Chapter 2 of 30

गहराई का बुलावा

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शौर्य को कुछ समझ नहीं आ रहा था. चारों तरफ पानी था. ऊपर कहाँ है और नीचे कहाँ, इसका भी उसे अंदाजा नहीं था. उसने पूरी ताकत से हाथ- पैर चलाने की कोशिश की, लेकिन समुद्र की तेज धार उसके शरीर को लगातार नीचे खींच रही थी. उसके फेफडों में जमा हवा धीरे- धीरे खत्म हो रही थी. उसने आँखें बंद कर लीं. उसके दिमाग में सबसे पहले अनन्या का चेहरा आया. फिर घर. फिर वह छोटा- सा कमरा. फिर मेज पर रखी फीस की रसीद. और आखिर में रिया. लेकिन इस बार रिया को याद करके उसके भीतर कोई दर्द नहीं उठा. शायद इसलिए क्योंकि इस समय उसके सामने उससे भी बडा सवाल था. क्या वह जिंदा बचेगा? शौर्य ने एक बार फिर ऊपर जाने की कोशिश की. उसने अपने दोनों हाथों से पानी को पीछे धकेला. लेकिन शरीर जवाब देने लगा था. उसकी आँखों के सामने अंधेरा छाने लगा. तभी वही नीली रोशनी फिर दिखाई दी. इस बार वह दूर नहीं थी. वह उसके बिल्कुल सामने थी. नीली रोशनी के बीच एक अजीब- सी आकृति बनी हुई थी. वह किसी फूल जैसी लग रही थी. कमल. शौर्य की नजर उस आकृति पर टिक गई. उसे लगा जैसे उसके आसपास का पानी अचानक शांत हो गया हो. कुछ क्षण पहले तक जिस समुद्र की धार उसे नीचे खींच रही थी, वही पानी अब बिल्कुल स्थिर था. शौर्य के शरीर को कोई अदृश्य शक्ति संभाल रही थी. उसने हैरानी से चारों तरफ देखा. कुछ समझ नहीं आया. फिर उसके सामने नीली रोशनी और तेज हो गई. और इस बार उसके कानों में आवाज आई. क्या तुम शक्ति चाहते हो? शौर्य ने चौंककर चारों तरफ देखा. कोई नहीं था. आवाज बाहर से नहीं आई थी. जैसे सीधे उसके दिमाग के भीतर सुनाई दी हो. उसने जवाब देने की कोशिश की. लेकिन उसके मुँह से कोई आवाज नहीं निकली. उसने फिर वही आवाज सुनी. क्या तुम अपनी नियति बदलना चाहते हो? शौर्य की आँखों के सामने उसकी पूरी जिंदगी घूम गई. गरीबी. माता- पिता का जाना. दादी का जाना. अनन्या की जिम्मेदारी. हर महीने पैसों की चिंता. लोगों की नजरों में खुद को छोटा महसूस करना. और आज रिया का उसे छोडकर जाना. शौर्य ने आँखें बंद कर लीं. अगर कोई उससे कुछ घंटे पहले यही सवाल पूछता, तो शायद वह बिना सोचे जवाब दे देता. लेकिन अब वह समुद्र की गहराई में था. उसके पास कुछ भी नहीं था. न पैसा. न ताकत. न कोई रास्ता. फिर भी उसने अपने भीतर से एक जवाब निकलते हुए महसूस किया. हाँ। आवाज बहुत धीमी थी. लेकिन इस बार वह सुनाई दी. नीली रोशनी अचानक फैल गई. उसके चारों तरफ पानी चमकने लगा. शौर्य ने अपनी आँखें खोल दीं. उसके सामने एक पारदर्शी- सा चिन्ह दिखाई दिया. वह हवा में नहीं था. वह पानी के भीतर था. फिर भी उसके सामने स्पष्ट दिखाई दे रहा था. शौर्य ने हाथ बढाया. उसकी उंगलियाँ उस चिन्ह के पास पहुँचीं. जैसे ही उसने उसे छुआ, उसके पूरे शरीर में एक तेज कंपन दौड गया. उसने हाथ तुरंत पीछे खींच