Chapter 20 of 30

आर्यन का अतीत

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शौर्य दरवाजे के सामने खड़ा था। उसकी उंगलियां अभी भी पत्थर की ठंडी सतह को छू रही थीं। दरवाजे पर लिखा एक शब्द हल्की नीली रोशनी में चमक रहा था। सत्य। शौर्य ने उस शब्द को कुछ क्षण देखा। उसके पीछे आर्यन खड़ा था। लेकिन इस बार आर्यन की आंखों में पहले जैसी कठोरता नहीं थी। वह शांत था। बहुत शांत। जैसे वह पहले से जानता था कि इस दरवाजे के पार क्या है। शौर्य ने धीरे से पूछा, "इसके पीछे क्या है?" आर्यन ने उत्तर देने में कुछ समय लिया। "मेरा अतीत।" शौर्य ने उसकी तरफ देखा। "सिर्फ तुम्हारा?" आर्यन ने सिर हिलाया। "नहीं।" उसकी आवाज बहुत धीमी थी। "तुम्हारा भी।" शौर्य कुछ नहीं बोला। आर्यन ने आगे कहा, "लेकिन जो कुछ तुम देखोगे, वह मेरी यादों की तरह नहीं होगा।" "फिर?" "तुम उसे वैसे देखोगे जैसे वह वास्तव में हुआ था।" शौर्य ने भौंहें सिकोड़ लीं। "तो फिर अब तक तुमने मुझे क्या बताया?" आर्यन की आंखें कुछ क्षण के लिए झुक गईं। "जितना मुझे लगता था कि तुम संभाल सकते हो।" शौर्य ने कुछ नहीं कहा। फिर उसने दरवाजा खोल दिया। अंदर से कोई तेज रोशनी नहीं आई। केवल एक हल्की गर्म हवा बाहर आई। शौर्य ने पहला कदम अंदर रखा। आर्यन उसके पीछे चला। नीरिका और जलछाया भी साथ थे। कुछ कदम आगे बढ़ने के बाद कमरे की दीवारें अचानक धुंधली होने लगीं। पत्थर गायब हो गया। अंधेरा गायब हो गया। और उनके सामने एक दूसरी दुनिया बनने लगी। शौर्य ने चारों ओर देखा। वह एक छोटे से गांव में खड़ा था। सुबह का समय था। आकाश हल्का नीला था। दूर पहाड़ियों के पीछे सूरज निकल रहा था। कुछ घरों से धुआं उठ रहा था। बच्चे रास्ते पर दौड़ रहे थे। कुछ लोग पानी भरने जा रहे थे। सब कुछ सामान्य था। लेकिन शौर्य को तुरंत समझ आ गया कि वह वर्तमान में नहीं था। वह अतीत देख रहा था। आर्यन उसके बगल में खड़ा था। लेकिन अब वह वैसा नहीं दिख रहा था जैसा वर्तमान में था। वह बहुत छोटा था। शायद आठ या नौ वर्ष का। उसके बाल छोटे थे। चेहरे पर मासूमियत थी। और उसकी आंखों में अभी वह गहराई नहीं आई थी जो शौर्य ने वर्तमान आर्यन की आंखों में देखी थी। एक स्त्री घर से बाहर आई। उसके हाथ में मिट्टी का एक छोटा पात्र था। उसने छोटे आर्यन को आवाज दी। "आर्यन।" बच्चा दौड़कर उसके पास आया। "मां।" स्त्री ने उसके सिर पर हाथ रखा। "इतनी सुबह कहाँ चले गए थे?" आर्यन ने मुस्कुराकर कहा, "नदी के पास।" "अकेले?" आर्यन ने चुपचाप सिर हिला दिया। उसकी मां ने चिंता से उसे देखा। फिर उसके कंधे पर हाथ रखा। "बहुत दूर मत जाया करो।" छोटे आर्यन ने पूछा, "क्यों?" उसकी मां ने कुछ क्षण नदी की दिशा में