Chapter 26 of 30
विराज का सच
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सुरंग के उस पार खड़ी परछाईं बिल्कुल स्थिर थी।
उसके पीछे सफेद रोशनी फैली हुई थी, लेकिन इतनी तेज भी नहीं कि उसके चेहरे को स्पष्ट किया जा सके।
आर्यन कुछ कदम आगे बढ़ा।
शौर्य ने तुरंत उसका हाथ पकड़ लिया।
"रुको।"
आर्यन रुक गया।
उसने पीछे मुड़कर शौर्य को देखा।
शौर्य की नजर अब भी उस परछाईं पर थी।
"पहले यह जान लेते हैं कि वह सच में विराज है या नहीं।"
आर्यन ने कुछ नहीं कहा।
उसके चेहरे पर बेचैनी थी।
इतने वर्षों से जिस व्यक्ति को वह केवल यादों में खोजता रहा था, आज उसकी आवाज उसके सामने थी।
फिर वही आवाज सुनाई दी।
"तुम्हें अब भी मुझ पर विश्वास नहीं है, आर्यन?"
आर्यन की उंगलियां धीरे-धीरे मुट्ठी में बदल गईं।
"तुमने मुझे विश्वास करने की वजह नहीं दी।"
कुछ क्षण तक कोई उत्तर नहीं आया।
फिर परछाईं ने कहा, "तुम्हें जो दिखाया गया, तुमने उसी को सच मान लिया।"
आर्यन ने एक कदम और आगे बढ़ाया।
"तो फिर सामने आओ।"
परछाईं कुछ क्षण शांत रही।
फिर वह धीरे-धीरे प्रकाश से बाहर आई।
सबसे पहले उसके जूते दिखाई दिए।
फिर लंबा काला वस्त्र।
फिर उसके हाथ।
और आखिर में चेहरा।
शौर्य ने उसे पहली बार देखा।
वह आदमी उम्र में आर्यन से कुछ बड़ा लग रहा था।
चेहरा शांत था।
लेकिन उसकी आंखों में ऐसी थकान थी जैसे उसने वर्षों से ठीक से नींद न ली हो।
आर्यन उसे देखता रहा।
उसकी आंखों में अविश्वास था।
"विराज।"
विराज ने हल्का-सा सिर झुकाया।
"बहुत समय हो गया।"
आर्यन की आवाज भारी हो गई।
"तुम जीवित थे।"
"हाँ।"
"तुमने मुझे बताया क्यों नहीं?"
विराज ने कुछ नहीं कहा।
आर्यन की आंखों में गुस्सा उतर आया।
"मैंने तुम्हें ढूंढा था।"
"हर जगह।"
"मुझे लगा था कि तुम मर चुके हो।"
विराज ने धीरे से कहा, "शायद तुम्हें ऐसा ही मानना चाहिए था।"
आर्यन एक पल के लिए चुप हो गया।
फिर उसने पूछा, "क्यों?"
विराज ने उसकी आंखों में देखा।
"क्योंकि जिस दिन तुमने मुझे ढूंढना शुरू किया, उसी दिन वे लोग तुम्हें भी ढूंढने लगे थे।"
शौर्य ने पूछा, "कौन लोग?"
विराज की नजर पहली बार शौर्य पर गई।
वह कुछ क्षण उसे देखता रहा।
फिर उसकी नजर शौर्य की मुट्ठी में बंद माला पर टिक गई।
उसका चेहरा बदल गया।
"तुमने इसे उठा लिया।"
शौर्य ने कहा, "हाँ।"
विराज ने धीमे स्वर में पूछा, "किसने कहा था इसे अपने पास रखने के लिए?"
"किसी ने नहीं।"
शौर्य ने माला को देखा।
"इसने खुद मुझे बुलाया।"
विराज कुछ क्षण शांत रहा।
फिर उसने कहा, "तो समय आ गया है।"
आर्यन ने तुरंत पूछा, "किस चीज का?"
विराज ने उसकी तरफ देखा।
"तुम्हारी मां के आखिरी फैसले का।"
आर्यन का चेहरा कठोर हो गया।
"मेरी मां कहां हैं?"
विराज ने उत्तर देने में कुछ समय लिया।
"मुझे नहीं पता।"
आर्यन ने तुरंत कहा, "झूठ।"
विराज ने कोई प्रतिक्रिया नहीं दी।
"अगर तुम्हें नहीं पता, तो तुम यहां क्यों हो?"
"क्योंकि उन्होंने मुझे यहां आने को कहा था।"
आर्यन की आंखें फैल गईं।
"कब?"
"बहुत पहले।"
"कितना पहले?"
विराज ने शौर्य की तरफ देखा।
"उस रात।"
कमरे में सन्नाटा छा गया।
शौर्य का दिल तेज धड़कने लगा।
आर्यन ने धीरे से पूछा, "जन्म-रात्रि?"
विराज ने सिर हिलाया।
"हाँ।"
आर्यन ने कुछ क्षण आंखें बंद कर लीं।
"उस रात तुमने क्या किया था?"
विराज चुप रहा।
आर्यन ने फिर पूछा।
इस बार उसकी आवाज और कठोर थी।
"तुमने शौर्य की हथेली पर वह चिन्ह बनाया था?"
विराज की आंखें एक पल के लिए शौर्य की ओर उठीं।
"नहीं।"
आर्यन कुछ नहीं बोला।
विराज ने कहा, "मैंने उसे छुआ था।"
"लेकिन चिन्ह मैंने नहीं बनाया।"
शौर्य ने पहली बार पूछा, "तो वह आया कहां से?"
विराज ने उसकी तरफ देखा।
"उसका उत्तर तुम्हारी मां के पास था।"
शौर्य की सांस थोड़ी धीमी हो गई।
"मेरी मां?"
"हाँ।"
"उन्होंने मुझे कुछ क्यों नहीं बताया?"
विराज ने कहा, "क्योंकि अगर वह बतातीं, तो तुम बच नहीं पाते।"
शौर्य की आंखों में सवाल था।
"किससे?"
विराज ने तुरंत उत्तर नहीं दिया।
वह सुरंग की दीवार के पास गया।
उसने उस पर हाथ रखा।
पत्थर पर हल्की रोशनी फैल गई।
एक पुराना चित्र उभर आया।
एक वृत्त।
उसके चारों ओर सात चिन्ह।
और वृत्त के बीच एक छोटा बच्चा।
शौर्य ने उसे देखा।
"यह मैं हूं?"
विराज ने कहा, "हाँ।"
फिर उसने सात चिन्हों की तरफ इशारा किया।
"यह सात शक्तियों का मूल क्रम है।"
आर्यन ने कहा, "लेकिन सातवां बंधन तो एक ही शक्ति है।"
विराज ने सिर हिलाया।
"तुमने आधा सच सीखा था।"
आर्यन चुप हो गया।
विराज ने आगे कहा, "सातवां बंधन अपने आप में शक्ति नहीं है।"
"यह बाकी छह शक्तियों को जोड़ने वाला केंद्र है।"
शौर्य ने पूछा, "तो मेरी मां को यह कैसे पता था?"
विराज ने कहा, "क्योंकि वह इस ज्ञान की संरक्षक थीं।"
शौर्य के चेहरे पर आश्चर्य आया।
"संरक्षक?"
विराज ने सिर हिलाया।
"लेकिन वह सातवें बंधन की धारक नहीं थीं।"
"यह अंतर समझना जरूरी है।"
आर्यन ने पूछा, "तो मेरी मां क्या थीं?"
विराज ने उसकी ओर देखा।
"धारक।"
आर्यन कुछ क्षण चुप रहा।
"और मेरी मां?"
"संरक्षक।"
आर्यन ने धीरे से कहा, "और तुम?"
विराज ने अपनी हथेली पर बने चिन्ह को देखा।
"मैं दोनों के बीच संदेश पहुंचाने वाला था।"
"लेकिन उस रात सब बदल गया।"
शौर्य ने पूछा, "किस वजह से?"
