Chapter 4 of 30
शक्ति की पहली सीढ़ी
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अगली सुबह सागरपुर में सूरज सामान्य दिनों की तरह ही निकला था.
समुद्र के ऊपर हल्की धुंध थी.
रात की बारिश के बाद सडकें गीली थीं और जगह- जगह पानी की छोटी- छोटी धारियाँ जमा थीं. दुकानदार अपनी दुकानें खोलने लगे थे. मछुआरे अपनी नावों से लौट रहे थे. कुछ लोग समुद्र किनारे खडे होकर सुबह की ठंडी हवा का आनंद ले रहे थे.
शहर के लिए यह एक बिल्कुल सामान्य सुबह थी.
लेकिन शौर्य के लिए नहीं.
उसके लिए पिछले कुछ दिनों में दुनिया बदल गई थी.
बहुत धीरे.
इतनी धीरे कि अगर कोई बाहर से उसे देखता, तो उसे शौर्य में कोई बदलाव दिखाई नहीं देता.
वह अब भी वही साधारण Collage छात्र था.
वही पुराने जूते.
वही सामान्य कपडे.
वही छोटा- सा घर.
वही जिम्मेदारियाँ.
लेकिन उसके भीतर अब एक ऐसा रहस्य था, जिसे वह किसी से साझा नहीं कर सकता था.
शौर्य उस सुबह समुद्र किनारे एक चट्टान पर बैठा था.
उसकी नजर सामने फैले पानी पर थी.
वह पिछले कुछ दिनों से लगातार एक ही काम कर रहा था.
समुद्र को देखना.
उसकी आवाज सुनना.
उसके भीतर मौजूद जीवों को महसूस करने की कोशिश करना.
और अपनी नई शक्ति को समझना.
लेकिन जितना वह समझने की कोशिश करता, उतना ही उसे महसूस होता कि वह अभी समुद्र की दुनिया के बारे में लगभग कुछ नहीं जानता.
उसने आँखें बंद कर लीं.
कुछ क्षण तक केवल सांसों पर ध्यान दिया.
धीरे- धीरे उसके आसपास की आवाजें कम महसूस होने लगीं.
लहरों की आवाज अलग हो गई.
हवा की आवाज अलग.
दूर जाती नाव की आवाज अलग.
और फिर.
उसे कुछ और महसूस हुआ.
एक हल्की- सी ऊर्जा.
उसने आँखें खोलीं.
उसके सामने समुद्र की सतह पर तीन छोटी मछलियाँ तैर रही थीं.
शौर्य उन्हें देखने लगा.
उसने पिछले कुछ दिनों में सीखा था कि हर जीव से मिलने वाली ऊर्जा समान नहीं होती.
छोटी मछलियों से मिलने वाली ऊर्जा बहुत कम थी.
लेकिन यह शुरुआत थी.
उसने हाथ धीरे से पानी में डाला.
एक मछली उसके हाथ के पास से गुजरी.
नीली रोशनी की हल्की चमक हुई.
ऊर्जा प्राप्त.
शौर्य ने अपने हाथ को पानी से बाहर निकाल लिया.
उसने अपनी हथेली को देखा.
कोई बदलाव नहीं था.
लेकिन भीतर कहीं एक छोटी- सी गर्माहट महसूस हो रही थी.
उसने दूसरी मछली की तरफ देखा.
फिर तीसरी की तरफ.
उसने उन्हें पकडने की कोशिश नहीं की.
उसे अब समझ आ गया था कि प्रणाली को किसी जीव को नुकसान पहुँचाना जरूरी नहीं था.
संपर्क पर्याप्त था.
कम से कम छोटी मात्रा में ऊर्जा प्राप्त करने के लिए.
शौर्य ने कुछ देर तक यही किया.
एक मछली.
फिर दूसरी.
फिर तीसरी.
हर बार बहुत थोडी ऊर्जा.
लेकिन हर बार उसके भीतर एक हल्का बदलाव.
