Chapter 19 of 30

जागती हुई शक्ति

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सातों स्तंभों की रोशनी एक साथ बुझ गई। अंधेरा। इस बार का अंधेरा पहले जैसा नहीं था। पहले अंधेरा केवल रोशनी की अनुपस्थिति था। अब ऐसा लग रहा था जैसे अंधेरा खुद एक जीवित चीज बनकर उस पूरे स्थान में फैल गया हो। शौर्य कुछ क्षण तक वहीं खड़ा रहा। उसकी आंखें अंधेरे में देखने की कोशिश कर रही थीं। लेकिन कुछ दिखाई नहीं दे रहा था। नीरिका उसके बिल्कुल पास खड़ी थी। जलछाया उसके पैरों के आसपास फैला हुआ था। आर्यन दरवाजे के पास स्थिर खड़ा था। कुछ क्षण पहले तक उसके चेहरे पर जो शांति थी, वह अब पूरी तरह गायब हो चुकी थी। उसकी आंखें अंधेरे में किसी ऐसी चीज को देख रही थीं, जिसे शौर्य अभी महसूस नहीं कर पा रहा था। शौर्य ने धीरे से पूछा, "क्या जाग गया है?" आर्यन ने उत्तर नहीं दिया। वह अपनी हथेली आगे करके ऊर्जा महसूस करने लगा। कुछ क्षण तक वह बिल्कुल शांत रहा। फिर उसकी उंगलियां हल्की-सी कांप गईं। शौर्य ने यह देख लिया। "आर्यन।" आर्यन ने धीरे से कहा, "हमें यहाँ से निकलना होगा।" शौर्य ने पूछा, "कहाँ?" "जहाँ से आए थे, वहाँ वापस नहीं जा सकते।" शौर्य की नजर पीछे गई। गलियारे का वह रास्ता अब पूरी तरह अंधेरे में था। तीसरा द्वार भी दिखाई नहीं दे रहा था। शौर्य ने अपनी हथेली में नीली ऊर्जा पैदा करने की कोशिश की। पहले कुछ नहीं हुआ। उसने फिर कोशिश की। बहुत हल्की रोशनी बनी। फिर तुरंत बुझ गई। शौर्य की भौंहें सिकुड़ गईं। "मेरी ऊर्जा..." आर्यन ने कहा, "यह जगह अपनी ऊर्जा वापस खींच रही है।" शौर्य ने उसकी तरफ देखा। "क्यों?" "क्योंकि सातवाँ चिन्ह सक्रिय हो गया है।" आर्यन ने बहुत धीमी आवाज में कहा, "जब वह जागता है, तो इस स्थान की सारी ऊर्जा उसके केंद्र की तरफ जाने लगती है।" शौर्य ने पूछा, "कौन सा केंद्र?" आर्यन ने सामने की ओर देखा। अंधेरे में बहुत दूर एक हल्की लाल रेखा दिखाई दे रही थी। "वहीं।" शौर्य ने उस दिशा में देखा। कुछ दिखाई नहीं दे रहा था। लेकिन अब उसे एक बहुत हल्की धड़कन महसूस हो रही थी। धक। फिर शांति। धक। फिर शांति। जैसे कोई विशाल हृदय बहुत दूर धड़क रहा हो। शौर्य का चेहरा गंभीर हो गया। "यह कोई जीव है?" आर्यन ने कहा, "पता नहीं।" "तुमने इसे पहले महसूस किया है?" "हाँ।" "कब?" आर्यन ने कुछ क्षण चुप रहकर कहा, "उस दिन।" शौर्य समझ गया कि वह किस दिन की बात कर रहा था। वही दिन। जिस दिन आर्यन गायब हुआ था। शौर्य ने कुछ नहीं पूछा। आर्यन खुद बोलने लगा। "उस रात जब मेरा बंधन टूटा था, तभी मैंने पहली