Chapter 30 of 30
नीरिका का छिपा हुआ सच
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सुबह की पहली रोशनी पहाड़ की चोटी से उतरकर धीरे-धीरे घाटी में फैल रही थी।
रात की ठंड अभी पूरी तरह खत्म नहीं हुई थी।
पेड़ों की पत्तियों पर जमी ओस हल्की हवा के साथ कांप रही थी।
शौर्य एक बड़े पत्थर पर बैठा था।
उसकी नजर सामने फैली घाटी पर थी।
कुछ दूरी पर आर्यन खड़ा था।
विराज उससे धीमी आवाज में बात कर रहा था।
लेकिन नीरिका अकेली थी।
वह कुछ कदम दूर एक पेड़ के नीचे खड़ी होकर अपने हाथ में पकड़े छोटे धातु के टुकड़े को देख रही थी।
वह टुकड़ा देखने में साधारण था।
लेकिन उसकी सतह पर बहुत महीन रेखाएं बनी थीं।
सात रेखाएं।
और उनके बीच एक छोटा वृत्त।
नीरिका ने अपनी उंगलियां उस वृत्त पर रखीं।
धातु हल्का गर्म हो गया।
उसने तुरंत हाथ पीछे खींच लिया।
उसकी आंखों में चिंता उतर आई।
कुछ देर तक वह चुप खड़ी रही।
फिर उसने पीछे देखा।
शौर्य अभी भी उसे नहीं देख रहा था।
आर्यन और विराज बातचीत में व्यस्त थे।
नीरिका ने अपनी मुट्ठी बंद कर ली।
वह जानती थी कि अब समय आ गया है।
लेकिन वह यह भी जानती थी कि जो बात वह बताने वाली थी, उसके बाद शायद शौर्य उसे पहले जैसा नहीं देख पाएगा।
वह धीरे-धीरे शौर्य के पास गई।
"तुम ठीक हो?"
शौर्य ने उसकी ओर देखा।
"हां।"
नीरिका ने उसकी आंखों में कुछ खोजने की कोशिश की।
"झूठ।"
शौर्य हल्का-सा मुस्कुराया।
"तुम्हें कैसे पता?"
"क्योंकि जब तुम ठीक होते हो, तब तुम किसी एक चीज को इतनी देर तक नहीं देखते।"
शौर्य ने सामने घाटी की ओर देखा।
"मुझे बहुत कुछ समझ नहीं आ रहा।"
नीरिका उसके पास बैठ गई।
"मुझे पता है।"
कुछ पल दोनों चुप रहे।
फिर शौर्य ने पूछा, "तुम्हें अयन के बारे में कुछ पता है?"
नीरिका ने तुरंत उत्तर नहीं दिया।
उसकी उंगलियां अनायास उस धातु के टुकड़े पर कस गईं।
शौर्य ने यह देख लिया।
"तुम जानती हो।"
नीरिका ने उसकी तरफ देखा।
"थोड़ा।"
"कितना?"
"इतना कि उससे सावधान रहना चाहिए।"
शौर्य ने कहा, "विराज भी यही कहता है।"
नीरिका ने सिर हिलाया।
"लेकिन विराज जितना जानता है, उतना वह तुम्हें नहीं बताएगा।"
शौर्य की नजर उसकी आंखों पर टिक गई।
"और तुम?"
नीरिका कुछ क्षण चुप रही।
फिर उसने कहा, "मैं बताऊंगी।"
दूर खड़े आर्यन ने उनकी तरफ देखा।
नीरिका की नजर उससे मिली।
आर्यन ने तुरंत समझ लिया कि कुछ बदलने वाला है।
वह विराज के साथ शौर्य और नीरिका के पास आया।
"क्या हुआ?"
नीरिका ने कहा, "अब मुझे भी कुछ बताना है।"
आर्यन ने भौंहें सिकोड़ लीं।
"क्या?"
नीरिका ने उसकी ओर देखा।
"तुम्हारी मां के बारे में।"
आर्यन एकदम शांत हो गया।
शौर्य ने उसकी तरफ देखा।
नीरिका ने धातु का टुकड़ा बाहर निकाला।
"यह मुझे कई साल पहले मिला था।"
आर्यन ने उसे पहचानने की कोशिश की।
"यह क्या है?"
"तुम्हारी मां की वस्तु।"
विराज भी अब उनकी ओर आ गया।
उसने धातु के टुकड़े को देखते ही अपनी आंखें संकरी कर लीं।
"यह तुम्हारे पास कैसे आया?"
नीरिका ने उसकी ओर देखा।
"क्योंकि तुम्हारी मां ने मुझे दिया था।"
विराज चुप हो गया।
आर्यन ने तुरंत पूछा, "मेरी मां ने?"
नीरिका ने सिर हिलाया।
"तुम्हारे जन्म से कुछ समय पहले।"
आर्यन ने कुछ पल उसे देखा।
"तुम उनसे मिली थीं?"
"हां।"
"कहां?"
नीरिका ने उत्तर दिया, "पुराने वन के पास।"
विराज ने बीच में कहा, "तुम उस समय वहां नहीं थीं।"
नीरिका ने उसकी तरफ देखा।
"तुम्हें कैसे पता?"
