Chapter 3 of 30

पहली ऊर्जा

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सुबह का समुद्र रात से बिल्कुल अलग दिखाई दे रहा था. रात में वही समुद्र शौर्य को किसी अंधी, अनजान शक्ति की तरह लगा था. उसकी काली लहरें, तेज हवा और लगातार बरसता पानी उसे निगल लेने के लिए तैयार किसी विशाल जीव जैसे लग रहे थे. लेकिन सुबह की हल्की रोशनी में समुद्र शांत था. उसकी सतह पर सूरज की पहली किरणें बिखर रही थीं. लहरें धीरे- धीरे किनारे तक आतीं, रेत को छूतीं और फिर वापस लौट जातीं. जैसे रात को कुछ हुआ ही न हो. शौर्य काफी देर से वहीं बैठा था. उसकी नजर पानी पर थी. उसके सामने वही छोटी- सी मछली कुछ दूरी पर तैर रही थी. वह कभी दाईं तरफ जाती. फिर अचानक मुडकर बाईं ओर चली जाती. कुछ क्षण बाद दूसरी मछलियाँ भी उसके आसपास आ जातीं. शौर्य उन्हें देखता रहा. उसके भीतर एक अजीब- सी बेचैनी थी. कल रात उसने जो कुछ देखा था, वह अभी तक उसकी समझ से बाहर था. लेकिन अब उसके सामने एक बात स्पष्ट थी. उसके भीतर वास्तव में कोई शक्ति आ चुकी थी. या कम से कम ऐसा कुछ, जिसे वह शक्ति कह सकता था. उसने अपनी हथेली पानी के ऊपर रखी. कुछ नहीं हुआ. उसने आँखें बंद कीं. कुछ सेकंड तक केवल समुद्र की आवाज सुनी. लहरों की हल्की आवाज. हवा की सरसराहट. दूर किसी नाव के इंजन की धीमी आवाज. और फिर. वही नीली चमक. उसके सामने एक पारदर्शी परत उभर आई. आदिम बीस्ट साधना प्रणाली. शौर्य ने ध्यान से देखा. इस बार उसे केवल नाम नहीं दिखाई दे रहा था. नीचे कुछ और शब्द भी थे. धारक. स्तर. ऊर्जा. बीस्ट क्षमता. बंधन क्षमता. शौर्य की भौंहें सिकुड गईं. कल रात सब कुछ इतनी तेजी से हुआ था कि वह ठीक से समझ ही नहीं पाया था. आज वह जल्दबाजी नहीं करना चाहता था. उसने मन ही मन सोचा. प्रणाली. कुछ नहीं हुआ. उसने दोबारा सोचा. प्रणाली खोलो. नीली रोशनी थोडी तेज हो गई. शौर्य की आँखें फैल गईं. तो मेरी बात समझ सकती हो। इस बार भी कोई आवाज नहीं आई. लेकिन स्क्रीन पर एक छोटा- सा बदलाव हुआ. धारक की मानसिक इच्छा के अनुसार प्रणाली सक्रिय है. शौर्य ने धीरे से सिर हिलाया. ठीक है। उसने सामने पानी में तैर रही छोटी मछली को देखा. इससे ऊर्जा कैसे मिलेगी? कुछ क्षण कोई प्रतिक्रिया नहीं हुई. फिर एक नई पंक्ति दिखाई दी. उपयुक्त जीव के संपर्क से ऊर्जा संग्रह संभव. शौर्य ने उस वाक्य को दोबारा पढा. फिर मछली की तरफ देखा. वह उसके काफी करीब आ चुकी थी. शौर्य ने अपना हाथ पानी में डाल दिया. मछली तुरंत थोडा पीछे हट गई. वह कुछ क्षण रुकी. फिर धीरे- धीरे वापस उसके हाथ के पास आ गई. शौर्य ने हाथ स्थिर रखा. उसे डर था कि अगर उसने अचानक कोई हरकत की तो मछली भाग जाएगी. कुछ सेकंड तक कुछ नहीं हुआ. फिर उसकी हथेली में हल्की गर्माहट महसूस हुई. शौर्य ने तुरंत हाथ ऊपर उठा लिया. नीली रोशनी एक पल के लिए चमकी. उसके सामने एक छोटा- सा संदेश आया. ऊर्जा प्राप्त. शौर्य कुछ क्षण उसे देखता रहा. बस इतना ही. न कोई विस्फोट. न कोई तेज रोशनी. न शरीर में कोई असहनीय शक्ति. सिर्फ एक बहुत हल्की गर्माहट. लेकिन शौर्य के लिए वह गर्माहट किसी चमत्कार से कम नहीं थी. उसने धीरे से अपनी हथेली बंद कर ली. उसके चेहरे पर अनजाने में मुस्कान आ गई. सच में। उसने पहली