Chapter 11 of 30

दूसरा बंधन

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सुबह की धूप धीरे- धीरे समुद्र के ऊपर फैल रही थी. रात की ठंडक अभी पूरी तरह खत्म नहीं हुई थी. किनारे की रेत पर नमी थी और छोटी- छोटी लहरें आकर उसे छू रही थीं. शौर्य चट्टान पर बैठा समुद्र को देख रहा था. उसकी आँखों के सामने बार- बार वही संदेश घूम रहा था. दूसरा बंधन. दूसरा द्वार तभी सक्रिय होगा जब दूसरा बंधन पूरा होगा. शौर्य ने अपनी हथेली खोली. नीली रोशनी की बहुत हल्की परत उसकी त्वचा पर दिखाई दी और कुछ क्षण बाद गायब हो गई. पहले द्वार के बाद उसकी शक्ति जरूर बढी थी, लेकिन उससे ज्यादा महत्वपूर्ण था उसका नया अनुभव. सह- अनुभूति. अब वह नीरिका की भावनाओं को पहले से कहीं अधिक स्पष्ट रूप से महसूस कर सकता था. शौर्य ने समुद्र की तरफ देखा. नीरिका पानी में कुछ दूर तैर रही थी. वह कभी नीचे जाती. फिर ऊपर आती. कभी किसी छोटी मछली के पीछे जाती. और फिर वापस शौर्य के पास आ जाती. शौर्य उसे देखते हुए सोच रहा था कि दूसरा साथी कैसा होगा. क्या वह भी समुद्र से होगा? क्या वह कोई छोटा जीव होगा? या फिर कोई ऐसा प्राणी जिसे उसने कभी देखा तक नहीं? उसके मन में कई सवाल थे. लेकिन एक बात वह तय कर चुका था. वह केवल प्रणाली की शर्त पूरी करने के लिए किसी जीव को अपना साथी नहीं बनाएगा. पहला बंधन उसके लिए सिर्फ एक शक्ति नहीं था. नीरिका उसके लिए साथी बन चुकी थी. दूसरे के साथ भी ऐसा ही होना चाहिए. उसने प्रणाली खोली. दूसरा बंधन. स्थिति: आवश्यक. सुझाव: प्राकृतिक अनुकूलता खोजें. शौर्य ने शब्द दोबारा पढे. प्राकृतिक अनुकूलता. इसका मतलब क्या है? कोई उत्तर नहीं आया. उसने फिर पूछा. कहाँ खोजूँ? स्क्रीन पर कोई नया संदेश नहीं आया. शौर्य ने हल्की सांस छोडी. प्रणाली से सीधे उत्तर की उम्मीद करना शायद उसकी आदत बनती जा रही थी. वह उठा. नीरिका तुरंत उसकी तरफ आ गई. शौर्य ने उसे देखा. आज हमें कुछ ढूँढना है। नीरिका की ऊर्जा में उत्सुकता दिखाई दी. शौर्य मुस्कुराया. लेकिन मुझे नहीं पता क्या। नीरिका कुछ क्षण उसे देखती रही. फिर वह अचानक दक्षिण की तरफ तैरने लगी. शौर्य ने उसे जाते देखा. उधर? नीरिका ने पीछे मुडकर देखा. फिर आगे बढ गई. शौर्य समझ गया. वह उसके पीछे जाने वाली थी. शौर्य ने बैग उठाया और समुद्र के किनारे- किनारे चलने लगा. कुछ दूर जाने के बाद नीरिका पानी से बाहर नहीं आई. वह समुद्र के भीतर ही उसके साथ चल रही थी. शौर्य कभी उसे देख पाता. कभी उसकी नीली चमक लहरों के नीचे गायब हो जाती. लगभग आधे घंटे बाद समुद्र का किनारा बदलने लगा. यहाँ चट्टानें ज्यादा थीं. रेत कम. लहरें भी पहले से तेज थीं. शौर्य एक बडी चट्टान पर चढ गया. नीचे गहरा पानी था. उसने नीरिका को महसूस किया. वह नीचे थी. लेकिन अब उसकी ऊर्जा कुछ अलग थी. सतर्क. शौर्य तुरंत नीचे उतर गया. उसने पानी में झाँका. नीचे अंधेरा था. उसे कुछ दिखाई नहीं दे रहा था. नीरिका? कुछ सेकंड तक कोई प्रतिक्रिया नहीं हुई. फिर पानी की सतह पर हल्की नीली चमक दिखाई दी. शौर्य ने राहत की सांस ली. लेकिन नीरिका अकेली नहीं थी. उसके पीछे एक और हल्की रोशनी थी. बहुत छोटी. बहुत धीमी. शौर्य ने ध्यान से देखा. पानी के भीतर एक छोटा जीव चट्टान के पीछे छिपा हुआ था. उसका शरीर पूरी तरह दिखाई नहीं दे रहा था. सिर्फ दो चमकती आँखें दिखाई दे रही थीं. शौर्य वहीं रुक गया. नीरिका उस जीव के पास गई. लेकिन हमला नहीं किया. वह केवल उसके चारों तरफ घूमती रही. शौर्य ने अपनी सह- अनुभूति सक्रिय की. एक हल्की भावना उसके भीतर आई. डर. बहुत गहरा डर. शौर्य समझ गया कि वह जीव नीरिका से भी डर रहा था. उसने पानी में हाथ डाला. नीरिका तुरंत शांत हो गई. शौर्य ने अपनी ऊर्जा बिल्कुल कम कर दी. फिर उसने उस छोटे जीव की तरफ हाथ बढाया. वह पीछे हट गया. शौर्य ने हाथ वहीं रोक दिया. उसने उसे छूने की कोशिश नहीं की. कुछ देर तक वह बस वहीं बैठा रहा. नीरिका भी शांत हो गई. समुद्र की लहरें चट्टान से टकरा रही थीं. हवा चल रही थी. लेकिन शौर्य ने कोई जल्दबाजी नहीं की. कुछ मिनट बाद वह छोटा जीव धीरे- धीरे आगे आया. अब शौर्य उसका शरीर देख सकता था. वह एक छोटा समुद्री जीव था. उसका शरीर लंबा और पतला था. उसकी पीठ पर बहुत छोटे चमकीले निशान थे. वे निशान किसी तारामंडल की तरह दिखाई दे रहे थे. शौर्य ने प्रणाली खोली. अज्ञात समुद्री प्रजाति. ऊर्जा स्तर: निम्न. विशेषता: अज्ञात. शौर्य की नजर आखिरी शब्द पर रुक गई. अज्ञात. उसे लगा कि शायद यही वह जीव था जिसे वह खोज रहा था. लेकिन केवल प्रणाली के संकेत के आधार पर निर्णय लेना सही नहीं था. उसने अपना हाथ धीरे से पानी में रखा. जीव थोडा और पास आया. उसकी नाक शौर्य की उंगली से छू गई. और उसी क्षण. शौर्य के भीतर एक भावना आई. भूख. फिर डर. फिर एक अजीब- सी उम्मीद. शौर्य ने हाथ नहीं हटाया. कुछ देर बाद जीव उसके हाथ के आसपास घूमने लगा. नीरिका भी पास आ गई. दोनों जीव एक- दूसरे को देखने लगे. कुछ सेकंड तक कोई हलचल नहीं हुई. फिर नीरिका ने धीरे से अपनी ऊर्जा उसके आसपास फैलाई. छोटा जीव पहले थोडा पीछे हटा. लेकिन कुछ ही पल बाद वह शांत हो गया. शौर्य की आँखों में हल्की खुशी आई. शायद नीरिका ने उसे स्वीकार कर लिया था. शौर्य ने प्रणाली खोली. बंधित प्राणी के लिए उपयुक्तता की जाँच. उसने कुछ क्षण इंतजार किया. फिर परिणाम आया. अनुकूलता: मध्यम. शौर्य की भौंहें सिकुड गईं. मध्यम. यह पर्याप्त नहीं था. उसने जीव की तरफ देखा. वह अभी भी उसके पास था. शौर्य ने धीरे से कहा, तुम्हारा नाम क्या है? स्वाभाविक रूप से कोई उत्तर नहीं मिला. लेकिन अचानक उसकी हथेली पर हल्की ठंडक महसूस हुई. वह जीव उसके हाथ से लग गया था. शौर्य ने मुस्कुराकर कहा, अगर तुम मेरे साथ नहीं आना चाहते तो मैं मजबूर नहीं करूँगा। जीव कुछ क्षण स्थिर रहा. फिर उसने शौर्य