Chapter 23 of 30

मां की आखिरी निशानी

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अंधेरा बहुत गहरा था। शौर्य को कुछ दिखाई नहीं दे रहा था। उसे केवल अपने कदमों की आवाज सुनाई दे रही थी। एक कदम। फिर दूसरा। फिर तीसरा। पत्थर पर पड़ते उसके पैरों की आवाज उस विशाल रास्ते में दूर तक जा रही थी। उसके पीछे आर्यन था। नीरिका और जलछाया भी उनके साथ थे। लेकिन अजीब बात यह थी कि कोई भी कुछ नहीं बोल रहा था। शौर्य ने कुछ देर बाद पीछे मुड़कर देखा। आर्यन का चेहरा गंभीर था। उसकी नजरें लगातार आसपास की दीवारों पर घूम रही थीं। जैसे वह किसी ऐसी चीज को खोज रहा हो जिसे बाकी लोग देख नहीं पा रहे थे। शौर्य ने धीरे से पूछा, "तुम इस जगह को पहचानते हो?" आर्यन ने तुरंत उत्तर नहीं दिया। कुछ कदम आगे जाने के बाद उसने कहा, "नहीं।" फिर वह रुक गया। "लेकिन इसकी गंध पहचानता हूं।" शौर्य ने उसकी तरफ देखा। "गंध?" आर्यन ने दीवार को छुआ। "ऊर्जा की।" उसकी उंगलियां पत्थर पर कुछ क्षण टिकी रहीं। फिर उसने हाथ पीछे खींच लिया। "यह वही ऊर्जा है।" "किसकी?" आर्यन ने उसकी तरफ देखा। "तुम्हारी मां की।" शौर्य वहीं रुक गया। उसके भीतर जैसे अचानक कुछ ठहर गया। "मेरी मां?" आर्यन ने सिर हिलाया। "हाँ।" शौर्य कुछ बोल नहीं पाया। इतनी दूर आने के बाद उसने उम्मीद की थी कि उसे सातवें चिन्ह के बारे में कोई उत्तर मिलेगा। लेकिन अपनी मां की ऊर्जा का यहां होना उसके लिए बिल्कुल अलग बात थी। उसने धीरे से पूछा, "तुमने पहले क्यों नहीं बताया?" आर्यन की आंखें उससे नहीं मिलीं। "क्योंकि मुझे खुद यकीन नहीं था।" "और अब?" आर्यन ने दीवार की ओर देखा। "अब मैं झूठ नहीं बोल सकता।" वह कुछ कदम आगे बढ़ा। दीवार पर कोई चिन्ह नहीं था। केवल खाली पत्थर। लेकिन आर्यन ने अपनी हथेली उसके ऊपर रख दी। अचानक पत्थर की सतह पर बहुत हल्की नीली रेखा दिखाई दी। शौर्य की आंखें फैल गईं। वह रेखा धीरे-धीरे फैलने लगी। पहले एक वृत्त बना। फिर उसके भीतर सात रेखाएं। वही सातवां चिन्ह। लेकिन इस बार वह वैसा नहीं था जैसा शौर्य ने पहले देखा था। उसके बीच में एक छोटी-सी आकृति थी। एक आंख जैसी। शौर्य ने धीमे से पूछा, "यह क्या है?" आर्यन ने कहा, "मैंने इसे पहले कभी नहीं देखा।" नीरिका आगे आई। उसने चिन्ह को ध्यान से देखा। "यह आंख जैसी क्यों है?" आर्यन ने कहा, "क्योंकि शायद यह कोई चिन्ह नहीं है।" शौर्य ने उसकी तरफ देखा। "तो?" आर्यन ने धीरे से कहा, "यह किसी व्यक्ति की पहचान हो सकती है।" कुछ पल तक कोई कुछ नहीं बोला। फिर पत्थर के भीतर से हल्की कंपन हुई। नीली रेखा के बीच एक छोटी रोशनी जली। और उसके भीतर एक चेहरा उभरा। शौर्य का दिल अचानक तेज धड़कने लगा। वह चेहरा उसकी मां का था। वह बहुत छोटी नहीं थीं। लेकिन इतनी उम्र की भी नहीं थीं जितनी शौर्य ने अपनी अंतिम यादों में देखी थीं। उनके चेहरे पर थकान थी। आंखों के नीचे हल्के काले घेरे थे। और उनकी गोद में एक छोटा बच्चा था। शौर्य ने उसे तुरंत पहचान लिया। वह खुद