विराज ने उसकी ओर देखा।
"क्योंकि सातवें बंधन ने तुम्हें चुन लिया।"
शौर्य ने अपनी मुट्ठी खोली।
काला मोती फिर दिखाई दिया।
विराज की आंखें उस पर टिक गईं।
"यह वही है।"
आर्यन ने पूछा, "लेकिन यह मेरी मां के पास था।"
"हाँ।"
"फिर शौर्य के पास कैसे आया?"
विराज ने कहा, "तुम्हारी मां ने इसे जानबूझकर छोड़ा था।"
आर्यन ने तुरंत पूछा, "कहां?"
"जहां उसे केवल वही व्यक्ति पा सकता था जिसे बंधन स्वीकार कर चुका हो।"
शौर्य ने पूछा, "और वह जगह यही थी?"
विराज ने सिर हिलाया।
"हाँ।"
शौर्य कुछ देर तक माला को देखता रहा।
फिर उसने पूछा, "अगर मेरी मां संरक्षक थीं, तो वह अब कहां हैं?"
विराज की आंखों में कुछ बदल गया।
"यही वह सवाल है जिसका उत्तर तुम्हें सबसे पहले चाहिए।"
आर्यन आगे आया।
"तुम्हें पता है।"
विराज ने उसकी ओर देखा।
"मुझे एक बात पता है।"
"क्या?"
"वह जीवित थीं जब मैंने आखिरी बार उन्हें देखा।"
शौर्य की सांस रुक गई।
"कब?"
"तुम्हारे जन्म के तीन दिन बाद।"
शौर्य कुछ क्षण बिल्कुल स्थिर रहा।
उसने धीमे स्वर में पूछा, "फिर?"
विराज ने कहा, "फिर वह चली गईं।"
"कहां?"
"उत्तर की तरफ।"
"किसके साथ?"
विराज ने कुछ नहीं कहा।
आर्यन ने उसकी आंखों में देखा।
"वह अकेली नहीं थीं।"
विराज चुप रहा।
आर्यन ने कहा, "कौन था उनके साथ?"
विराज ने धीरे से उत्तर दिया।
"तुम्हारी मां।"
आर्यन के चेहरे पर जैसे किसी ने अचानक प्रहार किया हो।
वह पीछे हट गया।
"मेरी मां और शौर्य की मां साथ गई थीं?"
विराज ने सिर हिलाया।
"हाँ।"
शौर्य ने तुरंत पूछा, "क्यों?"
विराज ने कहा, "क्योंकि उस रात के बाद दोनों जानती थीं कि शौर्य को सुरक्षित रखने के लिए उन्हें अलग होना पड़ेगा।"
"एक को शौर्य के पास रहना था।"
"दूसरी को उस शक्ति के पीछे जाना था जो शौर्य तक पहुंचने की कोशिश कर रही थी।"
शौर्य ने पूछा, "मेरी मां मेरे साथ रहीं?"
"कुछ समय तक।"
"फिर?"
विराज ने उसकी तरफ देखा।
"फिर वह भी गायब हो गईं।"
शौर्य का चेहरा शांत था।
लेकिन उसके भीतर जैसे कोई पुराना खालीपन अचानक फिर से जाग गया।
उसे बचपन की बहुत छोटी-छोटी बातें याद आने लगीं।
किसी के हाथ की गर्मी।
रात में उसके बालों पर हाथ फेरना।
एक धीमी आवाज में लोरी।
और फिर अचानक सब कुछ समाप्त हो जाना।
विराज ने कहा, "तुम्हारी मां ने तुम्हें छोड़ना नहीं चाहा था।"
शौर्य ने धीरे से पूछा, "तो फिर उन्होंने छोड़ा क्यों?"
विराज ने उत्तर दिया।
"क्योंकि किसी को तुम्हारे पीछे आने वालों को अपने पीछे खींचना था।"
कमरे में बहुत देर तक कोई आवाज नहीं हुई।
शौर्य ने नजरें झुका लीं।
उसने पहली बार अपनी मां की अनुपस्थिति को केवल एक पुराने दुख की तरह नहीं, बल्कि किसी निर्णय की कीमत की तरह महसूस किया।
आर्यन ने अचानक पूछा, "और मेरी मां?"
विराज ने उसकी तरफ देखा।
"उन्होंने तुम्हारे लिए भी एक संदेश छोड़ा था।"
आर्यन की आंखों में उम्मीद चमकी।
"क्या?"
