Chapter 22 of 30
अधूरे वादे की कीमत
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कमरे में अब कोई आवाज नहीं थी।
सातवें चिन्ह की रोशनी दीवार पर स्थिर हो चुकी थी।
कुछ देर पहले तक जिस कमरे में अतीत की आवाजें गूंज रही थीं, वहां अब केवल चार लोग खड़े थे।
शौर्य।
आर्यन।
नीरिका।
और जलछाया।
लेकिन उन चारों के बीच अब पहले जैसी शांति नहीं थी।
शौर्य के मन में बहुत सारे सवाल थे।
वह उन सवालों को तुरंत पूछ सकता था।
लेकिन उसने ऐसा नहीं किया।
उसने आर्यन को देखा।
आर्यन की नजर अभी भी उस रास्ते पर टिकी थी जो सातवें चिन्ह के भीतर बना था।
वह रास्ता किसी साधारण दरवाजे जैसा नहीं था।
वह पत्थर पर बनी एक पतली रेखा थी, लेकिन उसके भीतर इतनी गहरी ऊर्जा थी कि शौर्य को दूर खड़े होकर भी उसकी गर्मी महसूस हो रही थी।
आर्यन ने आखिरकार कहा, "यहीं से आगे जाना आसान नहीं होगा।"
शौर्य ने पूछा, "क्यों?"
आर्यन ने उसकी तरफ देखा।
"क्योंकि इस रास्ते पर शक्ति तुम्हें रोकने की कोशिश नहीं करेगी।"
शौर्य कुछ समझ नहीं पाया।
"फिर?"
"वह तुम्हें तुम्हारे अपने भीतर से रोकने की कोशिश करेगी।"
कमरे में फिर शांति फैल गई।
शौर्य ने उस रास्ते को देखा।
"और तुम्हारे साथ ऐसा हुआ था?"
आर्यन ने सिर हिलाया।
"हाँ।"
"तब तुम कितने समय तक अंदर रहे?"
आर्यन ने उत्तर देने से पहले कुछ क्षण सोचा।
"मुझे नहीं पता।"
शौर्य ने उसकी तरफ देखा।
आर्यन ने कहा, "वहां समय वैसे नहीं चलता जैसे बाहर चलता है।"
"एक दिन वहां शायद एक साल जैसा लगता है।"
"और कभी-कभी एक साल एक पल जैसा।"
शौर्य ने धीमे स्वर में पूछा, "तुम अकेले थे?"
आर्यन ने कुछ क्षण आंखें बंद रखीं।
"नहीं।"
उसने अपनी कलाई की तरफ देखा।
"वह मेरे साथ था।"
शौर्य समझ गया।
वही शक्ति।
वही अस्तित्व।
जिसे आर्यन ने वर्षों पहले अपने भीतर आने दिया था।
नीरिका अब तक चुप थी।
उसने पहली बार पूछा, "अगर वह शक्ति अभी भी उसके भीतर है, तो वह उसे पूरी तरह छोड़ क्यों नहीं देता?"
आर्यन ने नीरिका की तरफ देखा।
"क्योंकि कुछ बंधन तोड़ने के लिए केवल शक्ति काफी नहीं होती।"
"कभी-कभी तुम्हें उस चीज को स्वीकार करना पड़ता है जिससे तुम भागते रहे हो।"
नीरिका कुछ कहने वाली थी, लेकिन रुक गई।
शौर्य ने महसूस किया कि आर्यन कुछ छिपा नहीं रहा था।
लेकिन वह अभी भी पूरी बात नहीं बता रहा था।
उसने पूछा, "तुमने मुझे मेरी मां के बारे में सब कुछ क्यों नहीं बताया?"
आर्यन की आंखें कुछ पल के लिए बंद हो गईं।
यह सवाल शायद वही था जिससे वह सबसे ज्यादा डरता था।
"क्योंकि तुम्हारी मां ने मुझे मना किया था।"
शौर्य चौंका।
"उन्होंने?"
"हाँ।"
"कब?"
आर्यन धीरे-धीरे दीवार के पास जाकर खड़ा हो गया।
उसने पत्थर पर हाथ रखा।
"तुम्हारे जन्म से कुछ महीने पहले।"
शौर्य कुछ कदम आगे आया।
"क्या हुआ था?"