की हथेली के चारों तरफ एक छोटी- सी रोशनी बनाई. शौर्य ने उसे महसूस किया. विश्वास. बहुत छोटा. लेकिन वास्तविक. उसी समय प्रणाली सक्रिय हुई. प्राकृतिक बंधन की संभावना. शौर्य कुछ पल चुप रहा. फिर उसने अपना हाथ थोडा आगे किया. तुम्हें मेरे साथ आने की जरूरत नहीं है। वह धीरे से बोला. अगर तुम खुद आना चाहते हो, तभी आना। कुछ सेकंड तक कोई हलचल नहीं हुई. फिर वह छोटा जीव धीरे- धीरे उसकी हथेली के ऊपर आ गया. शौर्य ने उसे उठाया नहीं. उसने बस हाथ स्थिर रखा. जीव वहीं बैठ गया. प्रणाली की रोशनी अचानक तेज हुई. दूसरे बंधन की संभावना सक्रिय. शौर्य की धडकन तेज हो गई. लेकिन उसने तुरंत बंधन शुरू नहीं किया. उसने पूछा, क्या तुम सच में मेरे साथ जाना चाहते हो? जीव ने उसकी हथेली पर हल्की रोशनी छोडी. इस बार शौर्य ने स्पष्ट रूप से एक भावना महसूस की. हाँ. उसने आँखें बंद कीं. फिर बहुत धीरे से अपनी ऊर्जा उस जीव की ऊर्जा से जोडी. कोई तेज प्रकाश नहीं हुआ. कोई विस्फोट नहीं हुआ. केवल एक शांत नीली रोशनी दोनों के बीच फैल गई. शौर्य को लगा जैसे समुद्र की कोई बहुत हल्की लहर उसके भीतर से गुजर गई हो. प्रणाली सामने आई. दूसरा बंधन पूर्ण. नई प्रजाति की पहचान. जलछाया. शौर्य ने नाम पढा. जलछाया. उसने अपनी हथेली पर बैठे छोटे जीव को देखा. वह अब पहले से ज्यादा स्पष्ट दिखाई दे रहा था. उसका शरीर गहरे नीले रंग का था. पीठ पर बने चमकीले निशान अब अधिक साफ दिखाई दे रहे थे. उसकी आँखें बहुत छोटी थीं. लेकिन उनमें अजीब चमक थी. शौर्य ने धीरे से कहा, जलछाया। जीव ने उसकी उंगली को छुआ. शौर्य मुस्कुरा दिया. नीरिका उसके आसपास घूमने लगी. अब तीनों के बीच एक नया बंधन बन चुका था. लेकिन उसी क्षण. समुद्र के भीतर तेज कंपन हुआ. शौर्य का चेहरा बदल गया. नीरिका तुरंत सतर्क हो गई. जलछाया उसकी हथेली से नीचे पानी में चला गया. शौर्य ने चारों तरफ देखा. कुछ दिखाई नहीं दे रहा था. लेकिन उसे ऊर्जा महसूस हो रही थी. वही ऊर्जा. जो उसने गहराई में महसूस की थी. उसका दिल तेज धडकने लगा. प्रणाली सक्रिय हुई. दूसरे द्वार की दिशा निर्धारित. दिशा: उत्तर. दूरी: अज्ञात. शौर्य ने समुद्र की ओर देखा. उसे समझ आया कि पहला द्वार केवल शुरुआत था. दूसरे बंधन के साथ दूसरा द्वार अब सक्रिय हो चुका था. लेकिन उससे पहले. उसे जलछाया की क्षमता समझनी होगी. उसने प्रणाली खोली. जलछाया. ऊर्जा स्तर: निम्न. विशेष क्षमता: छाया प्रवाह. शौर्य ने भौंहें सिकोड लीं. छाया प्रवाह. यह क्या था? उसने पूछा. प्रणाली ने इस बार थोडी जानकारी दी. जल के भीतर प्रकाश और गति को सीमित करने की क्षमता. शौर्य की आँखों में उत्सुकता आई. यह क्षमता सामान्य नहीं थी. जलछाया केवल तेज तैरने वाला जीव नहीं था. वह पानी के भीतर अपने आसपास के प्रकाश को कम कर सकता था. इसका अर्थ था कि वह छिप सकता था. दुश्मन को भ्रमित कर सकता था. और शायद बिना दिखाई दिए आगे बढ सकता