था। उसकी सांस रुक गई। "यह कब की बात है?" आर्यन ने कोई उत्तर नहीं दिया। क्योंकि उसे भी नहीं पता था। दृश्य केवल कुछ क्षण रहा। फिर आवाज आई। बहुत धीमी। लेकिन साफ। "अगर तुम यह देख रहे हो, तो इसका मतलब है कि आर्यन अपना वादा निभा नहीं पाया।" आर्यन का चेहरा बदल गया। शौर्य ने उसकी तरफ देखा। आर्यन जैसे पत्थर बन गया था। आवाज फिर आई। "आर्यन, अगर तुमने उसे यहां तक पहुंचने दिया है, तो शायद अब उसे सब कुछ जानना चाहिए।" आर्यन ने आंखें बंद कर लीं। शौर्य ने पूछा, "यह क्या है?" आर्यन ने कोई उत्तर नहीं दिया। शौर्य की आवाज थोड़ी कठोर हो गई। "तुम्हारी मां ने तुमसे क्या वादा लिया था?" आर्यन ने धीरे से कहा, "उन्होंने कहा था कि मैं तुम्हें यहां कभी नहीं आने दूंगा।" "क्यों?" "क्योंकि वह जानती थीं कि यहां क्या है।" शौर्य ने फिर उस नीली रोशनी को देखा। उसकी मां की छवि अब गायब हो चुकी थी। लेकिन आवाज अब भी सुनाई दे रही थी। "शौर्य।" उसका नाम सुनते ही उसके शरीर में सिहरन दौड़ गई। "अगर तुम मेरी आवाज सुन रहे हो, तो पहले यह समझ लो कि मैंने तुमसे कुछ बातें छिपाईं।" शौर्य की सांसें धीमी हो गईं। "मैंने तुम्हें बचाने के लिए झूठ बोला।" "लेकिन वह झूठ केवल तुम्हारे बारे में नहीं था।" कुछ क्षण के लिए आवाज रुक गई। फिर उसने कहा। "यह आर्यन के बारे में भी था।" शौर्य ने तुरंत आर्यन की तरफ देखा। आर्यन की आंखें नीचे थीं। शौर्य के भीतर सवालों की बाढ़ आ गई। "तुम्हारी मां मुझे कैसे जानती थीं?" आर्यन ने धीमे स्वर में कहा, "बहुत पहले से।" "कितने समय से?" आर्यन चुप रहा। शौर्य ने उसकी तरफ कदम बढ़ाया। "आर्यन।" आर्यन ने आखिरकार उसकी तरफ देखा। "तुम्हारी मां मुझे उस समय से जानती थीं जब मैं केवल एक लड़का था।" शौर्य ने पूछा, "तुम्हारी मुलाकात उनसे कैसे हुई?" आर्यन कुछ क्षण चुप रहा। फिर उसने कहना शुरू किया। "जब मैं लगभग चौदह साल का था, तब पहली बार मुझे अपने सपनों में सातवां चिन्ह दिखाई देने लगा था।" "मैंने सोचा था कि यह केवल मेरे मन की कल्पना है।" "लेकिन एक दिन मैं जंगल में बेहोश हो गया।" "जब मेरी आंख खुली, तो तुम्हारी मां मेरे सामने बैठी थीं।" शौर्य ने ध्यान से सुना। "वह वहां कैसे पहुंचीं?" आर्यन ने सिर हिलाया। "मुझे नहीं पता।" "उन्होंने मुझे कुछ नहीं बताया।" "बस इतना कहा कि मैं उस चिन्ह के पीछे नहीं जाऊं।" शौर्य ने पूछा, "तुमने उनकी बात मानी?" आर्यन के चेहरे पर हल्की, कड़वी मुस्कान आई। "कुछ समय के लिए।" फिर वह चुप हो गया। शौर्य ने महसूस किया कि यहां कोई बहुत पुराना रहस्य था। एक ऐसा रहस्य जिसके बारे में आर्यन ने इतने वर्षों तक किसी से बात नहीं की थी। "फिर क्या हुआ?" आर्यन ने दीवार की ओर देखा। "कुछ साल बाद मैं उनसे फिर मिला।" "इस बार वह मुझे ढूंढते हुए आई थीं।" "उन्होंने कहा कि सातवां चिन्ह मेरे पीछे नहीं था।" शौर्य ने पूछा, "फिर?" आर्यन की आवाज बहुत धीमी हो गई। "वह तुम्हारे पीछे था।" शौर्य की आंखें फैल गईं। कुछ क्षण तक उसे लगा कि उसने