बार महसूस किया कि उसकी जिंदगी में कुछ ऐसा हुआ है, जिसे वह अपनी मेहनत से हासिल नहीं कर सकता था. लेकिन अगले ही पल उसके मन में एक सवाल आया. इतनी- सी ऊर्जा से होगा क्या? उसने प्रणाली की तरफ देखा. ऊर्जा स्तर अभी भी बहुत कम था. उसे अचानक समझ आया कि शक्ति मिल जाना और शक्तिशाली बन जाना दो अलग बातें हैं. उसे सीखना होगा. उसे प्रयोग करना होगा. और सबसे महत्वपूर्ण. उसे धैर्य रखना होगा. शौर्य ने आसपास देखा. समुद्र किनारे सुबह की हलचल बढने लगी थी. कुछ मछुआरे अपनी नावों की तरफ जा रहे थे. कुछ लोग दौडने आए थे. एक बूढा मछुआरा दूर खडा जाल ठीक कर रहा था. शौर्य तुरंत उठ गया. उसे नहीं चाहिए था कि कोई उसे समुद्र के किनारे अजीब हरकतें करते देखे. वह घर लौटने लगा. रास्ते में उसके कदम पहले से हल्के थे. कल तक वह अपने जीवन को लेकर निराश था. आज भी उसकी समस्याएँ वहीं थीं. घर का किराया. अनन्या की पढाई. College की फीस. कमाई की कमी. और रिया. कुछ भी नहीं बदला था. फिर भी उसे लग रहा था कि उसके पास पहली बार कोई रास्ता है. एक बहुत छोटा रास्ता. लेकिन रास्ता. घर पहुँचते- पहुँचते लगभग आठ बज चुके थे. अनन्या दरवाजे के पास खडी थी. उसके हाथ में एक कप चाय था. शौर्य को देखते ही उसने पूछा, इतनी सुबह कहाँ गए थे? शौर्य ने सहजता से कहा, समुद्र के पास। क्यों? बस ऐसे ही। अनन्या ने उसकी तरफ ध्यान से देखा. आप रात में भी समुद्र गए थे। शौर्य कुछ पल चुप रहा. कल थोडा मन खराब था। अनन्या की नजर उसके चेहरे पर टिक गई. उसे शायद रिया वाली बात समझ आ गई थी. उसने कोई सवाल नहीं किया. बस चाय आगे बढाते हुए कहा, पहले इसे पीजिए। शौर्य ने कप ले लिया. तुमने नाश्ता किया? हाँ। झूठ। अनन्या हँस पडी. आपको कैसे पता? क्योंकि तुम चाय पीते हुए नाश्ता नहीं करती। अनन्या ने मुस्कुराकर कहा, तो आज से करने लगी। शौर्य भी हल्का- सा हँसा. दोनों कुछ देर वहीं खडे रहे. घर छोटा था. लेकिन उस छोटे से घर में एक चीज हमेशा बडी थी. दोनों का एक- दूसरे पर भरोसा. शौर्य ने चाय खत्म की. फिर कमरे में जाकर कपडे बदले. उसकी जेब में रखा कागज बाहर निकला. वही छोटा कागज जो अनन्या ने सुबह उसके लिए छोडा था. भैया, खाना जरूर खा लेना। शौर्य ने उसे मेज पर रख दिया. उसे अचानक एहसास हुआ कि उसकी छोटी बहन की जरूरतें बहुत साधारण थीं. उसे कोई महंगा फोन नहीं चाहिए था. न कोई बडी गाडी. न कोई आलीशान घर. वह सिर्फ चाहती थी कि उसका भाई ठीक रहे. शौर्य ने मन ही मन तय किया. जो भी हो. जो शक्ति उसे मिली है, वह सबसे पहले अनन्या की जिंदगी बदलने के काम आएगी. लेकिन उसे अभी यह भी नहीं पता था कि वह शक्ति कितनी बडी है. College जाने से पहले उसने अपने फोन पर बैंक का बैलेंस देखा. बहुत कम पैसे थे. उसने स्क्रीन बंद कर दी. फिर अचानक उसकी नजर फोन के वॉलपेपर पर पडी. अनन्या की एक तस्वीर. वह छोटी थी. उसके हाथ में स्कूल की ट्रॉफी थी. शौर्य ने कुछ क्षण तस्वीर देखी. फिर फोन जेब में रख लिया. College में पूरा दिन सामान्य रहा. कक्षाएँ. नोट्स. शिक्षकों की आवाज. दोस्तों की बातें. लेकिन शौर्य का ध्यान बार- बार समुद्र की तरफ जा रहा था. उसे लग रहा था जैसे वह किसी ऐसे रहस्य के बारे में जान चुका है, जिसे बाकी दुनिया अभी नहीं जानती. दोपहर