विराज ने कहा, "उन्होंने कहा था कि अगर तुम कभी सातवें बंधन के साथ शौर्य तक पहुंचो, तो तुम्हें उससे डरना नहीं चाहिए।"
आर्यन चुप रहा।
विराज ने आगे कहा, "उन्होंने कहा था कि तुम्हारी गलती शक्ति को स्वीकार करना नहीं थी।"
"तुम्हारी गलती यह थी कि तुमने अपने आप को अकेला समझ लिया।"
आर्यन की आंखें नम हो गईं।
वह कुछ नहीं बोला।
विराज ने शौर्य की ओर देखा।
"और तुम्हारी मां का संदेश तुम्हारे लिए भी था।"
शौर्य ने पूछा, "क्या?"
विराज ने धीरे से कहा।
"जब तुम्हें लगे कि तुम अपनी कहानी अकेले जी रहे हो, तो याद रखना कि तुम्हारे जन्म की रात तुम्हें बचाने के लिए चार लोग खड़े थे।"
"और उनमें से किसी ने भी तुम्हें अपना बोझ नहीं समझा।"
शौर्य की आंखें नम हो गईं।
वह कुछ क्षण माला को देखता रहा।
फिर उसने पूछा, "अगर चार लोग थे, तो पांचवीं शक्ति कौन थी?"
विराज ने उसकी तरफ देखा।
उसकी आंखों में पहली बार डर दिखाई दिया।
"यही तो असली रहस्य है।"
शौर्य ने पूछा, "क्या वह कोई व्यक्ति था?"
विराज ने सिर हिलाया।
"नहीं।"
"वह कोई शक्ति थी।"
"और उस रात उसने पहली बार अपना प्रभाव दिखाया।"
आर्यन ने पूछा, "कौन सी शक्ति?"
विराज ने उत्तर नहीं दिया।
वह धीरे-धीरे पीछे हट गया।
"तुम्हें इसका उत्तर खुद ढूंढना होगा।"
आर्यन ने कहा, "तुम हमें छोड़कर नहीं जा सकते।"
विराज रुक गया।
उसने पीछे मुड़कर देखा।
"मैं नहीं जा रहा।"
उसने सुरंग के आगे के अंधेरे की तरफ देखा।
"मैं तुम्हें वहां ले जाने आया हूं जहां तुम्हारी मां ने आखिरी बार मुझे भेजा था।"
शौर्य ने पूछा, "वह जगह कहां है?"
विराज ने कहा, "उस पहाड़ के नीचे जहां किसी इंसान ने पिछले बीस वर्षों से कदम नहीं रखा।"
आर्यन ने पूछा, "और वहां क्या है?"
विराज ने बहुत धीमे स्वर में कहा।
"तुम्हारी मां की आखिरी निशानी।"
शौर्य ने माला को कसकर पकड़ लिया।
सुरंग के भीतर हवा फिर चलने लगी।
दूर कहीं किसी भारी दरवाजे के खुलने की आवाज आई।
विराज आगे बढ़ गया।
आर्यन उसके पीछे चला।
नीरिका ने शौर्य की ओर देखा।
"चलोगे?"
शौर्य ने कुछ क्षण अपनी मुट्ठी में बंद माला को देखा।
फिर उसने सिर उठाया।
"हाँ।"
वह आगे बढ़ गया।
लेकिन जैसे ही उसने पहला कदम सुरंग के भीतर रखा, उसकी हथेली में रखा काला मोती अचानक गर्म हो उठा।
और इस बार आवाज साफ थी।
"मत आना।"
शौर्य वहीं रुक गया।
उसने चारों ओर देखा।
विराज आगे जा चुका था।
आर्यन ने पीछे मुड़कर पूछा, "क्या हुआ?"
शौर्य कुछ नहीं बोला।
उसने अपनी हथेली खोली।
काला मोती शांत था।
लेकिन शौर्य जान चुका था कि अभी-अभी उसे किसी ने चेतावनी दी थी।
और सबसे डरावनी बात यह थी कि वह आवाज उसे अपनी मां की लगी थी।