कुछ देर बाद प्रणाली फिर दिखाई दी.
आदिम बीस्ट साधना प्रणाली.
धारक: शौर्य.
वर्तमान स्तर: प्रारंभिक.
ऊर्जा संचय: निम्न.
शौर्य ने ध्यान से देखा.
वह संख्या पहले से थोडी बढी हुई थी.
बहुत ज्यादा नहीं.
लेकिन बढी थी.
उसके चेहरे पर हल्की मुस्कान आई.
वह कई मिनट तक उसी स्क्रीन को देखता रहा.
फिर उसने धीरे से कहा, तो यह सच में काम करता है।
इस बार कोई उत्तर नहीं आया.
शौर्य ने प्रणाली बंद कर दी.
वह कुछ देर चुप बैठा रहा.
उसके मन में एक विचार आया.
अगर छोटी मछलियों से थोडी ऊर्जा मिल रही है, तो किसी बडे समुद्री जीव से कितनी ऊर्जा मिलेगी?
विचार आते ही उसके भीतर उत्साह पैदा हुआ.
लेकिन उसी के साथ उसे पिछली शाम दिखाई दी वह विशाल छाया भी याद आ गई.
वह तुरंत शांत हो गया.
शक्ति बढाने की जल्दी में गलती करना ठीक नहीं होगा.
उसे अभी अपनी सीमाएँ नहीं पता थीं.
उसे यह भी नहीं पता था कि समुद्र में कौन- सा जीव उसके लिए सुरक्षित है और कौन- सा नहीं.
इसलिए उसने फैसला किया कि वह धीरे- धीरे आगे बढेगा.
पहले छोटे जीव.
फिर थोडे बडे.
और जब उसे अपनी शक्ति पर भरोसा हो जाए, तभी कुछ बडा करने की कोशिश करेगा.
यह फैसला साधारण था.
लेकिन शायद यही उसकी पहली समझदारी थी.
शौर्य उठकर घर की तरफ चल पडा.
रास्ते में उसे एक छोटी- सी मछली बाजार की दुकान दिखाई दी.
वहाँ कई तरह की मछलियाँ रखी थीं.
कुछ ताजी थीं.
कुछ बर्फ पर रखी हुई थीं.
कुछ अभी जीवित थीं और पानी से भरे बडे डिब्बों में तैर रही थीं.
शौर्य अचानक रुक गया.
उसकी नजर उन डिब्बों पर टिक गई.
अगर वह किसी समुद्री जीव से ऊर्जा प्राप्त कर सकता था, तो शायद जीवित मछलियों के पास जाकर प्रणाली का परीक्षण करना आसान होगा.
लेकिन उसके पास पैसे नहीं थे.
और वह किसी की मछली बिना अनुमति नहीं ले सकता था.
वह आगे बढ गया.
कुछ कदम चलने के बाद उसे अपने विचार पर खुद ही हँसी आई.
कल तक वह नौकरी और फीस की चिंता कर रहा था.
आज वह समुद्री जीवों की ऊर्जा के बारे में सोच रहा था.
जिंदगी कितनी जल्दी बदल सकती है.
या शायद बदलने का भ्रम भी बहुत जल्दी पैदा हो सकता है.
शौर्य ने खुद को सावधान किया.
उसे अभी यह नहीं मान लेना चाहिए कि उसके पास कोई असीम शक्ति है.
वह अभी शुरुआत में था.
बहुत नीचे.
बहुत कमजोर.
और उसकी सबसे बडी ताकत शायद यही थी कि उसे अपनी कमजोरी का पता था.
घर पहुँचते ही अनन्या ने उसे आवाज दी.
भैया।
शौर्य अंदर आया.
हाँ?
अनन्या मेज पर बैठी अपनी किताबें खोल रही थी.
आज Collage कितने बजे जाना है?
दस बजे।
और उससे पहले?
कुछ काम है।
अनन्या ने उसे देखा.
फिर काम?