में राघव उसके पास आकर बैठ गया. राघव शौर्य का सबसे पुराना दोस्त था. वह शौर्य को काफी समय से जानता था. इसलिए उसके चेहरे पर हुए छोटे बदलाव भी उससे छिपते नहीं थे. उसने पूछा, आज बडे खुश लग रहे हो। शौर्य ने कहा, ऐसा कुछ नहीं है। रिया वाली बात का असर नहीं हुआ? शौर्य चुप रहा. राघव ने उसकी तरफ देखा. भाई, मैं समझता हूँ। शौर्य ने कहा, अब छोड दे। राघव ने कुछ क्षण उसे देखा. फिर सिर हिलाया. ठीक है। दोनों कुछ देर चुप रहे. राघव ने अपना बैग खोला. वैसे एक काम है। क्या? मेरे चाचा के गोदाम पर आज शाम कुछ सामान उतारना है. आदमी कम पड रहे हैं. पैसे मिल जाएंगे। शौर्य ने बिना सोचे पूछा, कितने? राघव ने रकम बताई. शौर्य ने तुरंत हाँ कर दी. उसके लिए छोटी रकम भी छोटी नहीं थी. लेकिन पूरे दिन उसके दिमाग में एक और सवाल घूमता रहा. क्या वह बीस्ट प्रणाली से पैसे कमा सकता है? यह विचार आते ही उसे खुद पर हँसी आई. वह Kiss दुनिया में पहुँच गया था? सुबह उसने एक छोटी मछली से ऊर्जा ली थी. अब वह उससे पैसे कमाने के बारे में सोच रहा था. फिर उसे याद आया. प्रणाली में बीस्ट विकास लिखा था. अगर साधारण जीवों को विकसित किया जा सकता है, तो शायद समुद्र में मिलने वाली साधारण मछलियों का मूल्य बढाया जा सकता है. लेकिन यह सिर्फ अनुमान था. उसे पहले परीक्षण करना होगा. शाम को Collage के बाद शौर्य सीधे गोदाम गया. काम कठिन था. बडे डिब्बे उठाने पडे. सामान इधर से उधर रखना पडा. कपडे पसीने से भीग गए. हाथों में दर्द होने लगा. लेकिन काम खत्म होने पर जब उसे पैसे मिले, तो उसके चेहरे पर संतोष था. वह पैसे गिनकर जेब में रख रहा था कि उसकी नजर सामने रखे एक बडे टैंक पर पडी. उसमें कुछ समुद्री मछलियाँ थीं. शौर्य की नजर वहीं टिक गई. उसके भीतर कुछ हलचल हुई. वही हल्की गर्माहट. वही एहसास. जैसे प्रणाली उन मछलियों को पहचान रही हो. उसने तुरंत अपनी नजरें हटा लीं. गोदाम में कई लोग थे. वह किसी के सामने कुछ अजीब नहीं करना चाहता था. काम खत्म करके वह घर जाने के बजाय फिर समुद्र की तरफ निकल गया. आज मौसम साफ था. सूरज ढल चुका था. आसमान नारंगी से धीरे- धीरे नीला हो रहा था. शौर्य ने एक सुनसान जगह चुनी. वह रेत पर बैठ गया. कुछ देर तक समुद्र को देखता रहा. फिर उसने प्रणाली सक्रिय की. नीली रोशनी उसके सामने उभरी. इस बार उसने ध्यान से सभी विकल्प देखे. ऊर्जा. बीस्ट विकास. बीस्ट बंधन. रूपांतरण. उसने बीस्ट विकास पर ध्यान केंद्रित किया. सिस्टम ने तुरंत प्रतिक्रिया दी. विकास के लिए पर्याप्त ऊर्जा नहीं. शौर्य का चेहरा उतर गया. कितनी चाहिए? कोई संख्या दिखाई दी. वह वर्तमान ऊर्जा से कई गुना अधिक थी. शौर्य ने गहरी सांस ली. ठीक है। वह निराश नहीं हुआ. बल्कि उसे पहली बार प्रणाली के नियमों का थोडा अंदाजा हुआ. हर शक्ति की कीमत थी. और उसे वह कीमत चुकानी होगी. अगले कुछ दिनों में उसने यही करना शुरू किया. वह सुबह समुद्र के किनारे जाता. छोटी मछलियों के पास बैठता. उनसे ऊर्जा प्राप्त करता. फिर college जाता. शाम को काम करता. और रात में प्रणाली को समझने की कोशिश करता. पहले दिन उसे बहुत कम ऊर्जा मिली. दूसरे दिन थोडी ज्यादा. तीसरे दिन उसने समुद्र के थोडा अंदर जाकर कुछ बडे जीवों को महसूस किया. लेकिन