लिया. लेकिन अब बहुत देर हो चुकी थी. नीली रोशनी उसकी उंगलियों से होकर पूरे हाथ में फैल गई. फिर कंधे तक. फिर सीने तक. और कुछ ही क्षणों में उसके पूरे शरीर में फैल गई. शौर्य को दर्द नहीं हुआ. बल्कि पहली बार उसे ऐसा लगा जैसे उसके शरीर के भीतर जमा सारी थकान धीरे- धीरे निकल रही हो. उसकी साँसें सामान्य होने लगीं. उसका सिर हल्का हो गया. और फिर उसकी आँखों के सामने कई शब्द उभरे. आदिम बीस्ट साधना प्रणाली. शौर्य उन शब्दों को समझ नहीं पा रहा था. लेकिन अजीब बात यह थी कि वह उन्हें पढ पा रहा था. जैसे उसके दिमाग में किसी ने पहले से उनका अर्थ लिख रखा हो. कुछ और शब्द उभरे. जीवन ऊर्जा की खोज. समुद्री जीवों की ऊर्जा. विकास. बंधन. रूपांतरण. शौर्य की आँखें फैल गईं. उसने कुछ समझने की कोशिश की. लेकिन उससे पहले ही उसके सामने एक और संदेश दिखाई दिया. प्रथम संपर्क स्थापित. उपयुक्त धारक की पुष्टि. शौर्य ने अपने आसपास देखा. अब नीली रोशनी बहुत हल्की हो चुकी थी. लेकिन वह चिन्ह अभी भी उसके सामने था. फिर उसके भीतर से एक नई अनुभूति उठी. जैसे समुद्र का पानी केवल पानी नहीं रहा हो. उसे लहरों की दिशा महसूस होने लगी. दूर किसी छोटी मछली की हलचल महसूस होने लगी. उससे भी दूर किसी बडे जीव की गति का आभास हुआ. शौर्य का दिल तेज धडकने लगा. वह घबरा गया. लेकिन इस बार डर के साथ एक और चीज थी. जिज्ञासा. उसने धीरे से हाथ फैलाया. उसके सामने से एक छोटी मछली गुजरी. शौर्य ने उसे पहले कभी नहीं देखा था. उसके शरीर पर हल्की नीली चमक थी. वह कुछ पल उसके पास घूमती रही. फिर आगे बढ गई. शौर्य उसे देखता रहा. उसे अचानक लगा कि वह मछली केवल एक जीव नहीं है. उसके भीतर कुछ था. एक छोटी- सी ऊर्जा. एक हल्की गर्माहट. और उस ऊर्जा की दिशा उसे महसूस हो रही थी. शौर्य ने आँखें बंद कर लीं. उसके सामने जैसे कोई अदृश्य रास्ता खुल गया. उसने पहली बार समुद्र को केवल पानी की तरह महसूस नहीं किया. यह एक जीवित दुनिया थी. एक बहुत बडी दुनिया. और वह उसके दरवाजे पर खडा था. तभी एक तेज झटका लगा. शौर्य की चेतना टूट गई. उसका शरीर अचानक ऊपर की तरफ उठने लगा. उसने कुछ समझने की कोशिश की. लेकिन अगले ही पल वह समुद्र की सतह पर आ गया. उसने जोर से साँस ली. हवा उसके फेफडों में भर गई. वह कुछ क्षण तक केवल साँस लेता रहा. फिर एक बडी लहर उसे किनारे की तरफ ले गई. उसका शरीर रेत से टकराया. शौर्य कुछ देर वहीं पडा रहा. बारिश अभी भी हो रही थी. आसमान में बादल थे. लेकिन उसके भीतर कुछ बदल चुका था. वह धीरे- धीरे उठकर बैठा. उसने अपने हाथों को देखा. सब कुछ सामान्य था. न कोई चमक. न कोई निशान. न कोई घाव. लेकिन उसके भीतर वह प्रणाली अब भी मौजूद थी. वह उसे महसूस कर सकता था. बहुत हल्के रूप में. जैसे किसी बंद कमरे में दूर कहीं कोई धीमी रोशनी जल रही हो. शौर्य ने समुद्र की तरफ देखा. कुछ देर पहले तक वही समुद्र उसे निगलने वाला था. अब