शौर्य ने मुस्कुराकर कहा, काम नहीं करूँगा तो पैसे कहाँ से आएँगे?
अनन्या कुछ बोलना चाहती थी.
फिर उसने किताब बंद कर दी.
भैया, आप इतना सब अकेले क्यों करते हैं?
शौर्य उसके सामने बैठ गया.
क्योंकि करना पडता है।
लेकिन मैं भी कुछ कर सकती हूँ।
शौर्य ने सिर हिलाया.
तुम पढाई करो।
मैं बडी हो गई हूँ।
मेरे लिए नहीं।
अनन्या कुछ क्षण चुप रही.
शौर्य ने उसके चेहरे की तरफ देखा.
उसे पता था कि अनन्या धीरे- धीरे उसकी परेशानी समझने लगी है.
लेकिन वह उसे अपनी चिंता में नहीं डालना चाहता था.
उसने मेज पर रखी उसकी किताब उठाई.
परीक्षा की तैयारी कैसी है?
अनन्या ने लंबी सांस ली.
ठीक है।
ठीक है का मतलब?
अच्छी है।
अच्छी है का मतलब?
अनन्या हँस पडी.
बहुत अच्छी है।
शौर्य भी मुस्कुरा दिया.
कुछ पल के लिए घर का वातावरण हल्का हो गया.
फिर शौर्य की नजर दीवार पर टंगी एक पुरानी तस्वीर पर चली गई.
उस तस्वीर में वह बहुत छोटा था.
उसके साथ उसके माता- पिता थे.
तस्वीर के नीचे दादी खडी थीं.
शौर्य कुछ सेकंड तक तस्वीर को देखता रहा.
अनन्या ने भी तस्वीर की तरफ देखा.
दोनों कुछ नहीं बोले.
कुछ यादें ऐसी होती हैं जिनके लिए शब्दों की जरूरत नहीं पडती.
शौर्य उठ गया.
मैं चलता हूँ।
अनन्या ने पूछा, आज शाम को जल्दी आओगे?
शौर्य ने कुछ सोचकर कहा, कोशिश करूँगा।
अनन्या ने सिर हिलाया.
ठीक है।
शौर्य बाहर निकल गया.
Collage जाने से पहले वह एक बार फिर समुद्र किनारे रुक गया.
आज उसका उद्देश्य अलग था.
वह समुद्र को केवल देखने नहीं आया था.
वह प्रयोग करने आया था.
किनारे से थोडा दूर उसे एक छोटी नाव दिखाई दी.
एक बूढा मछुआरा उसमें जाल ठीक कर रहा था.
शौर्य उसे पहचानता था.
वह अक्सर इसी जगह दिखाई देता था.
शौर्य उसके पास गया.
काका।
बूढे मछुआरे ने सिर उठाया.
हाँ?
आज समुद्र कैसा है?
बूढे ने कुछ क्षण समुद्र की तरफ देखा.
फिर बोला, ऊपर से शांत है।
शौर्य ने पूछा, और नीचे?
मछुआरा उसकी तरफ देखने लगा.
उसकी आँखों में एक पल के लिए अजीब- सी चमक आई.
नीचे कभी कुछ शांत नहीं होता।
शौर्य चुप हो गया.
मछुआरा फिर जाल ठीक करने लगा.
शौर्य ने पूछा, आपको कैसे पता?
बूढे ने हल्की मुस्कान दी.
समुद्र के साथ बहुत साल बिताओगे तो समझ जाओगे।
शौर्य ने समुद्र की तरफ देखा.
क्या कभी ऐसा हुआ है कि समुद्र में कुछ बहुत बडा देखा हो?
मछुआरे के हाथ अचानक रुक गए.
कुछ क्षण वह बिल्कुल शांत रहा.
फिर बोला, बहुत कुछ देखा है।
कैसा?
जो देखा, उसके बारे में हर किसी को बताना जरूरी नहीं।
शौर्य उसकी तरफ देखने लगा.