बार इसे महसूस किया था।" "तब यह बहुत कमजोर था।" "इतना कमजोर कि मुझे लगा था कि यह शायद कुछ समय बाद खत्म हो जाएगा।" उसकी आवाज में पछतावा था। "लेकिन मैं गलत था।" शौर्य ने पूछा, "यह क्या चाहता है?" आर्यन ने उसकी तरफ देखा। "ऊर्जा।" "किसकी?" "हर उस व्यक्ति की जो सातवें चिन्ह से जुड़ा है।" शौर्य की नजर नीरिका और जलछाया की तरफ गई। "तो यह हमें भी प्रभावित कर सकता है?" आर्यन ने तुरंत कहा, "हाँ।" शौर्य ने अपनी मुट्ठी बंद कर ली। उसके भीतर डर नहीं था। लेकिन सावधानी बहुत बढ़ गई थी। "तो हमें उसे रोकना होगा।" आर्यन ने सिर हिलाया। "अभी नहीं।" "क्यों?" "क्योंकि हम नहीं जानते कि वह कहाँ है।" शौर्य ने पूछा, "तो फिर हम क्या करेंगे?" आर्यन ने उसकी तरफ देखा। "पहले तुम्हें अपनी ऊर्जा को स्थिर करना होगा।" शौर्य ने आश्चर्य से कहा, "अभी?" "अभी।" "जब कोई अज्ञात शक्ति जाग चुकी है?" "यही कारण है कि अभी।" आर्यन उसके पास आया। "अगर वह शक्ति तुम्हारे बंधन को खींचने लगे और तुमने अपनी ऊर्जा को नियंत्रित नहीं किया, तो वह तुम्हारे भीतर से रास्ता बना लेगी।" शौर्य ने धीरे से सांस ली। वह जमीन पर बैठ गया। नीरिका उसके सामने बैठ गई। जलछाया उसके पीछे फैल गया। आर्यन ने कहा, "आंखें बंद करो।" शौर्य ने आंखें बंद कर लीं। "अपनी ऊर्जा महसूस करो।" शौर्य ने ऐसा ही किया। पहले उसे केवल अपनी सांस सुनाई दी। धीरे-धीरे बाकी आवाजें गायब होने लगीं। फिर उसे अपने भीतर की ऊर्जा महसूस हुई। बहुत हल्की। लेकिन मौजूद। उसने उसे पकड़ने की कोशिश नहीं की। वह केवल उसके प्रवाह को महसूस करता रहा। फिर उसने नीरिका की ऊर्जा महसूस की। जल जैसी। शांत। लेकिन गहरी। उसके बाद जलछाया की ऊर्जा। ठंडी। अंधेरी। लेकिन स्थिर। तीनों के बीच पहले से बना हुआ पतला संबंध दिखाई दिया। शौर्य ने उस संबंध को और मजबूत करने की कोशिश नहीं की। उसने केवल उसे स्वीकार किया। कुछ क्षण बाद उसके भीतर हल्की गर्माहट फैलने लगी। आर्यन की आवाज दूर से सुनाई दी। "अब बाहरी ऊर्जा को मत छूना।" शौर्य ने सांस स्थिर रखी। लेकिन तभी वह विशाल धड़कन फिर सुनाई दी। धक। इस बार पहले से तेज। शौर्य की अपनी ऊर्जा हल्की-सी कांप गई। उसने तुरंत उसे नियंत्रित करना चाहा। आर्यन की आवाज आई। "नहीं।" शौर्य ने कोशिश रोक दी। "उसे रोकना मत।" शौर्य ने आश्चर्य से पूछा, "फिर?" "उसे गुजरने दो।" शौर्य ने अपनी ऊर्जा को स्थिर रखा। अचानक उसके भीतर से एक अजीब लहर गुजरी। जैसे किसी ने उसकी ऊर्जा को छूकर देखा हो। वह लहर नीरिका तक गई। फिर जलछाया तक। और फिर वापस शौर्य के भीतर आ गई। लेकिन