Chapter 18 of 30

लौटकर आया अतीत

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शौर्य की आंखें सामने खड़ी उस आकृति पर टिकी थीं। वह कुछ बोल नहीं पा रहा था। उसके सामने खड़ा चेहरा उसके लिए नया नहीं था। वह चेहरा उसके अतीत का हिस्सा था। इतना पुराना हिस्सा कि उसने खुद को कई बार समझाया था कि शायद उसकी याद गलत थी। शायद वह व्यक्ति वास्तव में मर चुका था। शायद उस दिन जो उसने देखा था, वह केवल भय और भ्रम का परिणाम था। लेकिन अब वह उसके सामने खड़ा था। जीवित। शांत। और उसकी आंखों में वही सातवाँ चिन्ह चमक रहा था। शौर्य ने एक कदम आगे बढ़ाया। उसके पैरों के नीचे पत्थर की जमीन से हल्की आवाज निकली। आकृति नहीं हिली। नीरिका शौर्य के पास आकर रुक गई। जलछाया उसकी छाया के चारों ओर फैल गया। कुछ क्षण तक दोनों एक-दूसरे को देखते रहे। फिर शौर्य ने बहुत धीमी आवाज में कहा, "तुम जीवित हो।" आकृति ने उत्तर नहीं दिया। उसने केवल शौर्य की तरफ देखा। फिर उसकी नजर नीरिका पर गई। फिर जलछाया पर। उसके चेहरे पर हल्की मुस्कान आई। "तुमने सचमुच दोनों बंधन बना लिए।" शौर्य के भीतर अचानक बहुत सारे सवाल उठे। "तुम्हें इनके बारे में कैसे पता?" आकृति ने सीधे उत्तर नहीं दिया। वह धीरे-धीरे शौर्य की तरफ चलने लगा। एक कदम। फिर दूसरा। उसके कदमों की आवाज पूरे गलियारे में गूंज रही थी। शौर्य ने अपनी ऊर्जा तैयार कर ली। लेकिन उसने हमला नहीं किया। आकृति उससे कुछ दूरी पर आकर रुक गई। अब उसका चेहरा साफ दिखाई दे रहा था। शौर्य ने उसे आखिरी बार वर्षों पहले देखा था। उस समय वह अलग था। उसके बाल छोटे थे। उसके चेहरे पर थकान नहीं थी। और उसकी आंखों में वह गहराई नहीं थी जो अभी दिखाई दे रही थी। शौर्य ने कहा, "तुम्हें मैंने मरते हुए देखा था।" आकृति ने धीरे से उत्तर दिया, "तुमने जो देखा था, वह मेरा अंत नहीं था।" "फिर क्या था?" "एक शुरुआत।" शौर्य की आंखों में कठोरता आ गई। "तुम उस दिन कहाँ गए थे?" आकृति ने कुछ क्षण उसकी तरफ देखा। "तुम्हें वह दिन अभी भी याद है?" "मैं उसे भूल नहीं सकता।" "मुझे पता है।" शौर्य के भीतर दबा हुआ गुस्सा धीरे-धीरे ऊपर आने लगा। लेकिन उसने खुद को रोक लिया। उसने अपनी सांस नियंत्रित की। वह नहीं चाहता था कि क्रोध उसकी सोच पर हावी हो। आकृति ने उसे देखा। "तुम बदल गए हो।" शौर्य ने कहा, "तुम भी।" इस बार आकृति के चेहरे पर हल्की मुस्कान आई। "शायद।" कुछ क्षण तक दोनों चुप रहे। फिर शौर्य ने पूछा, "तुम्हारा नाम?" आकृति ने धीरे से कहा, "आर्यन।" नाम सुनते ही शौर्य की आंखें कुछ पल के लिए स्थिर हो गईं। आर्यन। वही नाम। वही व्यक्ति। वही अतीत। शौर्य ने नजरें नहीं हटाईं। "तुम यहाँ क्यों हो?" आर्यन ने पीछे देखा। गलियारे के अंत में सातवाँ चिन्ह चमक रहा था। "क्योंकि मुझे