था. शौर्य ने उसे एक बार आजमाने को कहा. दिखाओ। जलछाया पानी में गया. कुछ सेकंड बाद उसकी चमक गायब हो गई. शौर्य ने उसे महसूस करने की कोशिश की. उसकी ऊर्जा भी बहुत कम हो गई थी. जैसे वह आसपास के पानी में मिल गया हो. फिर अचानक उसकी हथेली के पास हल्की ठंडक महसूस हुई. जलछाया फिर दिखाई दिया. शौर्य ने आश्चर्य से उसे देखा. अच्छा। नीरिका उसके पास आई. दोनों के बीच अब एक अलग तरह का तालमेल बन रहा था. नीरिका पानी की धाराओं को नियंत्रित कर सकती थी. जलछाया उन धाराओं के भीतर छिप सकता था. दोनों की क्षमताएँ साथ काम कर सकती थीं. शौर्य ने पहली बार महसूस किया कि दूसरा बंधन केवल संख्या बढाना नहीं था. सही साथी मिलने पर उसकी पूरी रणनीति बदल सकती थी. शाम तक शौर्य उसी क्षेत्र में रहा. उसने जलछाया के साथ कई छोटे अभ्यास किए. उसे पता चला कि जलछाया बहुत ज्यादा ऊर्जा खर्च किए बिना कुछ समय तक अदृश्य रह सकता था. लेकिन अगर वह लंबे समय तक अपनी क्षमता सक्रिय रखता, तो जल्दी थक जाता. इसलिए शौर्य ने उसे लगातार अभ्यास नहीं कराया. वह हर थोडी देर बाद रुक जाता. जलछाया चट्टान के पास आराम करता. नीरिका आसपास तैरती रहती. शौर्य दोनों को देखता. उसे अजीब शांति महसूस हो रही थी. पहले वह अकेला था. अब उसके पास दो साथी थे. लेकिन जितनी शक्ति बढ रही थी. उतनी ही जिम्मेदारी भी बढ रही थी. सूरज डूबने लगा. आसमान नारंगी होने लगा. शौर्य ने वापस लौटने का निर्णय लिया. उसने दोनों को अपने साथ आने का संकेत दिया. नीरिका आगे चली. जलछाया उसके नीचे- नीचे तैरने लगा. शौर्य किनारे पर चल रहा था. कुछ दूर जाने के बाद उसे पीछे से किसी के कदमों की आवाज सुनाई दी. वह रुक गया. नीरिका भी रुक गई. जलछाया पानी में गायब हो गया. शौर्य ने पीछे देखा. कोई नहीं था. उसने चारों तरफ देखा. फिर आवाज आई. शौर्य। वह आवाज पहचानता था. वही बूढा मछुआरा. वह थोडी दूरी पर खडा था. शौर्य उसके पास गया. बूढे की नजर समुद्र पर थी. फिर उसने शौर्य की तरफ देखा. तुमने दूसरा साथी ढूँढ लिया। शौर्य चौंक गया. आपको कैसे पता? बूढे ने उसकी आँखों में देखा. समुद्र बता देता है। शौर्य कुछ नहीं बोला. बूढा धीरे- धीरे उसके पास आया. उसकी नजर पानी पर गई. जलछाया की हल्की परछाईं दिखाई दी. बूढे का चेहरा गंभीर हो गया. यह कहाँ मिला? शौर्य ने कहा, यहीं। बूढे ने कुछ पल उसे देखा. तुम भाग्यशाली हो। शौर्य ने पूछा, क्यों? बूढे ने उत्तर देने से पहले समुद्र की ओर देखा. जलछाया बहुत दुर्लभ है। शौर्य चुप रहा. बूढा फिर बोला. लेकिन उससे भी ज्यादा दुर्लभ है उसका किसी इंसान पर विश्वास करना। शौर्य ने जलछाया की तरफ देखा. बूढे की आवाज धीमी हो गई. उसने तुम्हें चुना है। शौर्य ने पूछा, क्या आप उसे जानते हैं? बूढा तुरंत चुप हो गया. कुछ क्षण बाद उसने कहा. मैं उसके जैसे एक जीव को बहुत साल पहले देख चुका हूँ। कहाँ? बूढे ने जवाब नहीं दिया. वह कुछ दूर चला