देखा। "क्योंकि जंगल के उस पार की दुनिया तुम्हारी समझ से बड़ी है।" आर्यन ने उत्सुकता से पूछा, "उससे भी बड़ी?" उसकी मां मुस्कुराई। "बहुत बड़ी।" वह दृश्य धीरे-धीरे आगे बढ़ा। दिन बदलते गए। आर्यन बड़ा होने लगा। वह तेज था। दूसरे बच्चों से अलग। उसे चीजें बहुत जल्दी समझ आती थीं। लेकिन उसकी सबसे बड़ी विशेषता उसकी शक्ति नहीं थी। वह दूसरों की ऊर्जा को महसूस कर सकता था। जब कोई व्यक्ति गुस्सा होता, तो उसे उसकी ऊर्जा में बदलाव महसूस होता। जब कोई दुखी होता, तो उसे आसपास की हवा भारी लगती। जब कोई खुश होता, तो वातावरण हल्का हो जाता। उस समय आर्यन को नहीं पता था कि यह कोई विशेष क्षमता है। वह इसे सामान्य समझता था। एक दिन वह गांव के बाहर नदी के किनारे बैठा था। उसकी उम्र लगभग बारह वर्ष थी। उसने पानी में अपना प्रतिबिंब देखा। फिर उसने आंखें बंद कर लीं। उसे पानी के भीतर कुछ महसूस हुआ। एक हल्की धड़कन। उसने आंखें खोलीं। पानी की सतह पर छोटी लहरें बनने लगीं। आर्यन ने हाथ आगे किया। पानी का एक छोटा हिस्सा उठ गया। वह कुछ क्षण हवा में रुका। फिर नीचे गिर गया। आर्यन की आंखें आश्चर्य से फैल गईं। उसने दोबारा कोशिश की। इस बार पानी थोड़ा ऊपर उठा। वह खुश हो गया। लेकिन उसने किसी को नहीं बताया। कई दिनों तक वह अकेले अभ्यास करता रहा। उसकी शक्ति धीरे-धीरे बढ़ने लगी। फिर एक दिन उसकी मां ने उसे देख लिया। वह कुछ देर तक उसे देखती रही। आर्यन ने घबराकर हाथ नीचे कर लिया। "मां..." उसकी मां ने कुछ नहीं कहा। वह उसके पास आई। उसने आर्यन के कंधे पर हाथ रखा। "तुम्हें यह कब से महसूस हो रहा है?" आर्यन ने सच बता दिया। "काफी दिनों से।" उसकी मां कुछ देर चुप रही। फिर बोली, "किसी को मत बताना।" आर्यन ने पूछा, "क्यों?" "क्योंकि हर शक्ति को देखकर लोग खुश नहीं होते।" "कुछ लोग उसे छीनना चाहते हैं।" आर्यन ने पहली बार शक्ति के खतरे के बारे में सुना। लेकिन उस समय वह बहुत छोटा था। उसे लगा कि अगर वह सावधान रहेगा तो सब ठीक रहेगा। वर्ष बीतते गए। आर्यन सोलह वर्ष का हुआ। अब उसकी शक्ति काफी बढ़ चुकी थी। वह केवल पानी को नहीं हिला सकता था। वह आसपास की ऊर्जा को भी महसूस कर सकता था। इसी दौरान उसकी मुलाकात कुछ अन्य युवाओं से हुई। उनमें से एक था देव। दूसरी थी मीरा। और तीसरा था अंश। वे तीनों अलग-अलग क्षेत्रों से आए थे। लेकिन उनका लक्ष्य एक था। शक्ति को समझना। चारों ने साथ प्रशिक्षण शुरू किया। आर्यन पहली बार अकेला नहीं था। वे घंटों अभ्यास करते। कभी नदी के किनारे। कभी जंगल में। कभी पहाड़ियों के बीच। उनके बीच धीरे-धीरे दोस्ती बन गई। आर्यन सबसे शांत था। देव सबसे साहसी। मीरा सबसे समझदार। और अंश सबसे जिज्ञासु। चारों