Chapter 2 of 14
अराजकता की पहली सांस
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वहां कोई प्रकाश नहीं था.
कोई हवा नहीं थी.
यहां तक कि शांति भी नहीं थी.
यह अंधेरा भी नहीं था और उजाला भी नहीं. यह नींद नहीं थी और जागना भी नहीं. वहां बस एक ऐसी विशाल शून्यता थी, जिसका कोई आकार नहीं था.
न कोई दिशा.
न कोई सीमा.
न कोई शुरुआत.
न कोई अंत.
वह शून्यता हर ओर फैली हुई थी. ऐसा लगता था जैसे पूरा अस्तित्व स्वयं में लिपटा हुआ हो. जैसे कोई अनंत शक्ति अपने ही भीतर सिकुडकर पडी हो और अभी तक उसे यह भी पता न हो कि उसे जागना है या नहीं.
वहां समय भी नहीं था.
क्योंकि समय के बहने के लिए कुछ होना जरूरी था.
और वहां कुछ भी नहीं था.
बस एक अनंत, स्थिर, विचित्र अस्तित्व.
वह न अच्छा था, न बुरा.
न दयालु.
न क्रूर.
वह केवल था.
और बहुत लंबे समय तक कुछ नहीं बदला.
फिर.
उस शून्यता ने सांस ली.
एक लंबी.
बहुत धीमी सांस.
और उसी एक सांस के साथ अस्तित्व की पहली हलचल हुई.
जैसे किसी सोए हुए महासागर की सतह पर पहली लहर उठी हो.
अराजकता ने फिर सांस ली.
इस बार उससे कुछ जन्मा.
पहले एक विचार.
फिर एक कंपन.
फिर एक हलचल.
और धीरे- धीरे उन शक्तियों ने जन्म लेना शुरू किया, जिन्हें आने वाली अनगिनत सभ्यताएं अलग- अलग नामों से पुकारने वाली थीं.
देवता.
दानव.
आकाश.
धरती.
समुद्र.
अंधकार.
प्रकाश.
जीवन.
मृत्यु.
लेकिन कहानियां अलग थीं, इसलिए उनके नाम भी अलग हो गए.
लोगों ने अलग- अलग जगहों पर अलग- अलग देवताओं की कल्पना की. अलग- अलग भाषाओं में उनके लिए अलग- अलग कथाएं बनाई गईं.
लेकिन शायद.
शायद उन सभी कथाओं की शुरुआत एक ही सांस से हुई थी.
अराजकता की पहली सांस से.
पूर्व में: ब्रह्मांडीय अंडा
बहुत दूर, उस स्थान पर जहां अस्तित्व अभी अपने आकार को समझने की कोशिश कर रहा था, अराजकता एक बार फिर हिली.
इस बार उसकी गति पहले से अलग थी.
जैसे कोई विशाल शक्ति अपने भीतर कुछ गढ रही हो.
और फिर उस शून्यता के बीच एक अंडा प्रकट हुआ.
वह कोई साधारण अंडा नहीं था.
उसके भीतर पूरा ब्रह्मांड घूम रहा था.
अग्नि.
जल.
पृथ्वी.
हवा.
समय.
और ऐसी अनगिनत शक्तियां, जिनका नाम किसी जीवित भाषा में कभी नहीं रखा गया.
सब कुछ उस अंडे के भीतर एक भयंकर तूफान की तरह घूम रहा था.
और उसके बिल्कुल मध्य में कोई सो रहा था.
पांगु.
एक विशालकाय प्राणी.
उसका शरीर इतना विशाल था कि यदि वह अपने पूरे आकार में खडा हो जाता, तो स्वयं आकाश उसके सामने छोटा लगने लगता.
उसके बाल तूफानी बादलों की तरह थे.
उसकी त्वचा पत्थर जैसी कठोर थी.
और उसकी सांसों से हवा पैदा होती थी.
फिर एक दिन.
पांगु जाग गया.
उसने अपनी आंखें खोलीं.
उसके सामने कुछ भी स्पष्ट नहीं था.
चारों ओर केवल भारी अंधकार और घूमती हुई शक्तियां थीं.