आर्यन ने गहरी सांस ली।
"तुम्हारी मां तब पहली बार मेरे पास आई थीं।"
उसकी आवाज में हल्का बदलाव आया।
अब वह केवल किसी पुरानी घटना के बारे में नहीं बता रहा था।
वह उसे फिर से जी रहा था।
"वह रात बहुत शांत थी।"
"इतनी शांत कि मुझे दूर पहाड़ी से बहती हवा तक सुनाई दे रही थी।"
आर्यन कुछ क्षण चुप रहा।
फिर उसकी आवाज और धीमी हो गई।
"तुम्हारी मां अकेली आई थीं।"
"उन्होंने दरवाजा खटखटाया।"
"मैंने खोला।"
"और उन्हें देखकर ही समझ गया कि कुछ बहुत गंभीर हुआ है।"
शौर्य ध्यान से सुन रहा था।
आर्यन ने आगे कहा, "उनके चेहरे पर डर था। लेकिन वह अपने लिए नहीं डर रही थीं।"
"वह तुम्हारे लिए डर रही थीं।"
शौर्य की सांस थोड़ी धीमी हो गई।
आर्यन ने आंखें बंद कर लीं।
"उन्होंने मुझे तुम्हारे बारे में बताया।"
"कहा कि तुम्हारे जन्म से पहले ही उन्होंने तुम्हारी ऊर्जा महसूस कर ली थी।"
"लेकिन उन्हें यह नहीं पता था कि वह ऊर्जा इतनी असामान्य क्यों थी।"
शौर्य ने पूछा, "और फिर?"
आर्यन ने कहा, "उन्होंने मुझसे एक वादा लिया।"
"कौन सा?"
आर्यन ने शौर्य की तरफ देखा।
"अगर कभी तुम्हारे भीतर सातवें चिन्ह की प्रतिक्रिया दिखाई दे, तो मैं तुम्हें उस शक्ति से दूर रखूंगा।"
शौर्य कुछ क्षण चुप रहा।
"लेकिन तुमने मुझे उससे दूर नहीं रखा।"
आर्यन की आंखें झुक गईं।
"क्योंकि तब तक बहुत देर हो चुकी थी।"
शौर्य ने कुछ नहीं कहा।
आर्यन ने धीरे से आगे कहा, "मैंने तुम्हें पहली बार तब देखा था जब तुम बहुत छोटे थे।"
शौर्य की आंखों में हल्का आश्चर्य आया।
"तुमने मुझे देखा था?"
"हाँ।"
"कहाँ?"
"तुम्हारे घर के बाहर।"
आर्यन के चेहरे पर हल्की मुस्कान आई।
"तुम तब चलना सीख रहे थे।"
"तुम बार-बार गिरते थे।"
"फिर उठते थे।"
"फिर गिरते थे।"
शौर्य के चेहरे पर भी हल्की मुस्कान आ गई।
आर्यन ने कहा, "तुम्हारी मां हर बार तुम्हें उठाने के लिए दौड़ती थीं।"
"लेकिन एक बार उन्होंने मुझे रोक दिया।"
"उन्होंने कहा, उसे खुद उठने दो।"
आर्यन कुछ क्षण चुप रहा।
"तुम जमीन पर बैठे रो रहे थे।"
"लेकिन कुछ ही सेकंड बाद तुमने खुद हाथ जमीन पर रखा और उठ गए।"
शौर्य धीरे से बोला, "मुझे कुछ याद नहीं।"
"मुझे याद है।"
आर्यन की आवाज में ऐसी गर्मी थी जो शौर्य ने उसके भीतर बहुत कम देखी थी।
"तुम्हारी मां उस दिन बहुत खुश हुई थीं।"
"उन्होंने कहा था कि तुम गिरने से डरोगे नहीं।"
शौर्य ने धीरे से पूछा, "उन्होंने ऐसा क्यों कहा?"
आर्यन ने उसकी आंखों में देखा।
"क्योंकि उन्हें पता था कि तुम्हारा जीवन आसान नहीं होगा।"
कुछ पल दोनों के बीच मौन रहा।
फिर शौर्य ने पूछा, "क्या उन्हें पता था कि मैं यहां तक आऊंगा?"