मछुआरे ने फिर अपना जाल उठाया.
तुम Collage के लडके हो. पढाई करो. समुद्र को जितना दूर से समझो, उतना अच्छा है।
शौर्य ने मुस्कुराकर कहा, लेकिन अगर समुद्र खुद बुलाए तो?
बूढे ने उसकी तरफ देखा.
इस बार उसके चेहरे की मुस्कान गायब थी.
समुद्र किसी को नहीं बुलाता।
वह कुछ क्षण रुका.
फिर बहुत धीमी आवाज में बोला.
अगर तुम्हें कभी लगे कि वह तुम्हें बुला रहा है, तो पीछे मुड जाना।
शौर्य कुछ कह नहीं पाया.
मछुआरा फिर अपने काम में लग गया.
शौर्य धीरे- धीरे वहाँ से हट गया.
उसके कदम चलते रहे.
लेकिन दिमाग में वही आखिरी वाक्य घूमता रहा.
अगर तुम्हें कभी लगे कि समुद्र तुम्हें बुला रहा है, तो पीछे मुड जाना.
शौर्य ने समुद्र की तरफ देखा.
लहरें सामान्य थीं.
फिर भी उसके भीतर एक अजीब बेचैनी पैदा हो गई.
उसे पिछली रात की नीली रोशनी याद आ गई.
वह रोशनी जिसने उसे समुद्र की गहराई में खींचा था.
और वह आवाज.
उत्तराधिकारी.
शौर्य ने तुरंत सिर झटक दिया.
उसे Collage जाना था.
वह आगे बढ गया.
लेकिन अब समुद्र उसके लिए पहले जैसा नहीं था.
उसमें एक सवाल छिपा था.
और उस सवाल का जवाब शायद उसकी जिंदगी बदलने वाला था.
Collage में उस दिन उसकी कई कक्षाएँ थीं.
वह नोट्स लिखता रहा.
लेकिन बीच- बीच में उसका ध्यान भटक जाता.
प्रोफेसर बोर्ड पर कुछ समझा रहे थे.
शौर्य लिख रहा था.
फिर अचानक उसके सामने समुद्र की तस्वीर आ जाती.
कभी वह नीली रोशनी देखता.
कभी वह विशाल छाया.
कभी वह प्रणाली.
और कभी अनन्या.
उसे खुद समझ नहीं आ रहा था कि इन सब चीजों को एक साथ कैसे संभाले.
दोपहर के बाद राघव फिर उसके पास आया.
आज शाम गोदाम आ रहे हो?
शौर्य ने कहा, हाँ।
पक्का?
पक्का।
राघव ने उसे ध्यान से देखा.
तू कुछ छिपा रहा है।
शौर्य ने उसकी तरफ देखा.
क्या?
पता नहीं. लेकिन कुछ है।
शौर्य हँस दिया.
कुछ नहीं है।
राघव ने सिर हिलाया.
ठीक है।
फिर वह चला गया.
शौर्य ने राहत की सांस ली.
वह राघव से झूठ बोलना नहीं चाहता था.
लेकिन वह अभी किसी को यह बात नहीं बता सकता था.
शाम को दोनों गोदाम पहुँचे.
काम पहले से ज्यादा था.
बडी नावों से सामान उतर रहा था.
कुछ लोग बर्फ के बडे डिब्बे उठा रहे थे.
कुछ समुद्री जीवों को अलग कर रहे थे.
शौर्य सामान उठाते हुए एक बडे पानी के टैंक के पास से गुजरा.
उसकी नजर अचानक भीतर चली गई.
एक बडी मछली वहाँ तैर रही थी.
वह बाकी मछलियों से अलग थी.
उसका शरीर लंबा था.
पंखों पर हल्की चमक थी.
और उसके आसपास पानी में हल्की ऊर्जा जैसी अनुभूति हो रही थी.
शौर्य रुक गया.
उसका शरीर अपने आप स्थिर हो गया.