में सबसे अधिक सवाल अंश पूछता था। एक शाम अंश ने कहा, "क्या तुम्हें कभी लगता है कि हमारी शक्ति किसी बड़ी चीज का हिस्सा है?" देव हंस पड़ा। "तुम फिर शुरू हो गए।" अंश ने कहा, "मैं गंभीर हूँ।" मीरा ने पूछा, "तुमने क्या खोजा?" अंश ने जमीन पर एक चिन्ह बनाया। सात रेखाएं। चारों कुछ देर उसे देखते रहे। आर्यन के चेहरे का भाव बदल गया। उसने पूछा, "तुमने यह कहाँ देखा?" अंश ने कहा, "पुराने मंदिर में।" "कौन सा मंदिर?" "उत्तर की पहाड़ियों में।" आर्यन ने उस चिन्ह को ध्यान से देखा। उसे कुछ जाना-पहचाना लगा। बहुत हल्का। लेकिन भीतर कहीं। उस रात चारों ने पहली बार सातवें चिन्ह के बारे में बात की। किसी को कुछ पता नहीं था। लेकिन अंश को विश्वास था कि यह केवल कोई पुराना चिन्ह नहीं है। उसने कहा, "इसका संबंध ऊर्जा के मूल स्रोत से है।" मीरा ने पूछा, "तुम्हें कैसे पता?" अंश ने कहा, "पुराने लेखों में इसका उल्लेख है।" देव ने हंसकर कहा, "और तुमने सारे पुराने लेख पढ़ लिए?" अंश ने मुस्कुराते हुए कहा, "जितने मिले, उतने।" आर्यन चुप था। उस रात उसे पहली बार लगा कि उसकी शक्ति शायद केवल उसकी अपनी नहीं थी। कुछ महीनों बाद चारों उत्तर की पहाड़ियों की तरफ गए। वहाँ उन्हें एक प्राचीन मंदिर मिला। मंदिर लगभग पूरी तरह टूट चुका था। दीवारों पर वही सात चिन्ह बने थे। लेकिन सातवें चिन्ह के सामने एक अलग प्रकार की ऊर्जा थी। आर्यन ने जैसे ही उसके करीब कदम बढ़ाया, उसकी कलाई गर्म हो गई। उसने हाथ देखा। उसकी त्वचा पर बहुत हल्का चिन्ह दिखाई दिया। सिर्फ कुछ क्षण के लिए। फिर गायब हो गया। आर्यन डर गया। मीरा ने पूछा, "क्या हुआ?" आर्यन ने हाथ छिपा लिया। "कुछ नहीं।" उसने झूठ बोला। उस दिन से उसके भीतर एक अजीब बदलाव शुरू हुआ। उसे रात में सपने आने लगे। एक विशाल काला पत्थर। उसके चारों ओर सात ऊर्जा धाराएं। और एक आवाज। हमेशा वही आवाज। "तुम्हें चुना गया है।" आर्यन हर बार नींद से उठ जाता। उसने किसी को नहीं बताया। लेकिन सपने बढ़ते गए। फिर एक रात आवाज ने पहली बार उसका नाम लिया। "आर्यन।" वह अचानक जाग गया। कमरे में कोई नहीं था। लेकिन उसकी कलाई पर सातवाँ चिन्ह जल रहा था। उसने उसे छूने की कोशिश की। तेज दर्द हुआ। उसने हाथ पीछे खींच लिया। अगली सुबह उसने मंदिर जाने का निर्णय किया। अकेले। वह उस पुराने मंदिर में पहुँचा। सूरज अभी पूरी तरह नहीं निकला था। मंदिर के भीतर अंधेरा था। वह सीधे उसी दीवार के पास गया। सातवाँ चिन्ह अब पहले से अधिक स्पष्ट था। आर्यन ने हाथ आगे बढ़ाया। इस बार चिन्ह ने उसे नहीं रोका। उसकी उंगलियां पत्थर को छू गईं। पूरे मंदिर में ऊर्जा की लहर दौड़ गई। जमीन कांपने लगी। और दीवार के पीछे एक