पांगु ने अपने शरीर को फैलाया.
उसने हाथ बढाए.
और उसी क्षण.
ब्रह्मांडीय अंडा टूट गया.
प्रकाश ऊपर उठ गया.
अंधकार नीचे गिर गया.
लेकिन दोनों शक्तियां फिर से एक- दूसरे में मिलना चाहती थीं.
पांगु ने अपने दोनों हाथ फैलाकर उन्हें अलग कर दिया.
उसने प्रकाश को ऊपर धकेला.
अंधकार को नीचे रोके रखा.
और इस तरह आकाश और पृथ्वी पहली बार अलग हुए.
लेकिन उसका काम यहीं खत्म नहीं हुआ.
हजारों वर्षों तक पांगु बढता रहा.
हर दिन थोडा और ऊंचा.
हर दिन थोडा और शक्तिशाली.
उसके सिर के ऊपर आकाश उठता गया और उसके पैरों के नीचे धरती मजबूत होती गई.
उसकी हर सांस हवा को आकार देती.
उसकी हर हलचल दुनिया में बदलाव लाती.
फिर एक दिन.
पांगु मर गया.
लेकिन उसका अंत भी एक शुरुआत बन गया.
उसकी हड्डियां पर्वत बन गईं.
उसका रक्त नदियों और समुद्रों में बदल गया.
उसकी आंखों में से एक चंद्रमा बन गई.
दूसरी सूर्य.
उसके बाल जंगलों में बदल गए.
उसकी सांसें हवाओं में फैल गईं.
उसका शरीर संसार बन गया.
लेकिन वह अराजकता से जन्म लेने वाला अकेला नहीं था.
पश्चिम में: काले जल का टीला
बहुत दूर, उस जगह जहां कोई सूर्य नहीं चमकता था, अराजकता ने एक और रूप लिया.
वहां गहरा जल था.
असीम.
काला.
स्थिर.
उसे नू कहा गया.
उस जल की कोई सीमा दिखाई नहीं देती थी.
फिर उस काले महासागर के बीच अचानक एक छोटी- सी जगह पानी से ऊपर उठी.
एक सूखी भूमि.
एक छोटा टीला.
और उस टीले से अतुम का जन्म हुआ.
उसका कोई माता- पिता नहीं था.
उसका कोई निश्चित आकार भी नहीं था.
उसने स्वयं को अपनी इच्छा से आकार दिया.
फिर उसने सांस ली.
उसकी सांस से हवा और धुंध बनी.
शू.
और टेफनुत.
उनसे आगे गैब और नट का जन्म हुआ.
गैब धरती था.
नट आकाश.
दोनों एक- दूसरे से इतना प्रेम करते थे कि वे अलग होने को तैयार नहीं थे.
आकाश धरती से चिपका रहा.
धरती आकाश को अपने पास खींचती रही.
तब शू को उन्हें अलग करना पडा.
उसने नट को ऊपर उठाया और उसे आकाश में थाम लिया.
इस तरह आकाश धरती से अलग हुआ.
नट के शरीर पर तारे चमकने लगे.
उसकी भुजाओं से बारिश गिरने लगी.
और पहली बार दिन और रात ने एक- दूसरे का पीछा करना शुरू किया.
उत्तर में: बर्फ और अग्नि
लेकिन अराजकता की कहानी अभी पूरी नहीं हुई थी.
बहुत दूर उत्तर में एक ऐसी जगह थी जहां न सूर्य था, न धरती.
वहां केवल एक विशाल शून्य था.
गिन्नुंगागप.
एक ऐसा खाली स्थान, जिसके एक ओर अनंत बर्फ थी और दूसरी ओर प्रचंड अग्नि.
दोनों एक- दूसरे की ओर बढे.
जहां बर्फ और आग मिले, वहां बर्फ पिघली.
और उस पिघले हुए जल से एक विशालकाय प्राणी जन्मा.
यमीर.
पहला दानव.
उसका शरीर पहाडों जितना विशाल था.
उसके पसीने से दूसरे दानव जन्मे.