यहाँ रहना पड़ा।" "किसने रोका?" आर्यन ने कहा, "मैंने खुद को।" शौर्य कुछ समझ नहीं पाया। "क्या मतलब?" आर्यन ने दीवार के पास जाकर अपना हाथ रखा। दीवार पर सातवाँ चिन्ह चमक उठा। "जब मैं पहली बार यहाँ आया था, तब मैं तुम्हारी तरह था।" "मुझे शक्ति चाहिए थी।" "मैं समझता था कि शक्ति मिल जाने के बाद मैं सब कुछ बदल सकता हूँ।" उसने धीरे से सांस ली। "लेकिन शक्ति बढ़ती गई।" "और उसके साथ मेरी गलतियां भी।" शौर्य चुपचाप सुन रहा था। आर्यन ने कहा, "मैंने बंधनों को हथियार समझा।" "मैंने अपने साथियों की शक्तियों को अपने आदेश के नीचे रखने की कोशिश की।" "मैंने सोचा कि अगर वे मेरी बात मानेंगे तो हम कभी हारेंगे नहीं।" उसकी आवाज धीमी हो गई। "लेकिन एक दिन उन्होंने मेरी बात मानना बंद कर दिया।" शौर्य ने पूछा, "क्यों?" आर्यन ने उसकी तरफ देखा। "क्योंकि मैंने उन्हें साथी नहीं समझा था।" "मैंने उन्हें अपनी शक्ति समझ लिया था।" कुछ क्षण के लिए गलियारे में भारी खामोशी छा गई। नीरिका की ऊर्जा हल्की हुई। शौर्य ने उसकी तरफ देखा। फिर आर्यन की ओर। अब उसे समझ आने लगा था कि सातवें चिन्ह की परीक्षा केवल शक्ति की परीक्षा नहीं थी। यह सोच की परीक्षा भी थी। आर्यन ने कहा, "उस दिन मेरा बंधन टूट गया।" "और मैं भी टूट गया।" शौर्य ने पूछा, "फिर तुम यहाँ कैसे आए?" आर्यन ने उत्तर देने से पहले दीवार पर बने सात चिन्हों को देखा। "जब मेरा बंधन टूटा, तब सातवाँ चिन्ह सक्रिय हुआ।" "उसने मुझे यहाँ खींच लिया।" "क्यों?" "क्योंकि सातवाँ चिन्ह उन लोगों को बुलाता है जो अपने बंधन की असली कीमत समझने के करीब पहुँचते हैं।" शौर्य ने धीरे से कहा, "तो तुम यहाँ फंस गए।" आर्यन ने सिर हिलाया। "हाँ।" "लेकिन अब बाहर क्यों नहीं जाते?" आर्यन ने उसकी तरफ देखा। "क्योंकि अगर मैं बाहर गया, तो सातवाँ चिन्ह भी मेरे साथ जाएगा।" शौर्य ने कुछ क्षण उसे देखा। "और इसमें बुरा क्या है?" आर्यन ने कहा, "बहुत कुछ।" उसकी आंखों में पहली बार डर दिखाई दिया। "सातवाँ चिन्ह किसी साधारण शक्ति का चिन्ह नहीं है।" "यह उन सभी शक्तियों के बीच संबंध बनाता है।" "अगर गलत व्यक्ति इसे लेकर बाहर गया, तो वह केवल अपनी शक्ति नहीं बढ़ाएगा।" "वह दूसरों की शक्ति को भी प्रभावित कर सकता है।" शौर्य की आंखें गंभीर हो गईं। "इसलिए तुम यहाँ हो।" "हाँ।" "और लाल आकृति?" आर्यन ने कुछ क्षण चुप रहकर कहा, "वह मुझे यहाँ रखने वालों में से एक है।" शौर्य ने तुरंत पूछा, "कौन हैं वे?" आर्यन ने सिर हिलाया। "अभी नहीं।" शौर्य के चेहरे पर नाराजगी आई। "हर कोई यही क्यों कहता है?" आर्यन ने पहली बार हल्का हंस दिया। "क्योंकि तुम अभी हर उत्तर के लिए तैयार नहीं हो।" शौर्य ने कहा, "यह फैसला मैं खुद कर सकता हूँ।" आर्यन ने उसकी आंखों में देखा। "यही