वही समुद्र उसे किसी रहस्य की तरह बुला रहा था. वह खडा हुआ. उसके कपडे पूरी तरह भीग चुके थे. ठंड उसके शरीर में उतर रही थी. फिर भी उसके कदम घर की तरफ नहीं उठे. वह कुछ देर वहीं खडा रहा. उसके दिमाग में एक ही बात घूम रही थी. क्या यह सच था? क्या वह वास्तव में किसी शक्ति के संपर्क में आया था? या फिर वह समुद्र में डूबते समय कुछ देख बैठा था? उसने अपनी हथेली खोली. कुछ नहीं था. उसने फिर बंद की. फिर खोली. कुछ भी नहीं. शौर्य ने सिर झटक दिया. मुझे घर जाना चाहिए। वह धीरे- धीरे चल पडा. उस रात जब वह घर पहुँचा, तब लगभग आधी रात हो चुकी थी. अनन्या दरवाजे के पास बैठी थी. उसकी आँखों में चिंता साफ दिखाई दे रही थी. शौर्य को देखते ही वह उठ गई. भैया! शौर्य रुक गया. अनन्या उसके पास आई. आप कहाँ चले गए थे? शौर्य ने कुछ कहने की कोशिश की. मैं. वह रुक गया. वह उसे क्या बताता? कि वह समुद्र में गिर गया था? कि उसे एक अजीब नीली रोशनी दिखाई दी? कि उसके सामने कोई ऐसी प्रणाली प्रकट हुई जिसे वह समझ भी नहीं पा रहा? अनन्या शायद उसे तुरंत अस्पताल ले जाती. इसलिए शौर्य ने सिर झुका लिया. समुद्र के पास चला गया था। अनन्या ने उसकी भीगी हालत देखी. इस मौसम में? शौर्य चुप रहा. अनन्या की आवाज थोडी सख्त हो गई. अगर आपको कुछ हो जाता तो? शौर्य ने उसकी तरफ देखा. कुछ पल तक वह कुछ नहीं बोला. फिर धीरे से कहा, मुझे कुछ नहीं हुआ। अनन्या की आँखें भर आईं. आपको हमेशा लगता है कि आपको कुछ नहीं होगा। शौर्य ने कुछ नहीं कहा. अनन्या ने उसका हाथ पकडा. पहले कपडे बदलिए. आपको बुखार हो जाएगा। शौर्य उसके पीछे कमरे में चला गया. उस रात वह सो नहीं पाया. वह बिस्तर पर लेटा था. छत को देख रहा था. कमरे में अंधेरा था. अनन्या दूसरे कमरे में सो चुकी थी. लेकिन शौर्य के दिमाग में वह नीली रोशनी लगातार घूम रही थी. उसने धीरे से आँखें बंद कीं. और जैसे ही उसने आँखें बंद कीं, उसके सामने वही प्रणाली दिखाई दी. इस बार ज्यादा स्पष्ट. जैसे कोई अदृश्य स्क्रीन उसके सामने खुल गई हो. आदिम बीस्ट साधना प्रणाली. धारक: शौर्य. प्रारंभिक स्तर. ऊर्जा: अत्यंत निम्न. शौर्य ने आँखें खोल दीं. स्क्रीन गायब हो गई. उसने फिर आँखें बंद कीं. स्क्रीन वापस आ गई. वह कुछ देर तक चुपचाप उसे देखता रहा. अब उसे यकीन होने लगा था कि यह सपना नहीं था. वह उठकर बैठ गया. उसने अपने हाथ को सामने किया. कुछ नहीं हुआ. फिर उसने मन ही मन उस प्रणाली के बारे में सोचने की कोशिश की. कुछ क्षण बाद नीली रोशनी फिर दिखाई दी. शौर्य की साँस रुक गई. इस बार उसने डरने के बजाय ध्यान से उसे देखने की कोशिश की. उसके सामने कुछ निर्देश दिखाई दिए. ऊर्जा संग्रह. बीस्ट विकास. बीस्ट बंधन. शौर्य ने धीरे से पूछा, क्या तुम मुझे सुन सकती हो? कोई जवाब नहीं आया. उसने फिर पूछा. क्या मैं तुम्हें नियंत्रित कर सकता हूँ? कुछ क्षण की शांति रही. फिर एक छोटा- सा संदेश दिखाई