छिपा हुआ रास्ता खुल गया। आर्यन कुछ क्षण वहीं खड़ा रहा। उसे वापस जाना चाहिए था। लेकिन वह नहीं गया। वह अंदर चला गया। रास्ता लंबा था। बहुत लंबा। अंत में उसे एक गोल कक्ष मिला। कक्ष के बीच एक काला पत्थर था। वही पत्थर जिसे शौर्य ने अभी कुछ समय पहले देखा था। आर्यन ने उसे पहली बार उसी दिन देखा था। लेकिन उस समय वह शांत था। उसने पत्थर के पास जाकर हाथ बढ़ाया। जैसे ही उसकी उंगलियां पत्थर से छुईं, उसकी आंखों के सामने असंख्य दृश्य घूम गए। युद्ध। विनाश। लोगों की चीखें। विशाल प्राणी। टूटते हुए नगर। और अंत में एक व्यक्ति। उस व्यक्ति के हाथ में सातवाँ चिन्ह था। आर्यन ने हाथ पीछे खींच लिया। लेकिन बहुत देर हो चुकी थी। काले पत्थर के भीतर कुछ जाग चुका था। उसने पहली बार वह आवाज सुनी। "तुमने मुझे खोज लिया।" आर्यन पीछे हट गया। उसने अपनी शक्ति तैयार की। "तुम कौन हो?" आवाज आई। "जिसे तुम्हारे जैसे लोग वर्षों से खोजते आए हैं।" "तुम्हारी शक्ति का स्रोत।" आर्यन ने कहा, "मुझे तुम्हारी शक्ति नहीं चाहिए।" आवाज शांत रही। "अभी नहीं।" आर्यन वहाँ से भाग आया। लेकिन उसने यह बात अपने साथियों को नहीं बताई। कुछ समय तक सब सामान्य रहा। लेकिन फिर आर्यन की शक्ति तेजी से बढ़ने लगी। बहुत तेजी से। इतनी तेजी से कि बाकी तीनों उसके साथ अभ्यास करते समय पीछे रहने लगे। देव ने कहा, "तुमने क्या किया है?" आर्यन ने कहा, "कुछ नहीं।" मीरा उसे देखती रही। उसे विश्वास नहीं हुआ। अंश ने पूछा, "क्या तुमने सातवें चिन्ह को सक्रिय किया?" आर्यन चुप रहा। उसकी चुप्पी ही उत्तर थी। तीनों डर गए। मीरा ने कहा, "तुम्हें उससे दूर रहना चाहिए।" आर्यन ने कहा, "मैं नियंत्रण में हूँ।" मीरा ने सिर हिलाया। "यही सबसे खतरनाक वाक्य है।" आर्यन नाराज हो गया। उसने कहा, "तुम समझती नहीं हो।" "मेरे पास अब वह शक्ति है जिसे हम वर्षों से खोज रहे थे।" देव ने कहा, "हमें शक्ति नहीं चाहिए।" आर्यन ने उसकी तरफ देखा। "मुझे चाहिए।" वह पहली बार था जब चारों के बीच वास्तविक दूरी पैदा हुई। इसके बाद आर्यन अधिक समय अकेले बिताने लगा। वह काले पत्थर के पास जाता। उससे बात करता। शक्ति सीखता। और हर बार लौटने पर पहले से अधिक मजबूत होता। लेकिन धीरे-धीरे उसकी अपनी ऊर्जा बदलने लगी। उसकी आंखों में लाल चमक आने लगी। उसकी कलाई का सातवाँ चिन्ह स्थायी हो गया। फिर एक दिन देव ने उसे रोकने की कोशिश की। "बस करो।" आर्यन ने कहा, "मुझे मत रोको।" "तुम बदल रहे हो।" "मैं मजबूत हो रहा हूँ।" "दोनों में अंतर है।" आर्यन ने उसकी तरफ देखा। उसकी ऊर्जा अचानक फैल गई। देव पीछे जा गिरा। मीरा दौड़कर उसके पास गई। अंश ने आर्यन को देखा। उसकी आंखों में डर था। "तुमने उसे चोट