बात मैंने भी कही थी।" शौर्य चुप हो गया। आर्यन उसके पास आया। "लेकिन तुम्हारे और मेरे बीच एक अंतर है।" "क्या?" "तुमने शक्ति को चुनने के बजाय बंधन चुना।" शौर्य ने अपनी हथेली की तरफ देखा। वहाँ अब भी नीली ऊर्जा की हल्की परत थी। आर्यन ने कहा, "इसका मतलब है कि तुम्हारे पास वह गलती दोहराने की संभावना कम है।" शौर्य ने पूछा, "कम है। खत्म नहीं।" आर्यन की आंखों में हल्की चमक आई। "सही।" फिर उसने गंभीर स्वर में कहा, "इसीलिए तुम्हें अभी बहुत कुछ सीखना होगा।" शौर्य ने पूछा, "क्या?" आर्यन ने अपना हाथ उठाया। उसकी हथेली के ऊपर सफेद रोशनी बनी। वह रोशनी बहुत छोटी थी। लेकिन उसमें अद्भुत स्थिरता थी। "ऊर्जा को महसूस करना।" रोशनी घूमी। "उसे नियंत्रित करना।" फिर स्थिर हो गई। "और अंत में उसे छोड़ना।" रोशनी गायब हो गई। शौर्य ने पूछा, "मैं यह सब कर सकता हूँ।" आर्यन ने कहा, "तुम्हें लगता है कि कर सकते हो।" "लेकिन तुम्हारी सबसे बड़ी कमजोरी अभी भी वही है।" "तुम अपनी ऊर्जा को बहुत जल्दी बाहर निकाल देते हो।" शौर्य कुछ कहना चाहता था। लेकिन रुक गया। आर्यन सही था। कई बार लड़ाई में वह पहले हमला करने के बारे में सोचता था। उसकी गति तेज थी। उसकी प्रतिक्रिया अच्छी थी। लेकिन उसकी ऊर्जा नियंत्रण क्षमता अभी सीमित थी। आर्यन ने कहा, "तीसरे द्वार के बाद तुम्हारी परीक्षा युद्ध से नहीं होगी।" शौर्य ने पूछा, "तो किससे?" आर्यन ने उत्तर दिया, "अपने आप से।" गलियारे के आगे अचानक हल्की आवाज हुई। पत्थर का एक दरवाजा खुला। उसके भीतर गोलाकार कमरा दिखाई दिया। कमरे के बीच एक छोटा पत्थर का मंच था। उस पर एक नीला क्रिस्टल रखा था। शौर्य की नजर उस पर टिक गई। क्रिस्टल की चमक उसके भीतर की ऊर्जा से मिलती-जुलती थी। आर्यन ने कहा, "उसे छुओ मत।" शौर्य रुक गया। "क्यों?" "क्योंकि वह तुम्हारी वर्तमान क्षमता से बहुत अधिक ऊर्जा रखता है।" शौर्य ने पूछा, "फिर उसे यहाँ क्यों रखा गया है?" "क्योंकि वह तुम्हें बुला रहा है।" शौर्य ने उसकी तरफ देखा। आर्यन ने कहा, "लेकिन बुलावा और अनुमति एक ही चीज नहीं है।" शौर्य ने क्रिस्टल को ध्यान से देखा। वह सचमुच उसकी तरफ आकर्षित हो रहा था। बहुत हल्का। लेकिन स्पष्ट। जैसे उसके भीतर कोई ऊर्जा उसे पहचान रही हो। उसने एक कदम आगे बढ़ाया। नीरिका ने उसका हाथ पकड़ लिया। शौर्य रुक गया। उसने नीरिका की तरफ देखा। उसकी ऊर्जा में चेतावनी थी। शौर्य ने तुरंत कदम पीछे कर लिया। आर्यन ने यह देखा। उसने कुछ नहीं कहा। लेकिन उसके चेहरे पर संतोष था। "अच्छा।" शौर्य ने पूछा, "क्या?" "तुमने उसकी चेतावनी सुनी।" शौर्य ने कहा, "मुझे सुननी चाहिए थी।" आर्यन ने सिर हिलाया। "यही तुम्हारी असली प्रगति है।" शौर्य ने क्रिस्टल से नजर हटाई। उसी समय कमरे की दीवार पर एक नया चिन्ह