ठीक से सुना नहीं। "मेरे पीछे?" आर्यन ने सिर हिलाया। "तुम तब पैदा भी नहीं हुए थे।" शौर्य ने दीवार की तरफ देखा। उसकी मां की आवाज जैसे अब भी हवा में मौजूद थी। "उन्होंने मुझे बताया था कि कुछ ऊर्जा जन्म से पहले ही किसी व्यक्ति से जुड़ सकती है।" "उन्होंने कहा था कि तुम्हारे जन्म के समय कुछ हुआ था।" शौर्य ने पूछा, "क्या?" आर्यन चुप हो गया। उसने अपनी आंखें बंद कर लीं। जैसे उस बात को याद करना उसके लिए आसान नहीं था। "तुम्हारे जन्म की रात सातवां चिन्ह पहली बार पूरी तरह जागा था।" शौर्य की सांस थम गई। "मेरे जन्म की रात?" "हाँ।" "और मेरी मां वहां थीं?" "हाँ।" "तुम भी?" आर्यन ने सिर हिलाया। "हाँ।" कुछ क्षण तक शौर्य कुछ बोल नहीं पाया। उसके मन में अपनी मां की धुंधली यादें आने लगीं। उनका चेहरा। उनकी आवाज। उनका हाथ। और एक अजीब सपना जो उसे बचपन से आता था। एक नीली रोशनी। एक विशाल दरवाजा। और किसी की आवाज। लेकिन उसने कभी उस सपने को गंभीरता से नहीं लिया था। अब उसे समझ आ रहा था कि वह सपना शायद सपना था ही नहीं। शौर्य ने धीरे से पूछा, "उस रात क्या हुआ था?" आर्यन ने उत्तर देने के लिए मुंह खोला। लेकिन तभी पत्थर की दीवार में दरार दिखाई दी। नीली रोशनी उस दरार के भीतर चली गई। और एक छोटा-सा कमरा सामने आ गया। कमरे के भीतर कुछ नहीं था। सिर्फ एक पत्थर की मेज। उस पर एक छोटा लकड़ी का डिब्बा रखा था। शौर्य धीरे-धीरे उसके पास गया। डिब्बे पर कोई ताला नहीं था। उसने उसे खोल दिया। अंदर एक पुरानी लकड़ी की माला थी। शौर्य ने उसे देखते ही पहचान लिया। आर्यन की मां की माला। वही जिसे उसने अपनी स्मृति में छोटे आर्यन के हाथ में देखा था। लेकिन इस बार माला के साथ एक मुड़ा हुआ कागज भी था। शौर्य ने उसे उठाया। कागज बहुत पुराना था। उस पर केवल कुछ शब्द लिखे थे। "जिसे यह मिले, वह आर्यन पर विश्वास करे।" शौर्य ने आर्यन की तरफ देखा। आर्यन की आंखों में आश्चर्य था। "यह यहां कैसे आया?" उसने माला को हाथ में लिया। कुछ क्षण बाद उसकी उंगलियां कांपने लगीं। "यह मां की है।" शौर्य ने पूछा, "उन्होंने इसे तुम्हारे लिए छोड़ा था?" आर्यन ने सिर हिलाया। "नहीं।" "तो?" आर्यन ने कागज को फिर देखा। "तुम्हारे लिए।" शौर्य चुप रह गया। आर्यन ने आगे कहा, "लेकिन मुझे नहीं पता था कि उन्होंने इसे यहां छिपाया था।" शौर्य ने माला को ध्यान से देखा। उसमें सात छोटे मोती थे। लेकिन बीच वाला मोती बाकी छह से अलग था। वह काला था। शौर्य ने उसे छुआ। तुरंत उसकी हथेली गर्म हो गई। आर्यन ने कहा, "मत छुओ।" लेकिन बहुत देर हो चुकी थी। कमरे में तेज रोशनी फैल गई। इस बार उसकी मां सामने नहीं आईं। एक आवाज आई। "आर्यन।" आर्यन की आंखें फैल गईं। "मां..." शौर्य ने उसकी तरफ देखा। आवाज फिर आई। "अगर तुमने यह माला अपने हाथ में ली है, तो इसका अर्थ है कि तुमने सातवां बंधन स्वीकार कर लिया है।" आर्यन की सांसें भारी हो गईं। "लेकिन मैंने यह कभी नहीं..." आवाज ने उसकी बात काट दी। "मैं जानती हूं।" "तुमने