उसकी देह से विचित्र जीव निकले.
और उसके पास एक विशाल गाय खडी थी.
ऑधुम्ला.
वह बर्फ चाटकर जीवित रहती थी.
एक दिन उसकी जीभ बर्फ की मोटी परत के भीतर किसी चीज से टकराई.
वह लगातार उस स्थान को चाटती रही.
धीरे- धीरे बर्फ हटती गई.
और उसके भीतर से बुरी नाम का पहला देवता प्रकट हुआ.
बुरी से बोर का जन्म हुआ.
बोर ने एक बर्फीली स्त्री से विवाह किया.
और उनसे तीन पुत्र हुए.
ओडिन.
विली.
और वे.
इन तीनों को एक ऐसी दुनिया पसंद नहीं थी जहां दानवों का शासन हो.
इसलिए उन्होंने यमीर के विरुद्ध युद्ध किया.
युद्ध के अंत में यमीर गिर पडा.
और उसके शरीर से एक नई दुनिया बनाई गई.
उसकी हड्डियां पर्वत बनीं.
उसकी खोपडी आकाश.
उसका रक्त समुद्र.
और उसकी भौंहों से उन्होंने एक ऐसी सीमा बनाई, जिसके भीतर मनुष्यों के रहने की जगह बनी.
मिडगार्ड.
लेकिन दानव पूरी तरह समाप्त नहीं हुए.
वे बच गए.
और वे प्रतीक्षा करते रहे.
क्रोध के साथ.
धैर्य के साथ.
उस दिन की प्रतीक्षा में जब वे फिर से अपनी शक्ति वापस पा सकें.
केंद्र में: फुसफुसाती अग्नि
फिर अराजकता ने एक बार और सांस ली.
इस बार उसकी सांस इतनी हल्की थी कि वह रेशम पर गुजरती हवा जैसी लगी.
उस सांस से एक आवाज निकली.
एक कंपन.
एक अनंत ध्वनि.
ॐ.
वह ध्वनि विचार में बदली.
विचार अग्नि बना.
और उस अग्नि से तीन महान शक्तियां प्रकट हुईं.
विष्णु.
शिव.
और सृष्टि की वह शक्ति जो संसार को जन्म देती है.
वे एक- दूसरे से नहीं लडे.
उन्होंने नृत्य किया.
सृजन.
जीवन.
मृत्यु.
फिर दोबारा सृजन.
फिर जीवन.
फिर मृत्यु.
दुनिया सीधी रेखा में नहीं चलती थी.
वह चक्रों में घूमती थी.
एक युग समाप्त होता और दूसरा शुरू हो जाता.
एक संसार डूबता और दूसरा जन्म लेता.
और देवता उस चक्र को देखते रहते.
प्रतीक्षा करते हुए.
क्योंकि वे जानते थे कि समय कभी एक जगह नहीं रुकता.
फिर अराजकता ने एक और रहस्य को जन्म दिया.
दो आत्माएं स्वर्ग के तैरते हुए पुल पर खडी थीं.
इजानागी.
और इजानामी.
उनके नीचे एक ऐसी दुनिया थी, जिसका कोई निश्चित आकार नहीं था.
इजानागी ने अपना भाला समुद्र में डाला.
उसने जल को घुमाया.
और भाले से गिरने वाली बूंदों से द्वीप बनने लगे.
वे नीचे उतरे.
उनका मिलन हुआ.
और उनके मिलन से अनेक देवताओं का जन्म हुआ.
हवा.
अग्नि.
पत्थर.
जंगल.
समुद्र.
लेकिन फिर इजानामी ने अग्नि को जन्म दिया.
और उस अग्नि ने उसके शरीर को भीतर से जला दिया.
वह मर गई.
इजानागी उसे वापस लाने के लिए मृतकों की दुनिया में गया.
लेकिन वहां पहुंचकर उसने देखा कि इजानामी बदल चुकी थी.
उसका शरीर सड चुका था.
मृत्यु ने उसे अपने भीतर ले लिया था.
इजानामी ने उससे कहा कि वह उसकी ओर न देखे.