प्रणाली सक्रिय हो गई.
उसके सामने संदेश आया.
उच्च ऊर्जा वाला जीव.
शौर्य ने तुरंत चारों तरफ देखा.
कोई उसकी तरफ नहीं देख रहा था.
उसने एक कदम टैंक के करीब बढाया.
मछली उसकी तरफ घूमी.
दोनों की नजरें जैसे एक- दूसरे से मिलीं.
शौर्य को अपने सीने में हल्की गर्माहट महसूस हुई.
उसने मन ही मन पूछा.
क्या मैं इसकी ऊर्जा ले सकता हूँ?
प्रणाली शांत रही.
फिर एक संदेश आया.
संपर्क संभव.
लेकिन जोखिम अज्ञात.
शौर्य पीछे हट गया.
अभी नहीं.
वह इस जगह पर प्रयोग नहीं करेगा.
बहुत सारे लोग आसपास थे.
अगर कुछ गलत हुआ तो?
उसने काम खत्म किया.
पैसे लिए.
और घर लौट आया.
रात को वह देर तक सोचता रहा.
वह मछली सामान्य नहीं थी.
उसे यकीन था.
लेकिन उसे यह भी समझ आ गया था कि शक्ति के साथ सावधानी जरूरी है.
अगली सुबह वह समुद्र के एक सुनसान हिस्से में गया.
वहाँ कोई नहीं था.
किनारे पर चट्टानों के बीच पानी जमा था.
छोटे- छोटे जीव वहाँ घूम रहे थे.
शौर्य ने एक केकडे जैसे जीव को देखा.
उसने पहले उसे महसूस किया.
फिर धीरे से हाथ उसके पास ले गया.
प्रणाली सक्रिय हुई.
ऊर्जा प्राप्त.
इस बार ऊर्जा पहले की मछलियों से थोडी ज्यादा थी.
शौर्य ने तुरंत प्रणाली खोली.
ऊर्जा संचय बढ गया था.
वह मुस्कुराया.
धीरे- धीरे।
उसने कई और छोटे जीवों के साथ यही किया.
हर बार थोडी ऊर्जा.
हर बार थोडा अभ्यास.
और हर बार प्रणाली की प्रतिक्रिया पहले से अधिक स्पष्ट.
कुछ देर बाद उसके सामने एक नई सूचना दिखाई दी.
विकास सीमा के निकट.
शौर्य ने चौंककर स्क्रीन देखी.
विकास?
प्रणाली ने कोई उत्तर नहीं दिया.
लेकिन उसके सामने एक छोटी मछली का संकेत उभरा.
शौर्य समझ गया.
अगर वह पर्याप्त ऊर्जा जमा कर ले, तो वह किसी छोटे समुद्री जीव का विकास कर सकता है.
उसने पहली बार कल्पना की.
एक साधारण मछली.
फिर वही मछली एक दुर्लभ प्रजाति बन जाए.
अगर ऐसा हुआ तो उसका मूल्य कितना होगा?
क्या वह इसे बेच सकता है?
क्या इससे वह पैसे कमा सकता है?
क्या वह अनन्या की फीस चुका सकता है?
क्या वह घर का किराया समय पर दे सकता है?
उसका दिमाग तेजी से चलने लगा.
लेकिन फिर उसने खुद को रोका.
वह अभी अनुमान लगा रहा था.
उसे पहले एक जीव को विकसित करना होगा.
उसने अगले कई घंटों तक ऊर्जा जमा की.
दोपहर होते- होते उसकी ऊर्जा पहली सीमा के करीब पहुँच गई.
शौर्य ने एक छोटी मछली को चुना.
वह बहुत सामान्य थी.
ऐसी मछली जिसे बाजार में शायद बहुत कम कीमत मिलती.
उसने हाथ पानी में डाला.
मछली उसके आसपास घूमने लगी.
शौर्य ने प्रणाली को सक्रिय किया.