विराज चुप हो गया।
नीरिका ने कहा, "तुम्हें हर चीज के बारे में जितना पता है, उतना तुम्हें लगता है कि किसी और को नहीं पता।"
विराज ने उसकी आंखों में देखा।
इस बार उसके चेहरे पर पहली बार असमंजस था।
आर्यन ने पूछा, "तुम दोनों एक-दूसरे को पहले से जानते हो?"
नीरिका ने कहा, "हां।"
शौर्य ने पूछा, "कब से?"
नीरिका ने उसकी ओर देखा।
"तुम्हारे जन्म से पहले से।"
शौर्य शांत हो गया।
नीरिका ने धातु का टुकड़ा जमीन पर रखा।
उस पर बनी रेखाएं अचानक चमक उठीं।
"यह केवल कोई निशान नहीं है।"
"यह एक मानचित्र है।"
आर्यन नीचे बैठ गया।
"किसका?"
"उत्तर के सात पुराने मार्गों का।"
विराज ने कहा, "यह असंभव है।"
नीरिका ने उसकी तरफ देखा।
"तुम्हें अभी भी लगता है कि वह जगह मौजूद नहीं है?"
विराज ने कोई उत्तर नहीं दिया।
शौर्य ने पूछा, "कौन सी जगह?"
नीरिका ने कहा, "वह स्थान जहां सातवां बंधन पहली बार बना था।"
शौर्य का चेहरा बदल गया।
"वह यहीं है?"
"नहीं।"
नीरिका ने धातु के टुकड़े पर उंगली रखी।
"यहां से बहुत दूर।"
"लेकिन रास्ता यहां से शुरू होता है।"
आर्यन ने पूछा, "तुम्हें यह सब कैसे पता?"
नीरिका ने कुछ देर उसे देखा।
फिर पहली बार उसकी आवाज में हल्की थकान आई।
"क्योंकि मैं भी उस जगह से होकर आई हूं।"
शौर्य ने उसे ध्यान से देखा।
"कब?"
"बहुत पहले।"
"किसके साथ?"
नीरिका ने उत्तर नहीं दिया।
वह कुछ क्षण तक सामने देखती रही।
फिर उसने कहा, "तुम्हारी मां के साथ।"
शौर्य की सांस रुक गई।
"तुम मेरी मां को जानती थीं?"
नीरिका ने धीरे से सिर हिलाया।
"मैं उन्हें केवल जानती नहीं थी।"
"मैं उनकी आखिरी यात्रा में उनके साथ थी।"
आर्यन ने तुरंत पूछा, "और तुमने मुझे कभी नहीं बताया?"
नीरिका ने कहा, "तुमने कभी पूछा ही नहीं।"
आर्यन ने कठोर स्वर में कहा, "मुझे कैसे पता होता कि मुझे पूछना चाहिए?"
नीरिका चुप हो गई।
उसके चेहरे पर पहली बार अपराधबोध दिखाई दिया।
"तुम सही हो।"
"मुझे पहले बताना चाहिए था।"
विराज ने धीमे स्वर में पूछा, "फिर इतने वर्षों तक चुप क्यों रहीं?"
नीरिका ने उसकी ओर देखा।
"क्योंकि मुझे आदेश दिया गया था।"
"किसका?"
नीरिका ने उत्तर देने से पहले शौर्य की ओर देखा।
"तुम्हारी मां का।"
शौर्य ने कुछ नहीं कहा।
नीरिका ने आगे कहा, "उन्होंने मुझे कहा था कि जब तक सातवां बंधन खुद तुम्हें उत्तर की ओर न बुलाए, तब तक तुम्हें कुछ मत बताना।"
शौर्य ने अपनी हथेली देखी।
काला मोती वहां शांत पड़ा था।
"और अब?"
नीरिका ने कहा, "अब वह बुलावा आ चुका है।"
आर्यन ने पूछा, "तुम्हें कैसे पता?"
नीरिका ने अपनी हथेली आगे की।
उसकी कलाई पर एक बहुत हल्का निशान था।
सात रेखाएं।
लेकिन उनमें से केवल एक चमक रही थी।
"क्योंकि यह निशान आज पहली बार जागा है।"
शौर्य ने उसे ध्यान से देखा।
"यह क्या है?"
नीरिका ने कहा, "एक बंधन।"
आर्यन ने तुरंत पूछा, "तुम्हारे पास भी?"
नीरिका ने सिर हिलाया।
"लेकिन यह सातवां नहीं है।"
"तो कौन सा?"
नीरिका ने अपनी कलाई नीचे कर ली।
"दूसरा।"
विराज ने पहली बार चिंता से उसकी ओर देखा।
"तुमने इसे इतने सालों तक छिपाकर रखा?"
"हां।"
"क्यों?"
"क्योंकि अगर किसी को पता चलता कि मेरे भीतर दूसरा बंधन सक्रिय है, तो वे मुझे भी खोजने लगते।"
शौर्य ने पूछा, "कौन?"
नीरिका ने कहा, "वही लोग जो अयन को खोज रहे थे।"
आर्यन ने पूछा, "अयन उनका हिस्सा है?"