लेकिन इजानागी ने उसकी बात नहीं मानी.
उसने देखा.
और जो कुछ उसने देखा, उसने उसके भीतर भय भर दिया.
वह वहां से भाग गया.
उसने मृतकों की दुनिया का रास्ता बंद कर दिया.
फिर अपने शरीर से मृत्यु के स्पर्श को हटाने के लिए उसने स्नान किया.
और उसी शुद्धिकरण से तीन महान संतानों का जन्म हुआ.
आकाश अब खाली नहीं था.
देवता बढ रहे थे.
कामि फैल रहे थे.
और संसार धीरे- धीरे अपना आकार ग्रहण कर रहा था.
लेकिन इन सभी कथाओं के बीच एक ऐसी जगह भी थी जहां किसी अन्य चीज का अस्तित्व नहीं था.
न जल.
न आकाश.
न ध्वनि.
बस एक खाली जगह.
एक गहरी खाई.
वह न क्रोधित थी.
न दयालु.
वह बस वहां थी.
और उसी से अस्तित्व के कुछ सबसे प्राचीन रूप जन्मे.
गैया.
धरती.
मोटी, जीवित और सांस लेती हुई.
टार्टरस.
अनंत गहराई.
एक ऐसी जगह जहां प्रकाश भी पहुंचने से डरता था.
इरोस.
प्रेम मात्र नहीं, बल्कि वह शक्ति जो एक चीज को दूसरी चीज से जोडती थी.
निक्स.
रात.
शुद्ध और तारों से भी पहले का अंधकार.
एरेबस.
छाया.
बुराई नहीं.
बस खालीपन.
गैया ने आकाश को जन्म दिया.
यूरेनस.
आकाश और धरती एक- दूसरे के साथ जुड गए.
उनसे संतानें जन्म लेने लगीं.
टाइटन.
साइक्लोप्स.
और वे विशाल प्राणी जिन्हें संसार अभी ठीक से समझ भी नहीं पाया था.
लेकिन यूरेनस अपने ही बच्चों से डरता था.
उसे लगता था कि एक दिन वे उससे उसकी सत्ता छीन लेंगे.
इसलिए उसने उन्हें गैया के भीतर कैद कर दिया.
धरती के गर्भ में.
गैया दर्द से कराह उठी.
उसका क्रोध बढता गया.
अंततः उसने अपने बच्चों में से एक को चुना.
क्रोनोस.
उसने उसके लिए एक हंसिया बनाया.
हड्डियों और अपने क्रोध से.
क्रोनोस ने हथियार उठाया.
और अपने पिता पर प्रहार किया.
यूरेनस गिर पडा.
उसके रक्त की बूंदें धरती पर गिरीं.
समुद्र में गिरीं.
और उन बूंदों से भी नए जीव और नई शक्तियां जन्मीं.
क्रोध.
हिंसा.
और नए देवता.
क्रोनोस ने सिंहासन संभाल लिया.
अब वह शासक था.
उसने अपनी बहन रिया से विवाह किया.
लेकिन सत्ता ने उसके भीतर भी वही डर पैदा कर दिया, जो कभी उसके पिता के भीतर था.
उसे भविष्यवाणी का भय था.
उसे डर था कि उसका अपना कोई बच्चा एक दिन उसे सिंहासन से गिरा देगा.
इसलिए जब भी रिया किसी बच्चे को जन्म देती.
क्रोनोस उसे अपने मुंह में डालकर निगल जाता.
एक.
फिर दूसरा.
फिर तीसरा.
फिर चौथा.
फिर पांचवां.
रिया अपने बच्चों को बचाना चाहती थी.
लेकिन क्रोनोस की शक्ति के सामने वह कुछ नहीं कर सकती थी.
फिर छठी संतान आने वाली थी.
और इस बार रिया ने निर्णय लिया.
वह अपने बच्चे को क्रोनोस के हाथों नहीं जाने देगी.
बच्चा जन्मा.
उसकी आंखों में तूफान जैसा रंग था.
रिया ने उसे अपने हाथों में उठाया.
कुछ क्षणों तक वह उसे देखती रही.