विकास प्रक्रिया शुरू करने की अनुमति दें?
शौर्य का दिल तेज धडकने लगा.
उसने धीरे से कहा.
हाँ।
कुछ नहीं हुआ.
फिर पानी के भीतर हल्की नीली रोशनी फैलने लगी.
मछली अचानक स्थिर हो गई.
उसके आसपास छोटे- छोटे प्रकाश कण बनने लगे.
शौर्य ने सांस रोक ली.
रोशनी कुछ सेकंड तक बढती रही.
फिर अचानक सब शांत हो गया.
मछली पानी में फिर तैरने लगी.
शौर्य ने उसे ध्यान से देखा.
पहली नजर में कुछ अलग नहीं लगा.
फिर उसकी नजर उसके पंखों पर गई.
वे पहले से थोडे बडे थे.
उसके शरीर पर हल्की चांदी जैसी चमक थी.
शौर्य ने प्रणाली सक्रिय की.
विकास सफल.
साधारण समुद्री मछली से विकसित प्रजाति.
शौर्य कुछ सेकंड तक बिल्कुल शांत रहा.
फिर उसके चेहरे पर मुस्कान फैल गई.
उसने धीरे से कहा.
मैंने कर लिया।
उसके सामने कोई बडा चमत्कार नहीं हुआ था.
न कोई विस्फोट.
न कोई आकाश बदल गया.
लेकिन उसके लिए यह बहुत बडा क्षण था.
उसने एक सामान्य जीव को बदल दिया था.
सिर्फ अपनी शक्ति से.
वह मछली कुछ देर तक उसके आसपास घूमती रही.
शौर्य ने उसे पकडने की कोशिश नहीं की.
वह केवल उसे देखता रहा.
उसके मन में एक नई संभावना पैदा हो चुकी थी.
शायद वह इस शक्ति का इस्तेमाल केवल अपने लिए नहीं करेगा.
शायद वह इस शक्ति से अपनी जिंदगी बदल सकता है.
लेकिन उसी समय उसे एक और बात महसूस हुई.
समुद्र की तरफ से कोई भारी कंपन आ रही थी.
बहुत हल्की.
इतनी हल्की कि सामान्य इंसान उसे महसूस नहीं कर सकता था.
लेकिन शौर्य कर सकता था.
उसने धीरे- धीरे सिर उठाया.
दूर समुद्र की सतह पर कोई हलचल नहीं थी.
फिर भी उसकी प्रणाली ने तुरंत प्रतिक्रिया दी.
अज्ञात ऊर्जा संकेत.
दिशा.
दक्षिण- पश्चिम.
शौर्य का चेहरा गंभीर हो गया.
उसने समुद्र की तरफ देखा.
दूर तक केवल पानी था.
कुछ नहीं.
लेकिन उसके भीतर अब वह पुरानी बेचैनी लौट आई थी.
वही एहसास जो उसे पहली रात हुआ था.
जैसे समुद्र के नीचे कोई उसे देख रहा हो.
शौर्य ने कुछ कदम पीछे हटाए.
उसने प्रणाली बंद कर दी.
फिर एक बार समुद्र की तरफ देखा.
अभी नहीं।
उसने धीरे से कहा.
वह जानता था कि वह अभी बहुत कमजोर है.
उसके पास केवल शुरुआत भर की शक्ति थी.
लेकिन अब उसके सामने एक रास्ता था.
और रास्ते का पहला कदम उसने उठा लिया था.
उस शाम शौर्य बाजार गया.
उसने विकसित मछली को सावधानी से एक छोटे कंटेनर में रखा.
वह सीधे किसी बडे व्यापारी के पास नहीं गया.
वह पहले एक छोटी दुकान पर रुका.
दुकानदार ने मछली को देखा.
कुछ देर तक ध्यान से देखने के बाद उसने पूछा, यह कहाँ से मिली?
शौर्य ने सहजता से कहा, समुद्र से।
दुकानदार ने मछली को फिर देखा.