दिखाई दिया। एक वृत्त। उसके भीतर तीन छोटी रेखाएँ। फिर आवाज आई। "पहला निर्णय पूर्ण।" शौर्य ने तुरंत चारों तरफ देखा। आवाज फिर आई। "दूसरा निर्णय प्रारंभ।" कमरे का दरवाजा बंद हो गया। आर्यन बाहर रह गया। शौर्य चौंका। उसने तुरंत दरवाजे की तरफ कदम बढ़ाया। "आर्यन।" बाहर से उसकी आवाज आई। "पीछे मत देखना।" शौर्य रुक गया। "क्या?" "जो कुछ भी हो, पीछे मत देखना।" शौर्य ने पूछा, "क्यों?" आर्यन ने उत्तर नहीं दिया। कमरा धीरे-धीरे अंधेरे में डूबने लगा। केवल बीच का नीला क्रिस्टल चमक रहा था। शौर्य ने नीरिका की तरफ देखा। फिर जलछाया की तरफ। दोनों उसके साथ थे। उसने अपनी सांस नियंत्रित की। तभी उसके पीछे किसी के कदमों की आवाज आई। एक। फिर दूसरा। फिर तीसरा। शौर्य ने आंखें बंद कर लीं। वह जानता था कि आर्यन ने पीछे न देखने के लिए क्यों कहा था। लेकिन उसके मन में एक सवाल था। अगर पीछे कुछ है। तो वह क्या है? कदमों की आवाज और करीब आई। अब वह उसके बिल्कुल पीछे थी। शौर्य ने अपने हाथ की ऊर्जा मजबूत की। लेकिन उसने पीछे नहीं देखा। फिर किसी ने बहुत धीमी आवाज में उसका नाम लिया। "शौर्य।" वह आवाज परिचित थी। बहुत परिचित। इतनी परिचित कि उसका दिल एक पल के लिए रुक-सा गया। उसने आंखें कसकर बंद कर लीं। आवाज फिर आई। "तुमने मुझे भूल क्यों दिया?" शौर्य का शरीर कांप गया। यह वही आवाज थी। उस व्यक्ति की। जिसे वह वर्षों से अपने अतीत का हिस्सा मान चुका था। उसकी मां की। शौर्य की सांस भारी हो गई। उसने अपनी मुट्ठियां कस लीं। उसके सामने नीला क्रिस्टल और तेज चमकने लगा। आवाज उसके पीछे थी। "एक बार मेरी तरफ देखो।" शौर्य की आंखों के सामने अचानक पुराने दृश्य आने लगे। एक छोटा घर। बारिश। एक दीपक। एक स्त्री का चेहरा। एक छोटी-सी मुस्कान। फिर वही रात। वही आग। वही शोर। वही क्षण जब सब कुछ बदल गया था। शौर्य की आंखों में आंसू आ गए। लेकिन उसने पीछे नहीं देखा। उसने धीरे से कहा, "यह सच नहीं है।" पीछे से आवाज आई। "तुम्हें कैसे पता?" शौर्य चुप रहा। उसके भीतर दर्द बढ़ रहा था। लेकिन उसके साथ एक और चीज भी थी। उसने अपनी ऊर्जा महसूस की। नीरिका। जलछाया। और अपनी खुद की। तीनों अलग नहीं थीं। वे उसके साथ थीं। उसने धीरे से सांस ली। "क्योंकि अगर वह सच होतीं..." उसकी आवाज कांपी। "तो मुझे पीछे देखने के लिए मजबूर नहीं करना पड़ता।" कमरे में अचानक पूर्ण शांति छा गई। पीछे की आवाज गायब हो गई। शौर्य ने आंखें खोलीं। उसके सामने नीला क्रिस्टल था। लेकिन अब उसकी चमक शांत थी। दीवार पर एक नया संदेश दिखाई दिया। भावनात्मक भ्रम। परीक्षण पूर्ण। शौर्य ने कुछ क्षण उस संदेश को देखा। फिर उसके घुटने थोड़े कमजोर हो गए। वह जमीन पर बैठ गया। उसने अपना चेहरा दोनों हाथों में छिपा लिया। काफी देर तक वह कुछ नहीं