उसके भीतर भय भी था.
लेकिन उस भय से कहीं ज्यादा एक आशा थी.
उसने बच्चे को एक गुफा में छिपा दिया.
गुफा को रहस्यमय शक्तियों और पर्वत के प्राणियों ने घेर रखा था.
जंगली बकरियां आसपास घूमती थीं.
पर्वतीय आत्माएं उसकी रक्षा करती थीं.
और जब बच्चा रोता, तो पहरेदार अपने हथियारों को टकराकर उसकी आवाज को बाहर जाने से रोकते.
आकाश शांत था.
धरती शांत थी.
कोई बिजली नहीं गिरी.
कोई पर्वत नहीं कांपा.
लेकिन उस दिन संसार में कुछ बदल गया था.
देवता अब केवल शक्तियां नहीं रहे थे.
अब उनके चेहरे थे.
उनकी इच्छाएं थीं.
उनकी महत्वाकांक्षाएं थीं.
उनकी कमजोरियां थीं.
और उनमें से एक बच्चा आगे चलकर उन सभी को बदलने वाला था.
उसका नाम था.
ज्यूस.
लेकिन ज्यूस के लिए यह सब किसी महान भविष्यवाणी की तरह महसूस नहीं हो रहा था.
बल्कि उसकी समस्या कुछ और थी.
उसने अपनी छोटी- सी मुट्ठी हिलाई.
फिर दूसरी.
उसने अपने पैरों को हिलाने की कोशिश की.
कोई फायदा नहीं हुआ.
उसका शरीर बेहद छोटा था.
इतना छोटा कि उसे देखकर शायद कोई भी उसे भविष्य के देवताओं के राजा के रूप में पहचानने की गलती नहीं करता.
उसने आंखें खोलीं.
कुछ पल तक वह गुफा की छत को घूरता रहा.
फिर उसके दिमाग में एक विचार आया.
ठीक है. सबसे पहले. मैं हूं कहां?
उसने बोलने की कोशिश की.
लेकिन उसके मुंह से कोई गंभीर आवाज नहीं निकली.
सिर्फ एक अजीब- सी किलकारी.
उसने अपनी आंखें बडी कर लीं.
उसने फिर कोशिश की.
आ.
उसके मुंह से निकली आवाज किसी घायल चूहे जैसी थी.
उसका चेहरा अविश्वास से सिकुड गया.
नहीं।
फिर उसने खुद को शांत करने की कोशिश की.
नहीं, नहीं, नहीं।
उसने गहरी सांस लेने की कोशिश की.
लेकिन उसके छोटे फेफडों ने जितनी हवा संभाली, उतनी ही.
उसने गर्दन घुमाई.
और तभी उसकी नजर अपने ठीक सामने मौजूद एक बकरी पर पडी.
बकरी बिल्कुल शांत खडी थी.
और उसके सामने.
उसका दूध.
ज्यूस कुछ क्षणों तक उसे देखता रहा.
फिर उसने अपनी आंखें बंद कर लीं.
नहीं।
उसने मन ही मन कहा.
ऐसा नहीं हो सकता।
उसने फिर आंखें खोलीं.
बकरी वहीं थी.
नहीं. बिल्कुल नहीं।
उसका छोटा हाथ हवा में उठा.
उसने विरोध करने की कोशिश की.
लेकिन उसी समय उसके शरीर की अपनी प्रवृत्ति ने उसके सारे विरोध को हरा दिया.
उसका मुंह अपने आप आगे बढा.
और कुछ ही क्षण बाद दूध उसके मुंह में था.
उसका स्वाद.
अजीब तरह से अच्छा था.
इतना अच्छा कि उसके भीतर की सारी शिकायत कुछ पल के लिए रुक गई.
फिर उसका दिमाग दोबारा सक्रिय हुआ.
हे देवताओं.
उसने मन ही मन कराहते हुए सोचा.
मैं बकरी का दूध सीधे स्रोत से पी रहा हूं।
उसने धीरे- धीरे पीछे हटने की कोशिश की.
यही मेरी जिंदगी है अब?