वह उससे कुछ ले नहीं गई। शौर्य ने आंखें खोलीं। आर्यन उसे देख रहा था। "क्या हुआ?" आर्यन ने कहा, "वह तुम्हें खोज रहा था।" शौर्य ने पूछा, "कौन?" "जो जागा है।" शौर्य ने कुछ क्षण चुप रहकर पूछा, "उसने मुझे क्यों नहीं छुआ?" आर्यन ने कहा, "क्योंकि तुमने उसे रास्ता नहीं दिया।" शौर्य ने अपनी हथेली देखी। नीली रोशनी फिर बनी। इस बार वह पहले से स्थिर थी। आर्यन ने कहा, "अब तुम तैयार हो।" शौर्य खड़ा हो गया। "कहाँ जाना है?" आर्यन ने गलियारे के अंत की तरफ देखा। "उस केंद्र तक।" दोनों आगे बढ़ने लगे। नीरिका शौर्य के साथ थी। जलछाया उसके पीछे। गलियारा पहले से अलग लग रहा था। दीवारों पर बने चिन्ह अब चमक नहीं रहे थे। लेकिन उनके बीच से हल्की काली रेखाएं निकल आई थीं। जैसे किसी ने पत्थर की दीवारों के भीतर से रास्ते बना दिए हों। शौर्य ने एक रेखा को ध्यान से देखा। वह धीरे-धीरे धड़क रही थी। धक। फिर शांत। धक। "यह उसी शक्ति का हिस्सा है?" आर्यन ने कहा, "हाँ।" शौर्य ने दीवार से हाथ दूर रखा। "इसे छूना नहीं।" "सही।" कुछ दूर चलने के बाद उन्हें एक विशाल गोल दरवाजा मिला। दरवाजे के बीच वही सातवाँ चिन्ह था। लेकिन इस बार उसके चारों ओर छह अन्य चिन्ह नहीं थे। केवल सातवाँ। शौर्य उसके सामने जाकर रुक गया। उसने हाथ आगे बढ़ाया। आर्यन ने उसे रोक दिया। "मत छुओ।" शौर्य ने हाथ वापस कर लिया। "इसके पीछे क्या है?" आर्यन ने कहा, "जिस चीज को तुम ढूंढ रहे हो।" "वह शक्ति?" "शायद।" "और अगर दरवाजा खोल दिया?" आर्यन ने कहा, "तो वह भी तुम्हें महसूस कर लेगी।" शौर्य ने पूछा, "क्या वह अभी मुझे महसूस नहीं कर रही?" आर्यन चुप हो गया। शौर्य समझ गया। "कर रही है।" "हाँ।" दोनों कुछ क्षण दरवाजे के सामने खड़े रहे। फिर शौर्य ने कहा, "तो फिर छिपने का फायदा नहीं।" आर्यन ने उसकी तरफ देखा। "तुम क्या करने वाले हो?" शौर्य ने अपनी हथेली खोली। नीली ऊर्जा बनी। "मैं दरवाजा खोलूंगा।" आर्यन ने उसे रोका नहीं। शौर्य ने ऊर्जा को बहुत धीरे-धीरे सातवें चिन्ह की ओर भेजा। इस बार कोई ताला नहीं था। कोई आवाज नहीं। केवल एक गहरी धड़कन। धक। फिर दरवाजा खुल गया। अंदर विशाल गोल कक्ष था। कक्ष इतना बड़ा था कि उसकी दूसरी दीवार मुश्किल से दिखाई दे रही थी। बीच में जमीन के ऊपर एक विशाल काला पत्थर तैर रहा था। उस पत्थर के चारों ओर सात ऊर्जा धाराएं घूम रही थीं। छह अलग-अलग रंगों में। और सातवीं गहरी लाल। शौर्य वहीं रुक गया। आर्यन भी उसके पीछे आकर खड़ा हो गया। उसके चेहरे पर चिंता स्पष्ट थी। "यही है।" शौर्य ने पूछा, "क्या?" आर्यन ने धीरे