पहुंचाई।" आर्यन ने कुछ नहीं कहा। उसके चेहरे पर पहली बार पछतावा आया। लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी। उस दिन से चारों अलग हो गए। आर्यन फिर अकेला हो गया। लेकिन अब वह पहले जैसा नहीं था। काले पत्थर की शक्ति उसके भीतर जड़ें जमा चुकी थी। एक रात उसने फिर उस पत्थर को छुआ। इस बार आवाज ने कहा। "तुम तैयार हो।" आर्यन ने पूछा, "किसके लिए?" "बंधन के लिए।" आर्यन ने अपनी आंखें बंद कीं। उसने सोचा कि अगर वह इस शक्ति को पूरी तरह नियंत्रित कर ले, तो वह सब कुछ ठीक कर सकता है। अपने साथियों को बचा सकता है। अपने गांव को सुरक्षित कर सकता है। उन लोगों को रोक सकता है जो कमजोरों का फायदा उठाते हैं। उसने हां कह दी। यही उसकी सबसे बड़ी गलती थी। काले पत्थर की सात ऊर्जा धाराएं उसके शरीर में प्रवेश कर गईं। आर्यन दर्द से जमीन पर गिर गया। उसकी चीख पूरे कक्ष में गूंजी। उसकी कलाई का चिन्ह जल उठा। उसके शरीर में ऊर्जा का तूफान उठ गया। कुछ देर बाद सब शांत हो गया। आर्यन उठकर खड़ा हुआ। अब उसकी शक्ति पहले से कई गुना अधिक थी। लेकिन उसके साथ एक दूसरा अस्तित्व भी उसके भीतर जुड़ चुका था। वह उसे सुन सकता था। महसूस कर सकता था। कभी-कभी वह उसकी सोच में शब्द डाल देता। आर्यन ने खुद को समझाया कि वह उसे नियंत्रित कर सकता है। लेकिन धीरे-धीरे वह समझने लगा कि बात उलटी भी थी। वह शक्ति भी उसे महसूस कर सकती थी। दिन बीतते गए। फिर वह रात आई जिसे शौर्य ने अपने जीवन का सबसे भयावह दिन माना था। आसमान लाल था। पहाड़ियों के ऊपर अजीब रोशनी थी। आर्यन अपने साथियों से आखिरी बार मिला। देव ने कहा, "तुम्हें यह बंधन तोड़ना होगा।" आर्यन ने कहा, "मैं कर सकता हूँ।" मीरा ने पूछा, "कब?" आर्यन ने उत्तर नहीं दिया। अंश ने उसकी तरफ देखा। "तुम्हें पता है कि अगर यह शक्ति बाहर निकली तो क्या होगा?" आर्यन ने कहा, "हाँ।" "फिर?" आर्यन ने आंखें बंद कर लीं। "मैं इसे अपने साथ ले जाऊंगा।" उसने उसी रात मंदिर में जाने का फैसला किया। उसे विश्वास था कि वह खुद को बलिदान देकर उस शक्ति को रोक सकता है। वह काले पत्थर के सामने खड़ा हुआ। उसने सातवें चिन्ह को सक्रिय किया। ऊर्जा पूरे मंदिर में फैल गई। पत्थर टूटने लगा। और उसके भीतर बंद शक्ति बाहर आने लगी। आर्यन ने उसे रोकने की कोशिश की। उसकी पूरी शक्ति टूटने लगी। उसने अपने बंधन को स्वयं काटने की कोशिश की। लेकिन वह शक्ति उससे जुड़ चुकी थी। जितना वह उसे रोकता। उतनी ही वह उसके भीतर गहराई तक जाती। आर्यन जमीन पर गिर गया। उसने आखिरी बार अपने साथियों के चेहरे याद किए। फिर अपने गांव को। फिर अपनी मां को। और अंत में। उसे शौर्य की मां का चेहरा याद आया। एक पुरानी याद। एक