"नहीं।"
नीरिका ने सिर हिलाया।
"अयन उनसे भी पुराना है।"
शौर्य ने पूछा, "तो फिर वह चाहता क्या है?"
नीरिका ने कुछ देर तक चुप रहकर कहा।
"शायद तुम्हें।"
फिर उसने खुद ही अपनी बात सुधारी।
"नहीं।"
"वह तुम्हारे भीतर मौजूद शक्ति को चाहता है।"
शौर्य ने पूछा, "क्यों?"
नीरिका ने कहा, "क्योंकि सातवां बंधन अकेला पूरा नहीं होता।"
विराज ने तुरंत कहा, "नीरिका।"
नीरिका ने उसकी तरफ देखा।
"अब उसे जानना जरूरी है।"
"क्या?"
"सातवें बंधन को सक्रिय करने के लिए दूसरे बंधनों की आवश्यकता होती है।"
आर्यन ने कहा, "कितनों की?"
नीरिका ने उत्तर दिया।
"छह।"
शौर्य की आंखें फैल गईं।
"मतलब?"
नीरिका ने कहा, "तुम्हारा सातवां बंधन तभी पूरी तरह जाग सकता है जब बाकी छह बंधनों से उसका संपर्क हो।"
"और अगर वे छह लोग..."
आर्यन ने बात पूरी की।
"एक ही जगह आ जाएं?"
नीरिका ने सिर हिलाया।
"तो सातवां बंधन पूर्ण हो सकता है।"
विराज ने कहा, "और अगर यह हुआ, तो?"
नीरिका ने उसकी ओर देखा।
"तब यह तय नहीं होगा कि शक्ति किसकी है।"
"यह तय होगा कि शक्ति किसे स्वीकार करती है।"
शौर्य ने पूछा, "और अगर उसने मुझे स्वीकार कर लिया?"
नीरिका ने उत्तर नहीं दिया।
उसकी चुप्पी ही पर्याप्त थी।
शौर्य ने अपनी हथेली में काला मोती कसकर पकड़ लिया।
नीरिका ने कहा, "इसीलिए मुझे तुम्हारे साथ चलना होगा।"
आर्यन ने उसकी ओर देखा।
"क्यों?"
"क्योंकि मेरे पास दूसरा बंधन है।"
"और अगर छह में से कोई और बंधन तुम्हारे रास्ते में मिला, तो उसे पहचानने की क्षमता भी मेरे पास है।"
विराज ने कहा, "यह रास्ता बहुत खतरनाक होगा।"
नीरिका ने शांत स्वर में कहा, "मुझे पता है।"
फिर उसने शौर्य की ओर देखा।
"लेकिन इस बार मैं पीछे नहीं रहूंगी।"
शौर्य ने पहली बार उसके चेहरे पर दृढ़ता देखी।
अब वह केवल उनके साथ चलने वाली लड़की नहीं थी।
वह उस रहस्य का हिस्सा थी जिसे वे अब तक खोज रहे थे।
और शायद उससे भी अधिक।
नीरिका ने अपनी कलाई पर बने निशान को कपड़े से ढक दिया।
फिर उसने उत्तर की दिशा में देखा।
"चलो।"
आर्यन ने पूछा, "तुम्हें रास्ता पता है?"
नीरिका ने सिर हिलाया।
"हां।"
"कहां से जाना है?"
नीरिका ने कहा, "उस घाटी से जहां तुम्हारी मां ने आखिरी बार शौर्य को छिपाया था।"
शौर्य ने धीरे से पूछा, "वह जगह कितनी दूर है?"
नीरिका ने उत्तर दिया।
"तीन दिन।"
शौर्य ने एक लंबी सांस ली।
तीन दिन।
तीन दिन उस जगह तक जहां उसकी मां ने उसे आखिरी बार छिपाया था।
लेकिन नीरिका की अगली बात ने उसे रोक दिया।
"और रास्ते में हमें कम से कम एक और बंधन मिल सकता है।"
आर्यन ने पूछा, "किसका?"
नीरिका ने दूर पहाड़ों की ओर देखा।
"मुझे नहीं पता।"
उसने थोड़ी देर बाद कहा।
"लेकिन आज रात वह जाग चुका होगा।"
शौर्य ने अपनी हथेली खोली।
काला मोती हल्का चमक रहा था।
दूर कहीं पहाड़ों के भीतर एक धीमी गड़गड़ाहट सुनाई दी।
नीरिका ने आंखें बंद कर लीं।
उसकी कलाई पर दूसरा बंधन चमक उठा।
और पहली बार उसे स्पष्ट रूप से एक आवाज सुनाई दी।
बहुत दूर से।
बहुत धीमी।
"छठा जाग गया है।"
नीरिका ने आंखें खोल दीं।
उसका चेहरा गंभीर हो चुका था।
"हमें जल्दी करनी होगी।"
शौर्य ने पूछा, "क्यों?"
नीरिका ने उत्तर दिया।
"क्योंकि अब हम अकेले नहीं हैं।"
और इस बार उसने सबसे आगे चलना शुरू किया।