से कहा, "स्रोत।" शौर्य ने उस तैरते हुए पत्थर को देखा। उसके भीतर कुछ धड़क रहा था। वही धड़कन। धक। धक। धक। हर धड़कन के साथ कमरे की ऊर्जा बदल रही थी। शौर्य ने महसूस किया कि उसकी अपनी ऊर्जा भी प्रतिक्रिया दे रही है। नीरिका पीछे हट गई। जलछाया जमीन पर स्थिर हो गया। शौर्य ने धीरे से पूछा, "यह जीवित है?" आर्यन ने कहा, "मुझे नहीं पता।" अचानक काले पत्थर की सतह पर एक दरार दिखाई दी। शौर्य पीछे हट गया। दरार धीरे-धीरे फैलने लगी। एक लाल रोशनी भीतर से बाहर आई। आर्यन ने तुरंत कहा, "पीछे हटो।" शौर्य पीछे हुआ। नीरिका उसके सामने आ गई। जलछाया फैलकर एक सुरक्षा दीवार बनाने लगा। दरार और चौड़ी हुई। फिर एक आवाज पूरे कक्ष में गूंजी। "कितने वर्षों बाद।" शौर्य के शरीर में सिहरन दौड़ गई। यह आवाज न पुरुष की थी। न स्त्री की। जैसे कई आवाजें एक साथ बोल रही हों। "एक नया धारक।" लाल रोशनी तेज हुई। "दो बंधन।" काले पत्थर के चारों ओर घूमती ऊर्जा अचानक शौर्य की तरफ मुड़ गई। "और सातवें चिन्ह की स्वीकृति।" आर्यन ने फुसफुसाकर कहा, "मत सुनना।" शौर्य ने उसकी तरफ देखा। "क्यों?" "यह तुम्हारे मन में प्रवेश करने की कोशिश करेगा।" आवाज फिर आई। "शौर्य।" उसका नाम सुनते ही शौर्य का शरीर स्थिर हो गया। आवाज ने कहा, "तुम्हें अपनी शक्ति चाहिए।" शौर्य ने कुछ नहीं कहा। "तुम्हें अपने अतीत का उत्तर चाहिए।" शौर्य की आंखों में हल्का बदलाव आया। "तुम्हें उन लोगों की सच्चाई चाहिए जिन्होंने तुम्हें छोड़ दिया।" शौर्य की मुट्ठी बंद हो गई। आवाज ने कहा, "मैं तुम्हें सब दे सकता हूँ।" आर्यन ने कठोर आवाज में कहा, "मत सुनो।" लेकिन इस बार शौर्य ने उसकी बात नहीं मानी। वह उस काले पत्थर की तरफ देखने लगा। "अगर तुम सच में सब बता सकते हो।" आर्यन ने उसकी तरफ देखा। "तो?" शौर्य ने पूछा, "तुम मुझसे क्या चाहते हो?" कुछ क्षण के लिए पूरा कक्ष शांत हो गया। फिर वह आवाज आई। "कुछ नहीं।" शौर्य की आंखें संकरी हो गईं। "झूठ।" लाल ऊर्जा अचानक रुक गई। फिर काले पत्थर की दरार के भीतर दो लाल आंखें खुलीं। शौर्य ने पहली बार उसे देखा। वह पूरा जीव बाहर नहीं आया था। केवल उसकी आंखें दिखाई दे रही थीं। लेकिन उन आंखों में इतनी गहराई थी कि शौर्य को लगा जैसे वह किसी अंतहीन गहराई के सामने खड़ा है। आवाज फिर आई। "तुम्हें केवल अपना बंधन मुझे देना होगा।" नीरिका तुरंत आगे बढ़ी। जलछाया ने भी हमला करने के लिए आकार बदल लिया। शौर्य ने दोनों को रोक दिया। वह जानता था। यही परीक्षा थी। उसने पूछा, "और बदले में?" "तुम्हारी शक्ति कई गुना बढ़ जाएगी।" "मेरा