुछ दिनों से बहुत बदल गया है।
शौर्य हँसा.
कैसे?
पहले हर समय परेशान रहता था. अब पता नहीं क्या सोचता रहता है।
शौर्य ने कहा, शायद चीजें बदल रही हैं।
राघव ने मजाक में कहा, लॉटरी लग गई क्या?
शौर्य कुछ पल चुप रहा.
फिर मुस्कुराकर बोला, कुछ वैसा ही समझ ले।
राघव ने उसकी बात मजाक समझी.
लेकिन शौर्य जानता था कि उसकी जिंदगी सच में बदलने लगी थी.
शाम को गोदाम में काम करते समय उसने फिर वही रहस्यमयी आदमी देखा.
इस बार वह अकेला था.
वह दूर खडा कुछ देख रहा था.
शौर्य की नजर उससे मिली.
आदमी ने कुछ सेकंड तक उसे देखा.
फिर नजरें हटा लीं.
शौर्य के भीतर हल्की बेचैनी हुई.
उसने प्रणाली सक्रिय करने की कोशिश की.
लेकिन इस बार कोई स्पष्ट ऊर्जा संकेत नहीं आया.
जैसे वह आदमी खुद को छिपाना जानता हो.
शौर्य ने तुरंत उसकी तरफ देखना बंद कर दिया.
लेकिन वह समझ गया था.
वह आदमी साधारण नहीं था.
और शायद उसने भी शौर्य को नोटिस कर लिया था.
काम खत्म होने के बाद शौर्य जल्दी घर लौट आया.
रात को उसने नीरा के बारे में सोचा.
क्या वह उसे घर ला सकता था?
नहीं.
उसके लिए समुद्र ही उसका स्वाभाविक स्थान था.
शौर्य ने तय किया कि वह नीरा को समुद्र में ही रहने देगा.
उसे केवल तब बुलाएगा जब जरूरत हो.
यह फैसला उसे सही लगा.
फिर उसने प्रणाली में बीस्ट विकास विकल्प खोला.
नीरा का नाम सामने आया.
विकास के लिए आवश्यक ऊर्जा.
शौर्य ने संख्या देखी.
बहुत ज्यादा.
लेकिन इस बार वह निराश नहीं हुआ.
उसके पास ऊर्जा क्रिस्टल था.
और समुद्र में ऊर्जा के स्रोत भी थे.
धीरे- धीरे वह ऊर्जा जमा कर सकता था.
उसने खिडकी से समुद्र की तरफ देखा.
फिर उसकी नजर अपने कमरे में रखे कपडे के छोटे से पैकेट पर गई.
उसके भीतर ऊर्जा क्रिस्टल था.
शौर्य ने उसे उठाया.
इस बार उसने उसे सीधे हाथ में नहीं लिया.
बस सामने रखकर देखने लगा.
तुम आखिर आए कहाँ से हो?
कोई उत्तर नहीं.
लेकिन अचानक क्रिस्टल की नीली चमक थोडी तेज हुई.
शौर्य स्थिर हो गया.
उसने तुरंत प्रणाली सक्रिय की.
ऊर्जा क्रिस्टल प्रतिक्रिया दे रहा था.
दिशा.
दक्षिण- पश्चिम.
शौर्य की सांस रुक गई.
वही दिशा.
वही रहस्यमयी ऊर्जा.
वही अज्ञात बीस्ट.
उसने क्रिस्टल को कपडे में लपेट दिया.
अब वह निश्चित था कि ये घटनाएँ अलग- अलग नहीं थीं.
ऊर्जा क्रिस्टल.
अज्ञात बीस्ट.
प्रणाली.
और शायद वह पुराना समुद्री रहस्य.
सब एक ही कहानी के हिस्से थे.
लेकिन वह कहानी क्या थी?
उसके पास अभी कोई जवाब नहीं था.
अगली सुबह शौर्य ने नीरा को बुलाया.