अपनी इच्छा से वह बंधन नहीं चुना था।" आर्यन की आंखों में अविश्वास था। शौर्य ने भी ध्यान से सुना। आवाज जारी रही। "तुम्हें लगता रहा कि तुमने शक्ति को चुना।" "लेकिन सच यह है कि शक्ति ने तुम्हें बहुत पहले चुन लिया था।" आर्यन पीछे हट गया। उसके चेहरे पर वर्षों पुराना डर लौट आया। शौर्य ने पूछा, "क्या मतलब है इसका?" आर्यन ने कोई उत्तर नहीं दिया। उसकी मां की आवाज फिर आई। "आर्यन, तुम दोषी हो।" आर्यन की आंखें बंद हो गईं। "लेकिन उस चीज के लिए नहीं जिसके लिए तुम खुद को दोष देते रहे हो।" आर्यन की आंखों से आंसू गिरने लगे। "तुम्हारी सबसे बड़ी गलती शक्ति को स्वीकार करना नहीं थी।" "तुम्हारी सबसे बड़ी गलती यह मानना थी कि तुम अकेले इसे नियंत्रित कर सकते हो।" कमरे में अचानक हवा भारी हो गई। "सातवां बंधन केवल एक शक्ति नहीं है।" "यह एक विरासत है।" "और हर पीढ़ी में केवल एक व्यक्ति इसे धारण कर सकता है।" शौर्य का दिल तेज धड़कने लगा। उसने धीरे से पूछा, "तो आर्यन से पहले कौन था?" आवाज कुछ क्षण शांत रही। फिर उसने उत्तर दिया। "मैं।" शौर्य और आर्यन दोनों स्तब्ध रह गए। शौर्य ने अपनी मां की ओर जैसे पहली बार किसी बिल्कुल अलग नजर से देखा। आर्यन ने फुसफुसाकर कहा, "नहीं।" उसकी आवाज कांप रही थी। "यह संभव नहीं है।" आवाज शांत थी। "मैंने वह बंधन वर्षों पहले अपने भीतर रखा था।" "फिर जब तुम्हारे जन्म की रात सातवां चिन्ह जागा, तो मैंने उसे तुम्हारे भीतर स्थानांतरित कर दिया।" आर्यन का चेहरा सफेद पड़ गया। "तो..." उसकी आवाज टूट गई। "तो वह शक्ति..." आवाज ने कहा। "मेरी थी।" कमरे में पूर्ण शांति छा गई। आर्यन ने अपनी मां की माला को कसकर पकड़ लिया। उसकी आंखों से आंसू बहने लगे। वह जमीन पर बैठ गया। शौर्य ने उसकी तरफ देखा। इतने वर्षों तक आर्यन जिस शक्ति को अपना सबसे बड़ा अपराध मानता रहा था, वह वास्तव में उसकी मां से जुड़ी हुई थी। लेकिन रहस्य अभी खत्म नहीं हुआ था। क्योंकि आवाज ने आखिरी बात कही। "और एक बात अभी बाकी है।" शौर्य ने सिर उठाया। "क्या?" आवाज उसकी तरफ मुड़ी। "तुम्हारे जन्म के समय मैंने बंधन तुम्हें नहीं दिया था।" शौर्य की सांस रुक गई। "तो फिर?" कुछ क्षण कोई आवाज नहीं आई। फिर केवल एक वाक्य सुनाई दिया। "किसी और ने उसे तुम्हारे भीतर रखा था।" नीली रोशनी बुझ गई। कमरा फिर अंधेरे में डूब गया। शौर्य वहीं खड़ा रह गया। उसके हाथ में अब भी वह लकड़ी की माला थी। आर्यन जमीन पर बैठा था। उसकी आंखों में केवल एक ही सवाल था। और पहली बार। उस सवाल का जवाब जानने की इच्छा से ज्यादा उसमें डर था। क्योंकि अब यह स्पष्ट था। आर्यन की मां केवल इस रहस्य की गवाह नहीं थीं। वह स्वयं उस रहस्य का हिस्सा थीं। लेकिन अगर उन्होंने सातवें बंधन को आर्यन से शौर्य तक पहुंचाया था, तो शौर्य के जन्म की रात वहां कोई तीसरा व्यक्ति भी मौजूद था। और वह कौन था। यही अगला रहस्य था।

End of Chapter 23

Chapter 23: मां की आखिरी निशानी - समंदर का Sikandar | Novel AI Studio