अतीत?" "तुम्हें दिखा दूंगा।" "मेरी मां?" कमरे में शांति। फिर उत्तर आया। "उसके बारे में भी।" शौर्य की आंखें बंद हो गईं। उसके भीतर भावनाओं का तूफान उठ गया। उसे पता था कि यही वह जगह है जहाँ कोई कमजोर पड़ सकता है। उसे अपनी मां को देखने की इच्छा थी। उसे अपने अतीत के हर प्रश्न का उत्तर चाहिए था। लेकिन उसने कुछ सीखा था। याद। दर्द। बंधन। इनमें से कोई भी चीज उसे अपनी इच्छा के विरुद्ध निर्णय लेने के लिए मजबूर नहीं कर सकती। उसने धीरे से आंखें खोलीं। "नहीं।" कक्ष की हवा बदल गई। लाल ऊर्जा अचानक तेज हो गई। "तुमने सुना नहीं।" शौर्य ने कहा, "सुना।" "फिर भी नहीं?" "हाँ।" उसने अपनी हथेली खोली। नीली ऊर्जा बनी। उसके चारों ओर हल्की जल-लहर दिखाई दी। फिर काली छाया। तीनों शक्तियां एक साथ स्थिर हो गईं। शौर्य ने कहा, "मेरे बंधन बिकाऊ नहीं हैं।" काले पत्थर के भीतर की आंखें कुछ क्षण उसे देखती रहीं। फिर एक धीमी हंसी गूंजी। "अच्छा।" शौर्य ने भौंहें सिकोड़ लीं। आवाज ने कहा, "अब समझ आया कि सातवें चिन्ह ने तुम्हें क्यों चुना।" आर्यन आगे आया। "तुम इसे जानते हो।" आवाज ने कहा, "मैं इसे जानता हूँ।" फिर लाल ऊर्जा का एक हिस्सा आर्यन की तरफ मुड़ा। "और तुम्हें भी।" आर्यन का चेहरा कठोर हो गया। "मुझे पता था कि तुम मुझे पहचानोगे।" आवाज हंसी। "तुम्हें लगता है कि तुमने मुझे यहाँ कैद किया है।" आर्यन चुप रहा। आवाज ने कहा, "लेकिन सच यह है कि तुम स्वयं मेरे कारण यहाँ बंधे हो।" शौर्य ने तुरंत आर्यन की तरफ देखा। आर्यन ने कुछ नहीं कहा। उसकी आंखों में कुछ टूटता हुआ दिखाई दिया। शौर्य ने पूछा, "यह क्या कह रहा है?" आर्यन ने धीमे स्वर में कहा, "जो तुम सुन रहे हो, वह पूरी तरह झूठ नहीं है।" शौर्य कुछ समझ नहीं पाया। "तो सच क्या है?" आर्यन ने उत्तर देने से पहले काले पत्थर की तरफ देखा। "मैंने इसे कैद नहीं किया।" "मैंने इसे जगाया था।" कमरे में अचानक सब कुछ शांत हो गया। शौर्य की सांस रुक गई। आर्यन ने कहा, "उस दिन।" "जब मेरा बंधन टूटा था।" "मैंने शक्ति की तलाश में इसे छुआ था।" उसकी आवाज भारी हो गई। "और तभी यह जाग गया।" शौर्य ने उसकी तरफ देखा। अब उसे समझ आया कि आर्यन इतने वर्षों से इस जगह से बाहर क्यों नहीं गया था। वह केवल कैदी नहीं था। वह इस शक्ति के जागने का कारण भी था। काले पत्थर के भीतर से लाल रोशनी फिर उठी। लेकिन इस बार वह शौर्य की तरफ नहीं आई। वह धीरे-धीरे आर्यन की ओर बढ़ी। आर्यन ने अपनी हथेली उठाई। उसकी कलाई का सातवाँ चिन्ह जलने लगा। वह दर्द से एक घुटने पर बैठ गया। शौर्य