वह समुद्र के किनारे बैठा था.
कुछ ही क्षण में पानी में हल्की लहर हुई.
नीरा उसकी तरफ तैरती हुई आई.
शौर्य मुस्कुराया.
तुम्हें एक काम करना है।
नीरा उसके आसपास घूमने लगी.
शौर्य ने अपनी हथेली पानी में डाली.
उसे अचानक एक दिशा महसूस हुई.
दक्षिण- पश्चिम.
लेकिन इस बार उस दिशा में केवल विशाल ऊर्जा नहीं थी.
उसे कुछ और महसूस हुआ.
एक रास्ता.
जैसे समुद्र के भीतर किसी जगह तक जाने वाली प्राकृतिक धारा.
शौर्य ने आँखें बंद कीं.
नीरा की भावनाएँ उसके भीतर हल्की- सी दिखाई दीं.
डर.
लेकिन उसके साथ जिज्ञासा भी.
शौर्य ने आँखें खोलीं.
तुम भी वहाँ जाना चाहती हो?
नीरा कुछ क्षण उसके सामने तैरती रही.
फिर दक्षिण- पश्चिम की तरफ चली गई.
शौर्य ने गहरी सांस ली.
अब उसे निर्णय लेना था.
वह अभी उस रहस्यमयी जगह तक जाने के लिए तैयार नहीं था.
लेकिन उसे यह भी पता था कि वह हमेशा उससे दूर नहीं रह सकता.
उसने अपनी मुट्ठी बंद की.
पहले अपनी शक्ति बढानी होगी.
नीरा को मजबूत करना होगा.
और समुद्र के बारे में जितना संभव हो उतना जानना होगा.
वह उठ खडा हुआ.
समुद्र की तरफ देखा.
एक दिन।
उसने बहुत धीमी आवाज में कहा.
लेकिन अभी नहीं।
वह मुडा और घर की ओर चल पडा.
उसे नहीं पता था कि उसी समय दक्षिण- पश्चिमी समुद्री क्षेत्र में कुछ बदल रहा था.
समुद्र के नीचे एक विशाल पत्थर के पास नीली रोशनी फैल रही थी.
उस रोशनी के बीच वही प्राचीन चिन्ह था.
लेकिन इस बार उसके आसपास कुछ नए निशान चमक रहे थे.
एक.
दो.
तीन.
कुल सात.
जैसे किसी प्राचीन व्यवस्था में सात स्थान हों.
और उनमें से पहला स्थान अब प्रकाशित हो चुका था.
बहुत दूर उस गहराई में एक आवाज गूँजी.
पहला बंधन स्थापित हो चुका है।
दूसरी आवाज आई.
धारक अभी कमजोर है।
कुछ पल शांति रही.
फिर पहली आवाज ने कहा.
कमजोरी ही उसकी परीक्षा है।
समुद्र फिर शांत हो गया.
उधर शौर्य अपने छोटे- से घर में वापस पहुँच चुका था.
उसके पास न कोई बडी संपत्ति थी.
न कोई शक्तिशाली हथियार.
न कोई गुरु.
न कोई ऐसा व्यक्ति जो उसे बता सके कि आगे क्या करना है.
उसके पास केवल एक रहस्यमयी प्रणाली थी.
एक छोटा बीस्ट.
एक ऊर्जा क्रिस्टल.
और समुद्र से जुडा एक अनसुलझा रहस्य.
लेकिन यही उसकी शुरुआत थी.
और इस बार वह अकेला नहीं था.
समुद्र के भीतर कहीं नीरा तैर रही थी.
उसके साथ एक नया बंधन था.
बहुत छोटा.
बहुत कमजोर.
लेकिन वास्तविक.
और शायद किसी महान शक्ति की शुरुआत हमेशा ऐसी ही होती है.
बहुत छोटे कदम से.
बहुत धीमी गति से.
लेकिन बिना पीछे हटे.