आर्यन ने सिर हिलाया।
"उन्हें शक था।"
"यकीन नहीं।"
"उन्होंने कहा था कि अगर तुम्हें कभी सातवें चिन्ह की ओर खिंचाव महसूस हो, तो इसका मतलब होगा कि पुराना बंधन कमजोर हो रहा है।"
शौर्य ने सातवें चिन्ह की ओर देखा।
अब वह बहुत शांत था।
"तो यह सब पहले से तय था?"
आर्यन ने तुरंत कहा, "नहीं।"
उसकी आवाज पहली बार थोड़ी कठोर हुई।
"यही बात तुम्हें समझनी होगी।"
शौर्य ने उसकी तरफ देखा।
आर्यन उसके करीब आया।
"कुछ रास्ते हमारे सामने रखे जाते हैं।"
"लेकिन उन पर चलना या नहीं चलना हमारा फैसला होता है।"
"तुम्हारी मां ने तुम्हारे लिए भविष्य नहीं लिखा था।"
"उन्होंने सिर्फ तुम्हें भविष्य चुनने का मौका देने की कोशिश की थी।"
शौर्य चुप रहा।
यह बात उसके मन में गहराई तक उतर गई।
कुछ देर बाद उसने पूछा, "और अब?"
आर्यन ने सातवें चिन्ह की तरफ देखा।
"अब वह मौका तुम्हारे सामने है।"
शौर्य ने धीरे से कहा, "मुझे डर नहीं लग रहा।"
आर्यन ने उसकी तरफ देखा।
"डर लगना जरूरी है।"
शौर्य थोड़ा चौंका।
आर्यन ने कहा, "जो शक्ति से बिल्कुल नहीं डरता, वह अक्सर शक्ति को समझता भी नहीं।"
"तुम डरे थे?"
आर्यन ने बहुत हल्की हंसी दी।
"हर बार।"
"फिर भी आगे बढ़े?"
"हाँ।"
"क्यों?"
आर्यन ने उत्तर नहीं दिया।
कुछ देर बाद बोला, "क्योंकि मुझे लगता था कि डर कमजोरी है।"
उसने अपनी मुट्ठी बंद कर ली।
"अब समझता हूं कि डर कभी-कभी चेतावनी होता है।"
शौर्य ने पहली बार आर्यन की बात में कोई पछतावा नहीं, बल्कि अनुभव सुना।
वह अनुभव जो वर्षों के दर्द से आया था।
नीरिका धीरे-धीरे आगे आई।
"अगर हम इस रास्ते पर जाते हैं, तो वापस लौट सकते हैं?"
आर्यन ने उसकी तरफ देखा।
"शायद।"
नीरिका ने तुरंत पूछा, "शायद?"
आर्यन ने कहा, "मैं झूठ नहीं बोलूंगा।"
"मुझे नहीं पता।"
"लेकिन इतना पता है कि अगर हम कुछ किए बिना यहां खड़े रहे, तो जो चीज सातवें चिन्ह के पीछे बंद है, वह खुद बाहर आने की कोशिश करेगी।"
शौर्य ने पूछा, "और अगर वह बाहर आ गई?"
आर्यन ने कुछ नहीं कहा।
उसकी चुप्पी पर्याप्त थी।
जलछाया अचानक आगे बढ़ा।
उसकी काली आकृति जमीन पर लंबी हो गई।
वह सातवें चिन्ह के सामने जाकर रुक गया।
उसकी आंखों में हल्की नीली रोशनी चमकी।
आर्यन ने उसे देखा।
"उसे भी महसूस हो रहा है।"
शौर्य ने पूछा, "क्या?"
"दरवाजे के पीछे कुछ जाग रहा है।"
उसी समय दीवार के भीतर से बहुत हल्की धड़कन सुनाई दी।
धक।
शौर्य का शरीर तन गया।
कुछ सेकंड बाद फिर वही आवाज आई।
धक।
इस बार थोड़ी तेज।
फिर तीसरी बार।
धक।
नीरिका ने धीमे स्वर में कहा, "यह धड़कन जैसी क्यों है?"