वह उनके पास जाने की हिम्मत नहीं कर पाया. उसे पता था कि हर समुद्री जीव harmless नहीं होगा. प्रणाली में साफ लिखा था. हर शक्तिशाली बीस्ट एक अवसर भी है और खतरा भी. यह बात उसे अभी समझ में नहीं आई थी. लेकिन शायद बहुत जल्द समझ आने वाली थी. एक शाम शौर्य समुद्र किनारे बैठा ऊर्जा एकत्र कर रहा था. सूरज डूब चुका था. आसमान गहरा हो रहा था. समुद्र शांत था. अचानक उसकी हथेली में तेज गर्माहट हुई. शौर्य ने आँखें खोल दीं. सामने पानी में कुछ बडा हिला था. पहले उसे लगा कि शायद कोई बडी मछली है. लेकिन फिर पानी की सतह कुछ क्षण के लिए ऊपर उठी. शौर्य धीरे- धीरे खडा हो गया. उसने समुद्र को ध्यान से देखा. कुछ दिखाई नहीं दिया. वह दो कदम पीछे हट गया. फिर पानी के भीतर से एक विशाल छाया गुजरी. शौर्य की सांस अटक गई. वह छाया इतनी बडी थी कि उसके सामने छोटी नाव भी मामूली लगती. शौर्य ने तुरंत प्रणाली सक्रिय की. एक चेतावनी दिखाई दी. अज्ञात समुद्री जीव. ऊर्जा स्तर अत्यधिक. दूरी बनाए रखें. शौर्य कुछ क्षण तक स्क्रीन को देखता रहा. फिर उसने समुद्र की तरफ देखा. विशाल छाया अब दिखाई नहीं दे रही थी. लेकिन वह जानता था कि वह अभी भी आसपास थी. उसने धीरे से पीछे कदम बढाया. पहली बार उसे एहसास हुआ कि समुद्र केवल अवसर नहीं था. यह खतरा भी था. और शायद यही इस शक्ति का सबसे पहला नियम था. जिस दुनिया से वह शक्ति ले रहा था, उसी दुनिया में उससे कहीं बडी शक्तियाँ भी मौजूद थीं. शौर्य घर लौट आया. लेकिन उस रात उसके दिमाग में उस विशाल छाया की तस्वीर घूमती रही. वह सोचता रहा. अगर वह जीव इतना शक्तिशाली था, तो समुद्र की गहराई में और क्या- क्या छिपा होगा? और अगर उसकी प्रणाली सच में उसे समुद्री जीवों की ऊर्जा आत्मसात करने की क्षमता दे रही थी, तो वह आखिर कितनी दूर तक जा सकता था? अभी उसके पास इन सवालों के जवाब नहीं थे. लेकिन एक बात वह जान चुका था. उसकी जिंदगी बदलने लगी थी. धीरे. बहुत धीरे. इतनी धीरे कि शायद आसपास का कोई इंसान इस बदलाव को महसूस भी न कर सके. लेकिन समुद्र ने उसे देख लिया था. और समुद्र की गहराई में कुछ ऐसा भी था, जिसने पहली बार उसकी उपस्थिति महसूस की थी. उसी रात. सागरपुर से बहुत दूर समुद्र की अंधेरी गहराई में. एक विशाल गुफा के भीतर पानी बिल्कुल स्थिर था. गुफा की दीवारों पर पुराने पत्थर के निशान बने हुए थे. किसी प्राचीन भाषा में. किसी ऐसी सभ्यता के संकेत, जिसका नाम अब किसी को याद नहीं था. गुफा के सबसे भीतर एक विशाल पत्थर रखा था. उसके चारों ओर समुद्री वनस्पतियाँ जमी थीं. पत्थर के बीचोंबीच एक छोटा- सा नीला चिन्ह चमक रहा था. बहुत हल्का. फिर अचानक. उसमें एक हल्की कंपन हुई. गुफा की दीवारों से छोटे- छोटे पत्थर टूटकर नीचे गिरे. पानी में एक हल्की लहर उठी. और फिर सब शांत हो गया. लेकिन उस पत्थर के भीतर से एक धीमी ऊर्जा बाहर निकल चुकी थी. वह ऊर्जा समुद्र की धाराओं के साथ बहती हुई ऊपर की ओर बढने लगी. सागरपुर की दिशा में. जहाँ एक गरीब college छात्र अपने छोटे- से घर में सो रहा था. और उसे अभी तक यह नहीं पता था कि उसने समुद्र की जिस शक्ति को छुआ है, वह केवल उसकी किस्मत बदलने नहीं आई. वह किसी बहुत पुरानी चीज को भी जगा चुकी थी.

End of Chapter 3