अजीब है।
क्या?
इसकी बनावट सामान्य नहीं है।
शौर्य चुप रहा.
दुकानदार ने कुछ रकम बताई.
शौर्य ने सोचा.
फिर सौदा कर लिया.
रकम बहुत बडी नहीं थी.
लेकिन उसके हाथ में पैसे आते ही उसे पहली बार लगा कि प्रणाली सच में उसके जीवन को बदल सकती है.
वह दुकान से बाहर निकला.
सडक पर चलते हुए उसने पैसे जेब में रखे.
उसे याद आया कि अगले सप्ताह अनन्या की फीस जमा करनी है.
उसने पैसे गिने.
फिर अपने पुराने पैसे जोडे.
अभी भी कमी थी.
लेकिन पहले जितनी नहीं.
शौर्य की चाल थोडी तेज हो गई.
वह घर की तरफ चल पडा.
उसे पता नहीं था कि आने वाले दिनों में यही छोटी- सी मछली उसकी जिंदगी में कितनी बडी हलचल पैदा करने वाली थी.
उसे यह भी नहीं पता था कि समुद्र की गहराई में मौजूद शक्तियाँ अब उसके बारे में जानना शुरू कर चुकी थीं.
और सबसे बडी बात.
उसने अभी केवल एक साधारण जीव को विकसित किया था.
लेकिन उसके सामने मौजूद असली शक्ति की सीमा अभी बहुत दूर थी.
उस रात शौर्य ने अपने कमरे की खिडकी खोली.
दूर समुद्र दिखाई दे रहा था.
चाँद की हल्की रोशनी पानी पर पड रही थी.
उसने आँखें बंद कीं.
प्रणाली उसके सामने दिखाई दी.
ऊर्जा पहले से ज्यादा थी.
विकास क्षमता सक्रिय थी.
और उसके नीचे एक नया विकल्प धुंधला- सा चमक रहा था.
बीस्ट बंधन.
शौर्य कुछ देर तक उस शब्द को देखता रहा.
उसने उसे छुआ नहीं.
अभी नहीं.
क्योंकि उसे पहली बार महसूस हो रहा था कि यह शक्ति केवल पैसे कमाने का साधन नहीं थी.
यह उसे एक ऐसी दुनिया की तरफ ले जा रही थी, जहाँ जीव केवल जीव नहीं थे.
जहाँ शक्ति केवल मनुष्यों के पास नहीं थी.
और जहाँ समुद्र की गहराई में शायद ऐसे प्राणी मौजूद थे, जिनके सामने आज की उसकी छोटी- सी शक्ति कुछ भी नहीं थी.
शौर्य ने खिडकी बंद कर दी.
लेकिन सोने से पहले उसने एक आखिरी बार समुद्र की तरफ देखा.
दूर अंधेरे पानी में कुछ पल के लिए नीली रोशनी चमकी.
फिर गायब हो गई.
शौर्य उसे देख नहीं पाया.
लेकिन समुद्र की गहराई में उसी समय कुछ बदल रहा था.
बहुत दूर.
बहुत नीचे.
जहाँ सूर्य की रोशनी भी नहीं पहुँचती थी.
एक विशाल जीव ने अपनी आँखें खोलीं.
उसकी आँखों में हल्की नीली चमक थी.
उसने धीरे- धीरे अपना सिर उठाया.
समुद्र की धाराएँ उसके चारों तरफ बदलने लगीं.
और फिर एक बहुत धीमी कंपन पूरे पानी में फैल गई.
जैसे समुद्र ने किसी नए अस्तित्व को पहचान लिया हो.
शौर्य अभी अपने छोटे- से कमरे में सोने की कोशिश कर रहा था.
उसे नहीं पता था कि उसकी पहली छोटी सफलता ने समुद्र के किसी बहुत पुराने रहस्य को भी जगा दिया है.
लेकिन उसकी कहानी अभी सच में शुरू भी नहीं हुई थी.