उसने चीखने की कोशिश की.
लेकिन आवाज निकली.
आंऽऽ!
ज्यूस जम गया.
उसने अपनी ही आवाज सुनी.
उसकी आंखें फैल गईं.
एक मिनट।
उसने फिर बोलने की कोशिश की.
तुम.
बाहर निकला.
आऽऽ!
उसने कुछ पल तक बिल्कुल स्तब्ध होकर छत को देखा.
मेरी आवाज कहां गई?
उसने पूरी ताकत से चिल्लाने की कोशिश की.
मेरी आवाज कहां है?
लेकिन बाहर केवल एक और तेज शिशु- किलकारी निकली.
उसका चेहरा गुस्से से लाल हो गया.
उसने अपनी छोटी मुट्ठी जमीन पर दे मारी.
और तभी.
ठक!
पत्थर की जमीन पर एक महीन दरार फैल गई.
ज्यूस की आंखें धीरे- धीरे नीचे गईं.
वह कुछ क्षणों तक उस दरार को देखता रहा.
फिर उसने दोबारा अपनी मुट्ठी को देखा.
फिर दरार को.
फिर मुट्ठी को.
ओह।
उसकी आंखों में पहली बार उत्सुकता दिखाई दी.
तो मेरी आवाज नहीं रही.
उसने धीरे- धीरे सोचा.
लेकिन मेरी ताकत.
बाहर अचानक बादल गरजे.
गुफा की दीवारें हल्के से कांपीं.
ज्यूस ने ऊपर देखा.
गरज बहुत तेज नहीं थी.
बल्कि ऐसा लगा जैसे आकाश खुद धीमे से हंस रहा हो.
बकरी ने उसकी ओर देखा.
फिर सामान्य तरीके से आवाज निकाली.
मेंऽऽ।
ज्यूस ने उसे घूरा.
तुम्हें बिल्कुल अंदाजा नहीं है कि मैं कौन हूं, है न?
बकरी ने पलक तक नहीं झपकाई.
वह वापस घास चबाने लगी.
ज्यूस ने लंबी सांस ली.
बहुत बढिया।
उसने अपनी छोटी पीठ जमीन पर टिकाई.
मैं एक बच्चे के शरीर में हूं।
उसने धीरे- धीरे अपने आसपास देखा.
एक गुफा में हूं।
फिर उसकी नजर बकरी पर गई.
और मुझे एक बकरी दूध पिला रही है।
उसने कुछ क्षण आंखें बंद रखीं.
कमाल है।
फिर उसके दिमाग में एक और बात आई.
उसका चेहरा धीरे- धीरे गंभीर हो गया.
रुको।
उसने अपनी यादों को खंगालना शुरू किया.
उसके सामने कुछ टूटे हुए चित्र चमके.
एक आधुनिक शहर.
ऊंची इमारतें.
कारें.
स्क्रीन.
मानव जीवन.
फिर किताबें.
पुरानी कथाएं.
Greek Mythology।
क्रोनोस.
टाइटन.
रिया.
और.
ज्यूस.
उसका दिल अचानक तेज धडकने लगा.
मैं.
उसने अपनी सांस रोक ली.
मैं ज्यूस हूं?
कुछ क्षणों तक गुफा में केवल उसकी सांसों की आवाज थी.
फिर उसकी आंखों में अविश्वास की जगह धीरे- धीरे एक अलग चमक आने लगी.
अगर उसकी यादें सही थीं.
तो उसे पता था कि आगे क्या होने वाला है.
उसे पता था कि क्रोनोस कौन है.
उसे पता था कि रिया ने उसे क्यों छिपाया.
उसे पता था कि उसके भाई- बहन उसके पिता के पेट में कैद हैं.
उसे पता था कि एक दिन वह उन्हें बाहर निकालेगा.
उसे पता था कि टाइटनों के विरुद्ध युद्ध होगा.
उसे पता था कि ओलंपस बनेगा.
उसे पता था कि वह देवताओं का राजा बनेगा.
लेकिन.
एक बात उसे और भी स्पष्ट दिखाई दे रही थी.