बोला। नीरिका उसके पास बैठ गई। जलछाया भी उसके आसपास फैल गया। कुछ देर बाद शौर्य ने धीरे से कहा, "मैंने उसे बहुत याद किया।" नीरिका की ऊर्जा शांत रही। "लेकिन अब मुझे समझ आ गया है।" उसने धीरे-धीरे सिर उठाया। "याद और कमजोरी एक ही चीज नहीं हैं।" कमरे की दीवार पर एक और संदेश दिखाई दिया। भावना को दबाना शक्ति नहीं। भावना को समझना शक्ति है। शौर्य कुछ देर उस वाक्य को देखता रहा। फिर वह खड़ा हो गया। दरवाजा खुल गया। आर्यन बाहर खड़ा था। उसने शौर्य को देखा। कुछ नहीं कहा। शौर्य भी कुछ क्षण चुप रहा। फिर उसने पूछा, "तुम जानते थे कि वहाँ क्या होगा?" आर्यन ने सिर हिलाया। "हाँ।" "तुमने पहले क्यों नहीं बताया?" "क्योंकि अगर मैंने बताया होता, तो वह परीक्षा नहीं रहती।" शौर्य ने उसकी तरफ देखा। इस बार उसके भीतर गुस्सा नहीं था। केवल थकान थी। "तुम्हारी मां भी इसी परीक्षा में आई थीं?" आर्यन अचानक शांत हो गया। उसकी आंखों में एक गहरी उदासी दिखाई दी। "नहीं।" वह कुछ क्षण रुका। "लेकिन मैं आया था।" शौर्य ने कुछ नहीं कहा। आर्यन ने आगे बढ़कर कमरे के भीतर देखा। नीला क्रिस्टल अब पूरी तरह शांत था। "तुमने पहला असली परीक्षण पार कर लिया।" शौर्य ने पूछा, "कितने बाकी हैं?" आर्यन ने उत्तर देने से पहले बहुत देर तक उसकी तरफ देखा। "इतने कि तुम्हें अभी गिनने की जरूरत नहीं।" शौर्य हल्का मुस्कुराया। "तुम हमेशा अधूरा जवाब देते हो।" आर्यन भी हल्का मुस्कुराया। "क्योंकि पूरे जवाब कभी-कभी इंसान को आगे बढ़ने से रोक देते हैं।" शौर्य ने अपनी ऊर्जा महसूस की। पहले से थोड़ी अधिक स्थिर। लेकिन वह जानता था कि उसकी शक्ति अभी बहुत दूर तक नहीं बढ़ी थी। उसने कोई नया स्तर प्राप्त नहीं किया था। फिर भी उसे लगा कि आज वह कल से थोड़ा मजबूत है। शक्ति में नहीं। समझ में। उसने आगे देखा। गलियारे के अंत में अब एक और दरवाजा दिखाई दे रहा था। उस पर तीन शब्द लिखे थे। "स्मृति।" "बंधन।" "सत्य।" शौर्य ने उन तीनों शब्दों को पढ़ा। फिर आर्यन की तरफ देखा। "अब कौन सा?" आर्यन ने उत्तर दिया। "अब तुम्हें चुनना नहीं है।" "अब तुम्हें तीनों से गुजरना है।" दूर कहीं सातवें चिन्ह की आवाज गूंजी। और इस बार। उस आवाज के साथ पूरे नगर में एक गहरी कंपन की लहर दौड़ गई। शौर्य ने महसूस किया कि बाहर कहीं बहुत बड़ी शक्ति जाग चुकी थी। आर्यन ने भी उसे महसूस किया। उसके चेहरे की शांति अचानक गायब हो गई। उसने धीमे स्वर में कहा। "बहुत देर हो गई।" शौर्य ने पूछा, "क्या हुआ?" आर्यन ने उसकी तरफ देखा। "जिसे हमने इतने वर्षों तक सोया हुआ समझा था।" उसकी आवाज बेहद धीमी थी। "वह जाग गया है।" और उसी क्षण। सातों स्तंभों की रोशनी एक साथ बुझ गई।

End of Chapter 18

Chapter 18: लौटकर आया अतीत - समंदर का Sikandar | Novel AI Studio