तुरंत उसके पास जाने लगा। आर्यन ने हाथ उठाकर उसे रोक दिया। "नहीं।" "लेकिन..." "अगर तुमने मुझे छुआ, तो यह तुम्हारे बंधन को भी पकड़ लेगा।" शौर्य रुक गया। उसने आर्यन को देखा। फिर उस लाल ऊर्जा को। उसके भीतर निर्णय बनने लगा। वह केवल खुद को बचाकर नहीं जा सकता था। अगर आर्यन यहाँ फंसा था, तो उसे छोड़ना भी सही नहीं था। लेकिन सीधे हमला करना भी मूर्खता थी। शौर्य ने अपनी आंखें बंद कर लीं। उसने अपनी तीनों ऊर्जा को महसूस किया। नीरिका। जलछाया। और अपनी। फिर उसने धीरे से कहा। "हम इसे हराएंगे नहीं।" आर्यन ने आश्चर्य से उसकी तरफ देखा। शौर्य ने आंखें खोलीं। "पहले इसे समझेंगे।" नीरिका की ऊर्जा उसके आसपास फैल गई। जलछाया जमीन के नीचे चला गया। शौर्य ने सातवें चिन्ह की तरफ देखा। और पहली बार। उसे लगा कि वह चिन्ह उसे आदेश नहीं दे रहा था। वह उसे सुन रहा था। शौर्य ने अपनी हथेली आगे की। नीली रोशनी धीरे-धीरे बढ़ी। काले पत्थर के भीतर लाल ऊर्जा भी स्थिर हो गई। दोनों शक्तियां कुछ दूरी पर आमने-सामने थीं। फिर। बहुत धीरे। सातवाँ चिन्ह चमका। और पूरे कक्ष में एक नई आवाज गूंजी। "बंधन स्वीकार।" शौर्य की आंखें फैल गईं। काले पत्थर की दरारें अचानक बंद होने लगीं। लाल आंखें गायब हो गईं। ऊर्जा पीछे हट गई। लेकिन उससे पहले उस रहस्यमय शक्ति ने एक अंतिम वाक्य कहा। "तुमने मुझे अस्वीकार नहीं किया।" "तुमने मुझे समझने का निर्णय लिया।" फिर सब कुछ शांत हो गया। आर्यन जमीन पर बैठा रहा। उसकी कलाई का चिन्ह धीरे-धीरे शांत हो गया। शौर्य उसके पास गया। इस बार कोई लाल ऊर्जा उसे रोक नहीं रही थी। आर्यन ने उसकी तरफ देखा। "तुमने क्या किया?" शौर्य ने उत्तर दिया। "मुझे नहीं पता।" फिर उसने काले पत्थर की तरफ देखा। "लेकिन मुझे लगता है कि अब यह हमें मारना नहीं चाहता।" आर्यन ने बहुत धीमी सांस ली। "नहीं।" उसने कहा। "अब यह तुम्हें देखना चाहता है।" शौर्य ने उसकी तरफ देखा। "क्यों?" आर्यन ने काले पत्थर को देखा। उसकी आंखों में चिंता लौट आई। "क्योंकि सातवें चिन्ह ने पहली बार किसी धारक को उससे बंधने की अनुमति दी है।" शौर्य कुछ बोल पाता। उससे पहले कक्ष की जमीन पर एक नया दरवाजा दिखाई दिया। उस दरवाजे पर केवल एक शब्द लिखा था। "सत्य।" शौर्य ने उस शब्द को देखा। उसने धीरे से कदम आगे बढ़ाया। इस बार उसके मन में केवल एक प्रश्न था। अगर यह सच का दरवाजा था। तो उसके पीछे कौन सा सच उसका इंतजार कर रहा था? उसने हाथ बढ़ाया। और दरवाजा खुल गया।

End of Chapter 19

Chapter 19: जागती हुई शक्ति - समंदर का Sikandar | Novel AI Studio