आर्यन ने उत्तर दिया, "क्योंकि यह कोई साधारण ऊर्जा स्रोत नहीं है।"
शौर्य ने पूछा, "फिर क्या है?"
आर्यन ने उसकी आंखों में देखा।
"एक जीवित बंधन।"
शौर्य कुछ समझ नहीं पाया।
आर्यन ने कहा, "जिस शक्ति से मैंने वर्षों पहले बंधन बनाया था, वह अकेली नहीं थी।"
"उसके साथ एक चेतना भी थी।"
"मैंने उसे केवल शक्ति समझा।"
"लेकिन वह मुझे समझ रही थी।"
"मेरे डर।"
"मेरी इच्छाएं।"
"मेरी कमजोरियां।"
"और मेरी सबसे बड़ी गलती।"
शौर्य ने पूछा, "क्या?"
आर्यन ने कहा, "मैं उसे नष्ट करना चाहता था।"
"क्यों?"
"क्योंकि मुझे लगा कि अगर वह नहीं रहेगी तो मेरी सारी समस्याएं खत्म हो जाएंगी।"
वह कुछ पल चुप रहा।
"लेकिन मैं यह भूल गया था कि वह मेरे भीतर थी।"
शौर्य ने धीरे से पूछा, "तो उसे नष्ट करना मतलब..."
आर्यन ने सिर हिलाया।
"खुद को नष्ट करना।"
कमरे में फिर सन्नाटा छा गया।
शौर्य ने अपनी हथेली देखी।
उसकी हथेली पर नीली ऊर्जा धीरे-धीरे घूम रही थी।
वह ऊर्जा अब पहले से अधिक स्थिर थी।
लेकिन उसके भीतर एक अजीब कंपन था।
जैसे वह किसी चीज का इंतजार कर रही हो।
शौर्य ने अपनी उंगलियां बंद कर लीं।
"अगर वह मेरे भीतर भी आने की कोशिश करे तो?"
आर्यन तुरंत उसकी तरफ आया।
"तुम उसे अपने भीतर आने मत देना।"
"कैसे?"
आर्यन कुछ क्षण सोचता रहा।
फिर उसने कहा, "अपने डर से भागना मत।"
शौर्य ने उसकी तरफ देखा।
"क्या मतलब?"
"जब वह तुम्हें तुम्हारी सबसे कमजोर याद दिखाए, तो उससे नजर मत हटाना।"
"जब वह तुम्हें कोई आसान रास्ता दिखाए, तो उस पर भरोसा मत करना।"
"और जब वह तुम्हें शक्ति देने का वादा करे..."
आर्यन की आवाज धीमी हो गई।
"तो उससे पूछना कि उसकी कीमत क्या है।"
शौर्य ने सिर हिलाया।
वह आगे बढ़ा।
सातवें चिन्ह के पास जाकर उसने अपना हाथ उठाया।
आर्यन ने उसे रोकने के लिए हाथ बढ़ाया।
लेकिन इस बार उसने खुद को रोक लिया।
उसने केवल कहा, "तैयार हो?"