परिवार। एक ऐसा रहस्य जिसके बारे में उसने कभी किसी को नहीं बताया था। आर्यन की आंखें खुल गईं। "नहीं।" उसने पूरी शक्ति से सातवें चिन्ह को सक्रिय किया। एक विशाल ऊर्जा विस्फोट हुआ। मंदिर टूट गया। आर्यन गायब हो गया। दुनिया ने मान लिया कि वह मर चुका है। लेकिन वास्तव में वह उस प्राचीन स्थान के भीतर खिंच गया था। वही स्थान। जहाँ शौर्य अब खड़ा था। वह कई वर्षों तक वहाँ रहा। पहले उसने बाहर निकलने की कोशिश की। फिर समझा कि वह शक्ति उसे जाने नहीं देगी। फिर उसने उसे समझना शुरू किया। फिर उसने जाना कि सातवाँ चिन्ह केवल शक्ति नहीं था। यह एक द्वार था। एक संबंध। एक चुनाव। और अब वर्षों बाद। शौर्य उसी रास्ते पर आ चुका था। दृश्य धीरे-धीरे समाप्त होने लगा। शौर्य वर्तमान में वापस आ गया। वह उसी कमरे में खड़ा था। आर्यन उसके सामने था। लेकिन अब शौर्य उसे पहले की तरह नहीं देख रहा था। उसने धीरे से पूछा, "तुमने उस रात मुझे क्यों नहीं बताया?" आर्यन की आंखें झुक गईं। "क्योंकि उस रात जो हुआ, उसमें तुम्हारे परिवार का भी एक हिस्सा था।" शौर्य का चेहरा बदल गया। "क्या?" आर्यन ने उसकी तरफ देखा। "तुम्हारी मां जानती थीं कि सातवाँ चिन्ह क्या है।" शौर्य कुछ बोल नहीं पाया। आर्यन ने आगे कहा, "और तुम्हारे जन्म से बहुत पहले उन्होंने मुझे एक काम सौंपा था।" "कौन सा?" आर्यन ने उसकी आंखों में देखा। "अगर कभी सातवाँ चिन्ह तुम्हें चुने।" "तो तुम्हें उस शक्ति से बचाना।" शौर्य की सांस रुक गई। उसने धीरे से पूछा, "मेरी मां को कैसे पता था कि वह मुझे चुनेगा?" आर्यन चुप रहा। काफी देर तक। फिर उसने कहा। "क्योंकि उन्होंने तुम्हारे जन्म से पहले ही तुम्हारी ऊर्जा महसूस कर ली थी।" कमरे में शांति छा गई। शौर्य ने अपनी हथेली की तरफ देखा। वहीं हल्की नीली रोशनी थी। उसके साथ नीरिका की जल-ऊर्जा। और जलछाया की काली परछाईं। तीनों अब एक साथ थीं। शौर्य ने धीरे से पूछा, "और तुम इतने सालों तक यहीं रहे।" आर्यन ने कहा, "हाँ।" "मेरी रक्षा करने के लिए?" आर्यन ने उत्तर नहीं दिया। उसकी चुप्पी ही उत्तर थी। लेकिन तभी कमरे के बाहर से सातवें चिन्ह की गहरी धड़कन सुनाई दी। धक। धक। धक। आर्यन ने तुरंत सिर उठाया। उसके चेहरे पर चिंता लौट आई। शौर्य ने पूछा, "अब क्या?" आर्यन ने धीरे से कहा। "अब वह समय आ गया है जिसके लिए मैं इतने वर्षों से इंतजार कर रहा था।" शौर्य ने उसकी तरफ देखा। आर्यन ने कहा। "तुम्हें बचाने का नहीं।" "तुम्हें तैयार करने का।" और उसी क्षण। कमरे की दीवार पर सातवाँ चिन्ह फिर से चमक उठा। लेकिन इस बार उसके भीतर एक नई आकृति दिखाई दी। एक रास्ता। जो सीधे शौर्य के अपने अतीत की ओर जा रहा था।

End of Chapter 20