मूल कथा में ज्यूस ने जो कुछ किया था, वह इस दुनिया का अंतिम परिणाम नहीं था.
वह केवल एक संभावित रास्ता था.
और अब.
वह रास्ता बदल सकता था.
एक आधुनिक मनुष्य के रूप में उसने रणनीति, इतिहास और सत्ता के बारे में पढा था.
वह जानता था कि केवल ताकत से युद्ध नहीं जीते जाते.
जानकारी ताकत होती है.
समय पर सही निर्णय लेना ताकत होती है.
दुश्मन को खुद से पहले समझ लेना ताकत होती है.
और सबसे महत्वपूर्ण.
अपने दुश्मन को यह विश्वास दिलाना कि वह अभी भी जीत रहा है.
ज्यूस की छोटी आंखों में चमक और गहरी हो गई.
उसने छत की ओर देखा.
फिर बहुत धीरे से अपनी मुट्ठी बंद की.
अगर मैं सच में ज्यूस हूं.
उसने मन ही मन कहा.
तो इस बार कहानी वैसी नहीं चलेगी जैसी मैंने पढी थी।
उसके होंठों पर एक हल्की मुस्कान आई.
लेकिन अगले ही पल उसका पेट गुर्राया.
ज्यूस चुप हो गया.
उसने बकरी की ओर देखा.
बकरी ने भी उसकी ओर देखा.
कुछ क्षणों तक दोनों एक- दूसरे को देखते रहे.
फिर ज्यूस ने भारी मन से आंखें बंद कर लीं.
ठीक है।
उसने मन ही मन कहा.
पहले देवताओं का राजा बनने से पहले.
उसने फिर बकरी की ओर देखा.
मुझे शायद बडा होना पडेगा।
बाहर बादल फिर गरजे.
इस बार आवाज पहले से थोडी तेज थी.
दूर पर्वतों के ऊपर हवा चली.
गुफा के भीतर मौजूद पहरेदारों ने अपनी नजरें उठाईं.
किसी को समझ नहीं आया कि अचानक वातावरण क्यों बदल गया था.
लेकिन उस गुफा के भीतर एक छोटा बच्चा अपनी आंखें बंद किए हुए था.
उसके शरीर में अभी इतनी शक्ति नहीं थी कि वह अपनी इच्छा से बिजली बुला सके.
उसके हाथ छोटे थे.
उसकी आवाज कमजोर थी.
उसका शरीर असहाय था.
लेकिन उसके भीतर एक ऐसी चीज थी, जो किसी भी हथियार से अधिक खतरनाक थी.
भविष्य का ज्ञान.
अधूरा.
टूटा हुआ.
लेकिन पर्याप्त.
और सबसे महत्वपूर्ण.
उसे पता था कि उसके पिता उससे डरते हैं.
उसे पता था कि क्रोनोस अपने बच्चों को निगल चुका है.
उसे पता था कि एक दिन क्रोनोस को उसकी मौजूदगी का पता चलेगा.
इसलिए ज्यूस ने उसी क्षण एक निर्णय लिया.
वह केवल जीवित नहीं रहेगा.
वह तैयारी करेगा.
चुपचाप.
धीरे- धीरे.
हर दिन.
जब तक वह इतना शक्तिशाली न हो जाए कि जब क्रोनोस को उसके अस्तित्व का पता चले.
तब तक बहुत देर हो चुकी हो.
ज्यूस ने अपनी छोटी मुट्ठी फिर से बंद की.
पत्थर के नीचे एक बहुत हल्की बिजली चमकी.
और पहली बार.
उसके चेहरे पर बच्चे वाली मासूमियत के पीछे किसी अनुभवी व्यक्ति की मुस्कान दिखाई दी.
क्रोनोस.
उसने मन ही मन कहा.
तुमने अपने बच्चों को निगलकर सोचा था कि तुमने भविष्य को निगल लिया।
उसकी आंखें धीरे- धीरे बंद हो गईं.
लेकिन इस बार.
गुफा के बाहर आकाश में एक और बिजली चमकी.
भविष्य तुम्हारे खिलाफ पैदा हुआ है।