दिया. धारक की इच्छा के अनुसार प्रणाली सक्रिय होगी. शौर्य ने उस वाक्य को कई बार पढा. फिर उसके चेहरे पर पहली बार हल्की मुस्कान आई. उसने हाथ नीचे कर लिया. लेकिन वह ज्यादा देर खुश नहीं रह सका. उसके मन में तुरंत एक दूसरा सवाल आया. अगर यह शक्ति सच में है, तो इसे इस्तेमाल कैसे किया जाए? उसे कोई जवाब नहीं मिला. उसने प्रणाली को फिर देखने की कोशिश की. कुछ देर बाद एक और संदेश सामने आया. प्रथम ऊर्जा स्रोत आवश्यक. शौर्य ने भौंहें सिकोड लीं. प्रथम ऊर्जा स्रोत. इसका मतलब क्या था? वह बिस्तर से उठा. खिडकी के पास गया. बाहर बारिश अब लगभग रुक चुकी थी. दूर समुद्र की आवाज सुनाई दे रही थी. शौर्य ने कुछ क्षण समुद्र की तरफ देखा. फिर उसकी नजर खिडकी के पास रखे छोटे से पानी के गिलास पर पडी. वह कुछ देर उसे देखता रहा. फिर खुद ही हँस दिया. पानी से क्या होगा? लेकिन उसी क्षण उसे समुद्र में दिखाई देने वाली छोटी मछली याद आई. उसके भीतर एक अजीब- सी ऊर्जा थी. शौर्य के मन में अचानक एक विचार आया. क्या प्रणाली किसी जीव की ऊर्जा से सक्रिय हो सकती है? अगर ऐसा है, तो उसे किसी समुद्री जीव की जरूरत होगी. उसने अगले दिन सुबह समुद्र के किनारे जाने का फैसला किया. वह वापस बिस्तर पर लेट गया. लेकिन इस बार उसके मन में निराशा नहीं थी. उसके भीतर पहली बार कोई संभावना पैदा हुई थी. छोटी. अस्पष्ट. लेकिन वास्तविक. सुबह होने में अभी कई घंटे बाकी थे. और शौर्य को पता नहीं था कि अगली सुबह समुद्र उसके लिए सिर्फ एक जगह नहीं रहने वाला. वह उसकी नई जिंदगी का पहला कदम बनने वाला था. सुबह करीब छह बजे शौर्य घर से निकल गया. अनन्या अभी सो रही थी. उसने उसके लिए नाश्ता बनाकर मेज पर रख दिया था. एक छोटा- सा कागज भी. भैया, खाना जरूर खा लेना। शौर्य ने कागज पढकर उसे जेब में रख लिया. वह मुस्कुराया. फिर समुद्र की तरफ चल पडा. सूरज अभी पूरी तरह निकला नहीं था. आसमान हल्का नीला था. समुद्र शांत दिखाई दे रहा था. शौर्य किनारे पर जाकर बैठ गया. उसने पानी को ध्यान से देखा. कुछ छोटी मछलियाँ किनारे के पास घूम रही थीं. शौर्य ने अपनी आँखें बंद कीं. उसने कल रात देखी प्रणाली को याद किया. कुछ क्षण बाद वही नीली रोशनी उसके सामने दिखाई दी. इस बार उसके भीतर एक हल्की गर्माहट महसूस हुई. और फिर उसने पहली बार स्पष्ट रूप से महसूस किया. पास में एक छोटी मछली थी. उसके भीतर ऊर्जा थी. बहुत कम. लेकिन थी. शौर्य ने धीरे से हाथ आगे बढाया. मछली पानी में उसके हाथ के पास से गुजरी. नीली रोशनी कुछ क्षण के लिए चमकी. फिर शांत हो गई. शौर्य ने आँखें खोल दीं. उसके चेहरे पर हैरानी थी. उसे समझ आ गया था. प्रणाली सक्रिय हो चुकी थी. लेकिन वह अभी नहीं जानता था कि इस छोटी- सी शुरुआत के पीछे समुद्र की कितनी बडी दुनिया छिपी हुई है. और सबसे महत्वपूर्ण बात. समुद्र ने अभी उसे अपनी पहली शक्ति दिखाई ही नहीं थी.

End of Chapter 2