शौर्य ने कुछ क्षण आंखें बंद कीं।
उसने अपनी मां का चेहरा याद किया।
फिर उसने आर्यन का अतीत याद किया।
देव।
मीरा।
अंश।
और वह छोटा आर्यन जो मिट्टी में सातवां चिन्ह बनाता था और उसे केवल एक रहस्य समझता था।
शौर्य ने आंखें खोलीं।
"नहीं।"
आर्यन ने उसकी तरफ देखा।
शौर्य ने कहा, "लेकिन मैं जाऊंगा।"
आर्यन के चेहरे पर हल्की मुस्कान आई।
"यही सही उत्तर है।"
शौर्य ने हाथ आगे बढ़ाया।
उसकी उंगलियां पत्थर को छूने ही वाली थीं कि सातवें चिन्ह की रोशनी अचानक बदल गई।
इस बार नीली नहीं।
सफेद।
इतनी तेज कि कुछ क्षण के लिए सभी को अपनी आंखें बंद करनी पड़ीं।
शौर्य ने आंखें खोलीं।
उसके सामने अब कोई दरवाजा नहीं था।
उसकी जगह एक विशाल मैदान था।
आकाश काला था।
जमीन पर टूटे हुए पत्थर पड़े थे।
दूर कहीं एक अकेला पेड़ खड़ा था।
और उस पेड़ के नीचे एक लड़का बैठा था।
शौर्य उसे देखते ही रुक गया।
वह लड़का आर्यन था।
लेकिन यह वह आर्यन नहीं था जिसे उसने पहले देखा था।
यह उससे भी छोटा था।
शायद तेरह वर्ष का।
वह पेड़ के नीचे अकेला बैठा था।
उसके हाथ में उसकी मां की दी हुई छोटी लकड़ी की माला थी।
वह उसे अपनी हथेली में दबाए हुए था।
शौर्य ने पीछे देखा।
आर्यन वहां नहीं था।
नीरिका भी नहीं।
जलछाया भी नहीं।
केवल वह।
और वह पुराना दृश्य।
लेकिन इस बार शौर्य को समझ नहीं आ रहा था कि वह अतीत देख रहा है या किसी और की स्मृति में प्रवेश कर चुका है।
छोटा आर्यन धीरे-धीरे बोल रहा था।
"मैं आपको कभी नहीं भूलूंगा।"
शौर्य ने ध्यान से सुना।
वह अकेला नहीं था।
उसके सामने उसकी मां बैठी थी।
वह शायद वही रात थी जब उसने पहली बार सातवें चिन्ह के बारे में उससे कुछ छिपाया था।
उसकी मां ने पूछा, "अगर एक दिन तुम्हें दो रास्तों में से एक चुनना पड़े तो?"
छोटे आर्यन ने कहा, "मैं सही रास्ता चुनूंगा।"
उसकी मां ने मुस्कुराकर पूछा, "अगर तुम्हें पता ही न हो कि सही रास्ता कौन सा है?"
आर्यन कुछ देर चुप रहा।
फिर बोला, "तो मैं आपसे पूछूंगा।"
उसकी मां ने उसकी तरफ देखा।
उसकी आंखें भर आईं।
"और अगर मैं वहां न रहूं?"
आर्यन ने तुरंत कहा, "आप रहेंगी।"
उसकी मां ने उसकी बात का उत्तर नहीं दिया।
उसने केवल उसके सिर पर हाथ रखा।
फिर बहुत धीमी आवाज में कहा।
"अगर मैं न रहूं, तो अपने दिल की आवाज सुनना।"
आर्यन ने पूछा, "दिल झूठ बोल सकता है?"
उसकी मां मुस्कुराई।
"दिल नहीं।"
"लेकिन डर दिल की आवाज को ढक सकता है।"
दृश्य में हवा चलने लगी।
छोटे आर्यन ने अपनी मां का हाथ पकड़ लिया।
शौर्य की आंखों के सामने वह दृश्य धीरे-धीरे धुंधला होने लगा।
लेकिन इस बार वह पीछे नहीं हटा।
उसे समझ आ गया था कि यह केवल आर्यन का अतीत नहीं था।
यह एक संदेश था।
और शायद पहली बार वह संदेश उसके लिए था।
अचानक उसके कानों में आर्यन की आवाज गूंजी।
बहुत दूर से।
"शौर्य।"
उसने आंखें बंद कीं।
फिर आवाज आई।
"वापस आओ।"
शौर्य ने आंखें खोलीं।
वह फिर उसी कमरे में था।
उसके सामने आर्यन खड़ा था।
उसका हाथ अभी भी सातवें चिन्ह के पास था।
नीरिका कुछ दूरी पर खड़ी थी।
जलछाया उसके पैरों के पास था।
लेकिन आर्यन के चेहरे पर अब पहले जैसी शांति नहीं थी।
वह चिंतित था।
शौर्य ने पूछा, "क्या हुआ?"
आर्यन ने उसकी कलाई पकड़ ली।
"तुम उसके भीतर चले गए थे।"
"किसके?"
आर्यन ने सातवें चिन्ह की तरफ देखा।
"उस चेतना के।"
शौर्य ने धीरे से पूछा, "उसने मुझे कुछ दिखाया।"
आर्यन का चेहरा गंभीर हो गया।
"क्या?"