गया. फिर रुककर बोला. उत्तर की तरफ मत जाना। शौर्य का चेहरा गंभीर हो गया. क्यों? बूढे ने पीछे देखे बिना कहा. क्योंकि वहाँ दूसरा द्वार नहीं है। शौर्य ने कुछ कहने के लिए मुँह खोला. लेकिन बूढा जा चुका था. शौर्य वहीं खडा रह गया. उत्तर की तरफ मत जाना. लेकिन प्रणाली ने भी उसे उत्तर की दिशा दिखाई थी. अब वह उलझ गया. उसने तुरंत प्रणाली खोली. दूसरा द्वार. दिशा: उत्तर. स्थिति: सक्रिय. शौर्य ने कुछ देर तक स्क्रीन देखी. फिर उसे अचानक एक विचार आया. शायद बूढा झूठ बोल रहा था. या शायद प्रणाली उसे किसी और रास्ते पर भेज रही थी. दोनों में से कौन सही था? शौर्य को पता नहीं था. लेकिन एक बात स्पष्ट थी. अब उसके पास दो विकल्प थे. प्रणाली पर भरोसा करना. या उस बूढे पर. उसने समुद्र की तरफ देखा. नीरिका उसकी तरफ देख रही थी. जलछाया पानी में कहीं दिखाई नहीं दे रहा था. शौर्य ने सह- अनुभूति सक्रिय की. नीरिका शांत थी. लेकिन उसकी भावना में हल्की चिंता थी. शौर्य ने जलछाया को महसूस करने की कोशिश की. कुछ नहीं. फिर अचानक बहुत हल्की भावना आई. छिपना. शौर्य समझ गया. जलछाया अभी भी आसपास था. वह उसे देख रहा था. शौर्य ने धीरे से कहा, ठीक है। वह वापस घर की ओर चल पडा. उस रात उसने बहुत देर तक सोचा. अगर प्रणाली ने दिशा दिखाई थी, तो वह उत्तर की तरफ जाएगा. लेकिन बिना तैयारी के नहीं. उसे दूसरे द्वार तक पहुँचने से पहले अपनी दोनों क्षमताओं का सही उपयोग सीखना होगा. उसने अपने कमरे में बैठकर एक कागज निकाला. उसने पहली बार अपनी यात्रा के बारे में लिखना शुरू किया. पहला बंधन. नीरिका. क्षमता. जल प्रवाह. पहला द्वार. सह- अनुभूति. दूसरा बंधन. जलछाया. क्षमता. छाया प्रवाह. फिर उसने नीचे लिखा. दूसरा द्वार. दिशा: उत्तर. उसने कुछ क्षण कलम रोककर सोचा. फिर एक और वाक्य लिखा. बूढे की चेतावनी. उत्तर मत जाना. वह कुर्सी पर पीछे झुक गया. अब उसके सामने सबसे बडा सवाल यही था. Kiss पर भरोसा करे? प्रणाली पर? या उस बूढे पर? रात गहरी होती गई. शौर्य की आँखें भारी होने लगीं. लेकिन सोने से पहले उसने आखिरी बार खिडकी से समुद्र की तरफ देखा. समुद्र शांत था. बहुत शांत. फिर उसे लगा जैसे दूर पानी के ऊपर एक पल के लिए नीली रोशनी दिखाई दी. और उसके तुरंत बाद. एक दूसरी रोशनी. पहली से अलग. हल्की सफेद. शौर्य की आँखें उस दिशा पर टिक गईं. वह सफेद रोशनी उत्तर में नहीं थी. वह पश्चिम में थी. उसने प्रणाली खोली. कुछ नहीं. कोई ऊर्जा संकेत नहीं. शौर्य कुछ देर तक खिडकी के पास खडा रहा. फिर धीरे से बोला. तो असली रास्ता कौन- सा है? कोई उत्तर नहीं मिला. लेकिन समुद्र के भीतर. बहुत दूर. एक पत्थर की दीवार पर दूसरा चिन्ह हल्का- सा चमक उठा. और उसके ठीक सामने एक तीसरा निशान पहली बार सक्रिय हुआ. जैसे किसी ने दूर से शौर्य की यात्रा को देख लिया हो. और अब. कोई और भी उसकी अगली चाल का इंतजार कर रहा था.

End of Chapter 11