शौर्य कुछ क्षण चुप रहा।
फिर बोला, "तुम्हारी मां।"
आर्यन जैसे जम गया।
शौर्य ने उसकी आंखों में देखा।
"उन्होंने तुम्हें कहा था कि अगर वह न रहें तो अपने दिल की आवाज सुनना।"
आर्यन की सांस अटक गई।
उसने कुछ कहने की कोशिश की।
लेकिन शब्द नहीं निकले।
कई वर्षों से बंद कोई दरवाजा जैसे अचानक भीतर खुल गया था।
उसकी आंखों में आंसू आ गए।
"उन्होंने... यह कहा था?"
शौर्य ने सिर हिलाया।
आर्यन ने नजरें झुका लीं।
उसके होंठ कांप रहे थे।
"मैंने वह हिस्सा भूल गया था।"
शौर्य ने पूछा, "तुम भूल गए थे?"
आर्यन ने कहा, "नहीं।"
कुछ पल बाद उसने खुद ही अपनी बात सुधारी।
"मैंने उसे दबा दिया था।"
उसने आंखें बंद कर लीं।
"क्योंकि अगर मुझे याद रहता कि उन्होंने मुझे अपने दिल की आवाज सुनने को कहा था..."
उसकी आवाज टूट गई।
"तो शायद मैं इतना कुछ नहीं करता।"
शौर्य उसके पास खड़ा रहा।
उसने कुछ नहीं कहा।
क्योंकि उस समय किसी सलाह की जरूरत नहीं थी।
सिर्फ किसी के वहां रहने की जरूरत थी।
कुछ देर बाद आर्यन ने अपनी आंखें खोलीं।
उनमें अब वही पुराना पछतावा था।
लेकिन उसके साथ कुछ और भी था।
निर्णय।
"शौर्य।"
"हाँ?"
"अब मैं तुम्हें रोकूंगा नहीं।"
शौर्य ने उसकी तरफ देखा।
आर्यन ने कहा, "लेकिन मैं तुम्हें अकेला भी नहीं जाने दूंगा।"
शौर्य ने हल्की मुस्कान के साथ पूछा, "तुम्हें डर लग रहा है?"
आर्यन ने इस बार बिना झिझके उत्तर दिया।
"बहुत।"
शौर्य ने सिर हिलाया।
"तो ठीक है।"
उसने सातवें चिन्ह की तरफ देखा।
"इस बार हम डर के साथ आगे बढ़ेंगे।"
आर्यन की आंखों में हल्की चमक आई।
दोनों ने एक साथ उस रास्ते की ओर देखा।
अब वह पहले से स्पष्ट था।
और उसके पार अंधेरा नहीं था।
एक विशाल दुनिया थी।
एक ऐसी दुनिया जो वर्षों से बंद थी।
एक ऐसी दुनिया जिसमें आर्यन का अधूरा अतीत, शौर्य का अनजाना भविष्य और सातवें चिन्ह का वास्तविक रहस्य एक ही जगह मिलने वाले थे।
शौर्य ने पहला कदम आगे बढ़ाया।
आर्यन उसके साथ चला।
नीरिका ने उनके पीछे कदम बढ़ाया।
जलछाया सबसे अंत में उस रास्ते में प्रवेश कर गया।
और जैसे ही चारों उस सीमा को पार कर गए, उनके पीछे सातवां चिन्ह धीरे-धीरे बंद हो गया।
इस बार कोई आवाज नहीं हुई।
कोई चेतावनी नहीं।
कोई धमकी नहीं।
सिर्फ एक अंतिम कंपन।
जैसे किसी बहुत पुराने बंधन ने आखिरकार उन्हें अंदर आने की अनुमति दे दी हो।
आगे क्या था, यह कोई नहीं जानता था।
लेकिन आर्यन जानता था कि वह जिस जगह से वर्षों पहले भागा था, अब उसी जगह लौट रहा था।
फर्क केवल इतना था।
तब वह अकेला था।
अब उसके साथ शौर्य था।
और शायद इस बार।
उसे खुद को बचाने के लिए किसी और को खोना नहीं पड़ेगा।